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हिमाचल प्रदेश: पहाड़ों में मिला फसलों को रोगों से बचाने वाला जीवाणु, फसल वृद्धि और फफूंद नियंत्रण में कारगर

Mon, 31 Aug 2026 10:15 AM IST
Ankesh Dogra हर्षित शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
हर्षित शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Mon, 31 Aug 2026 10:15 AM IST
सार

पहाड़ों की मिट्टी से वैज्ञानिकों को ऐसी ‘जैविक ताकत’ मिली है, जो भविष्य में फसलों को रोगों से बचाने में मदद कर सकती है। एचपीयू के शोध में मिला लिलियोटिया एक्वाटिलिस का एमसी-3 स्ट्रेन 27 जीवाणुओं में सबसे बेहतर साबित हुआ। यह फसल वृद्धि बढ़ाने, फफूंद पर नियंत्रण और कठिन पर्यावरणीय परिस्थितियों को सहने की क्षमता रखता है।

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एचपीयू शिमला। - फोटो : संवाद

विस्तार

वैज्ञानिकों ने एक ऐसे जीवाणु की खोज की है, जो पहाड़ों में फसलों को रोगों से बचाएगा। लिलियोटिया एक्वाटिलिस का एमसी-3 स्ट्रेन फसल वृद्धि, फफूंद नियंत्रण और पर्यावरणीय तनाव सहने में बेहतर क्षमता दिखाता है। शोधकर्ताओं ने इसे जैव रोग नियंत्रक के लिए कारगर माना है। 

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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) का यह शोध फ्रंटियर्स इन सिस्टम्स बायोलॉजी में तीन अगस्त को प्रकाशित हुआ। शोध के लिए शिमला में काफल की जड़ों और सोलन में दीमक के टीलों से नमूने लिए गए। करौंदा और कैंथ से जुड़े नमूनों को भी जांचा गया। कुल 27 जीवाणु अलग किए गए, जिनमें एमसी-3 ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। एमसी-3 ने मिट्टी में अघुलनशील फाॅस्फोरस को पौधों के लिए उपलब्ध कराने की क्षमता दिखाई। इसके साथ आईएए, सिडेरोफोर और अमोनिया बनाने की क्षमता भी मिली। आईएए का स्तर 16.8 माइक्रोग्राम प्रति मिलीलीटर तक दर्ज हुआ। फफूंद नियंत्रण में भी एमसी-3 का असर मजबूत रहा। चने पर किए गए प्रयोग में एमसी-3 उपचार से पौधों की वृद्धि में सुधार हुआ। इसे सात और 14 दिन बाद जांचा गया।

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एमसी-3 वाले उपचार में तने की लंबाई में सबसे बेहतर बढ़ोतरी दर्ज हुई। जीवाणु ने नमक, सूखे और अलग-अलग अम्लीय-क्षारीय परिस्थितियों में भी सहनशीलता दिखाई। यह पांच फीसदी तक नमक में सहनशील रहा,10 फीसदी नमक में जीवित रहा। सूखे के लिए 25 फीसदी पीईजी तक परीक्षण किया गया। 

वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि अभी इसके खेत स्तर पर परीक्षण बाकी हैं। सुरक्षित कृषि उपयोग से पहले पूरे जीनोम की जांच और जैव सुरक्षा परीक्षण जरूरी होंगे। इस अध्ययन की प्रमुख लेखिका शिखा देवी हैं। शोध दल में रिया चंदेल, दामिनी ठाकुर, श्वेता पठानिया, सिमरन चौहान, निश्ता पाठक, पूनम कटोच, तानिया त्यागी, सुशीला देवी, अरविंद कुमार भट्ट और स्वेता ठाकुर शामिल हैं।

27 जीवाणुओं में एमसी-3 ने मारी बाजी
शोधकर्ताओं ने हिमालयी क्षेत्रों से कुल 27 जीवाणु अलग किए। इनमें नौ जीवाणु काफल की जड़ों के आसपास की मिट्टी से मिले। दस जीवाणु दीमक के टीलों से जुड़े पौधों की मिट्टी से मिले। आठ जीवाणु पौधों के अंदरूनी ऊतकों से अलग किए गए। सभी नमूनों की पौधों की वृद्धि बढ़ाने वाली क्षमताओं के लिए जांच हुई। एमसी-3 ने फफूंद नियंत्रण, पोषण उपलब्ध कराने और कठिन परिस्थितियों को सहने में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। 
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