सोलर रूफ टॉप की बिजली खरीदने से मुकरा बिजली बोर्ड
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सोलर रूफ टॉप की बिजली खरीदने से बोर्ड प्रबंधन ने मुकर गया है। आर्थिक बोझ का हवाला देते हुए प्रबंधन ने अपने हाथ खड़े करते हुए प्रति यूनिट पैसा देने की जगह निशुल्क सप्लाई उपलब्ध करवाने की बात कही है। हिम ऊर्जा के अधिकारियों के मुताबिक अब सौर ऊर्जा संयंत्र से ग्रिड को दी जाने वाली बिजली की एवज में बोर्ड प्रति यूनिट पैसा नहीं देगा। उपभोक्ताओं के बिजली बिल में इस पैसे को ऐडजस्ट किया जाएगा।
घर की छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की योजना में बिजली बोर्ड ने पांच रुपये और ढाई रुपये प्रति यूनिट के दाम पर बिजली खरीदने की बात कही थी। संयंत्र लगाने के लिए पचास फीसदी से कम सब्सिडी लेने वालों से पांच रुपये प्रति यूनिट और अस्सी फीसदी तक सब्सिडी लेने वालों से ढाई रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदने की बात कही थी, लेकिन अब बोर्ड प्रबंधन इसके लिए राजी नहीं है। ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने बताया कि सौर ऊर्जा संयंत्र की बिजली प्रयोग करने के बाद बचने वाली बिजली को बोर्ड को दिया जाएगा। इस बिजली की जगह बोर्ड उपभोक्ता को दी जाने वाली बिजली के बिल में ऐडजस्ट करेगा।
14300 रुपये में लगेगा एक किलोवॉट का संयंत्र
एक किलोवॉट का सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने के लिए लोगों को 14300 रुपये खर्च करने पड़ेंगे। संयंत्र को लगाने का कुल खर्च करीब 61 हजार रुपये पड़ता है। इसमें 80 फीसदी सब्सिडी मिलेगी। एक किलोवॉट से लेकर 10 किलोवॉट तक का प्लांट लगाया जा सकता है। एक किलोवॉट का प्लांट प्रतिदिन 5 यूनिट बिजली पैदा करता है।
स्वीकृत लोड का सौ फीसदी क्षमता का संयंत्र देने की तैयारी
शिमला। छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने वाले लोगों को सरकार बड़ी राहत भी देने जा रही है। वर्तमान में बिजली बोर्ड की ओर से स्वीकृत किए गए कुल लोड का 30 फीसदी क्षमता वाला सौर ऊर्जा संयंत्र मंजूर किया जा रहा है। इस व्यवस्था को बदलते हुए सरकार स्वीकृत लोड का सौ फीसदी क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र मंजूर करने की तैयारी में है।
संयंत्र लगाने को 47 कंपनियां पंजीकृत
शिमला। प्रदेश में हिम ऊर्जा के माध्यम से सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जा रहे हैं। सरकार ने संयंत्र लगाने के लिए 47 कंपनियों को पंजीकृत किया है। लोगों को संयंत्र लगाने के लिए एक फार्म भर कर हिम ऊर्जा के जिला परियोजना अधिकारी को देना होगा।