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ऑनलाइन सिस्टम पर विवि के कर्मचारियों ने खोला मोचा
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विवि प्रशासन को खामियां दूर करने का दिया अल्टीमेटम
बोले, करोड़ों खर्च कर भी नहीं मिल रही राहत
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का ईआरपी (एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग) सिस्टम एक बढ़ी विफलता साबित हुई है। विवि में ऑनलाइन सेवाएं मुहैया करवाने के लिए ईआरपी की स्थापना की थी। इसमें करोड़ों रुपये खर्च हुआ है। लेकिन आए दिन छात्रों को इस सिस्टम की वजह से परेशानी झेलनी पड़ रही है।
ईआरपी सिस्टम की खामियों और विफलता से पेश आ रही समस्याओं को लेकर बुधवार को विवि के गैर शिक्षक कर्मचारी संघ ने आपात बैठक की। कर्मचारियों ने चरचा के बाद इस मामले को विवि प्रशासन के समक्ष उठाने का निर्णय लिया है। कुलपति की गैर मौजूदगी में गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष राजेश ठाकुर, महासचिव गीता राम ठाकुर और अन्य पदाधिकारियों ने विवि के कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक और अतिरिक्त परीक्षा नियंत्रक को ऑनलाइन प्रणाली की खामियों बारे ज्ञापन सौंपे।
कर्मचारियों ने कहा कि ईआरपी प्रोजेक्ट पर अब तक करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। सालाना लाखों रुपये अलग से खर्च किया जा रहा है। बावजूद इसके विवि के लाखों छात्रों के साथ कर्मचारियों के लिए यह सिस्टम सिरदर्द बन गया है। कर्मचारी संघ ने फर्म की हर त्रुटि के लिए जिम्मेदारी सुनिश्चित करने और अब तक हुई गड़बड़ियों के लिए फर्म के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग उठाई। संघ ने चेताया कि इसके बावजूद यदि प्रणाली में सुधार न हुआ तो कर्मचारी विवि प्रशासन के खिलाफ आम छात्रों को लामबंद कर आंदोलन छेड़ देगा। ऑनलाइन सिस्टम में खामियों के चलते परीक्षा संबंधित कार्य प्रभावित हो रहा है। इस कारण अब तक कई मामले न्यायालय में जा चुके हैं। सीएम हेल्प लाइन पर लगातार शिकायतों का आंकड़ा बढ़ रहा है। इससे विवि की छवि भी धूमिल हो रही है।
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संघ ने बताईं ईआरपी की खामियां
संघ ने कुलसचिव को ईआरपी की खामियों से अवगत करवाया। बताया कि छात्रों का डाटा अपलोड करने का कार्य देरी से होता है। ऑनलाइन शुल्क जमा करवाने में समस्या पेश आती है, साइट सही ढंग से नहीं चलती, फीस रिफंड करने में भी दिक्कत होती है। छात्रों को मैसेज भेजने की सेवा में भी खामी है, ऑनलाइन परीक्षा रिकार्ड रखने में दिक्कत होती है, 2019 से लेकर पूर्व मूल्यांकन की एंट्री नहीं हो पा रही, अवार्ड अपलोड करने, सत्यापन के बाद अवार्ड डिलीट हो रहे हैं। संघ ने ईआरपी प्रोजेक्ट का कार्य देख रही कंपनी के दस हेल्प लाइन नंबर जारी करने की मांग की है।
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बोले, करोड़ों खर्च कर भी नहीं मिल रही राहत
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का ईआरपी (एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग) सिस्टम एक बढ़ी विफलता साबित हुई है। विवि में ऑनलाइन सेवाएं मुहैया करवाने के लिए ईआरपी की स्थापना की थी। इसमें करोड़ों रुपये खर्च हुआ है। लेकिन आए दिन छात्रों को इस सिस्टम की वजह से परेशानी झेलनी पड़ रही है।
ईआरपी सिस्टम की खामियों और विफलता से पेश आ रही समस्याओं को लेकर बुधवार को विवि के गैर शिक्षक कर्मचारी संघ ने आपात बैठक की। कर्मचारियों ने चरचा के बाद इस मामले को विवि प्रशासन के समक्ष उठाने का निर्णय लिया है। कुलपति की गैर मौजूदगी में गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष राजेश ठाकुर, महासचिव गीता राम ठाकुर और अन्य पदाधिकारियों ने विवि के कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक और अतिरिक्त परीक्षा नियंत्रक को ऑनलाइन प्रणाली की खामियों बारे ज्ञापन सौंपे।
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कर्मचारियों ने कहा कि ईआरपी प्रोजेक्ट पर अब तक करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। सालाना लाखों रुपये अलग से खर्च किया जा रहा है। बावजूद इसके विवि के लाखों छात्रों के साथ कर्मचारियों के लिए यह सिस्टम सिरदर्द बन गया है। कर्मचारी संघ ने फर्म की हर त्रुटि के लिए जिम्मेदारी सुनिश्चित करने और अब तक हुई गड़बड़ियों के लिए फर्म के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग उठाई। संघ ने चेताया कि इसके बावजूद यदि प्रणाली में सुधार न हुआ तो कर्मचारी विवि प्रशासन के खिलाफ आम छात्रों को लामबंद कर आंदोलन छेड़ देगा। ऑनलाइन सिस्टम में खामियों के चलते परीक्षा संबंधित कार्य प्रभावित हो रहा है। इस कारण अब तक कई मामले न्यायालय में जा चुके हैं। सीएम हेल्प लाइन पर लगातार शिकायतों का आंकड़ा बढ़ रहा है। इससे विवि की छवि भी धूमिल हो रही है।
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संघ ने बताईं ईआरपी की खामियां
संघ ने कुलसचिव को ईआरपी की खामियों से अवगत करवाया। बताया कि छात्रों का डाटा अपलोड करने का कार्य देरी से होता है। ऑनलाइन शुल्क जमा करवाने में समस्या पेश आती है, साइट सही ढंग से नहीं चलती, फीस रिफंड करने में भी दिक्कत होती है। छात्रों को मैसेज भेजने की सेवा में भी खामी है, ऑनलाइन परीक्षा रिकार्ड रखने में दिक्कत होती है, 2019 से लेकर पूर्व मूल्यांकन की एंट्री नहीं हो पा रही, अवार्ड अपलोड करने, सत्यापन के बाद अवार्ड डिलीट हो रहे हैं। संघ ने ईआरपी प्रोजेक्ट का कार्य देख रही कंपनी के दस हेल्प लाइन नंबर जारी करने की मांग की है।