सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल, सांसद अनुराग ठाकुर और अन्य के खिलाफ एचपीसीए मामले में दायर प्राथमिकियां निरस्त करने की याचिका मंजूर करते हुए इसकी जांच पर कई सवाल खड़े किए हैं।
कोर्ट ने अभियोजन पक्ष पर टिप्पणी करते हुए सवाल उठाए कि पूर्व आईएएस अधिकारी सुभाष आहलूवालिया और टीजी नेगी की संबंधित फैसलों में सक्रिय भूमिका रही, मगर उन पर जानबूझकर मुकदमे नहीं चलाए गए और उनकी सीएम कार्यालय में नियुक्ति कर दी गई।
छह बड़े अधिकारियों में से किसी पर भी मुकदमा नहीं चला। छोटे अधिकारियों को ही बलि का बकरा बनाया। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि प्रार्थियों के खिलाफ ठगी, जालसाजी और क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट का कोई केस नहीं बनाया जा सका।
सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने कई प्रश्न उठाते हुए स्पष्ट किया कि धूमल, अनुराग तथा अन्य के खिलाफ दो एफआईआर (12/13 और 14/13) निरस्त करने की एचपीसीए की और अन्य याचिका को मंजूर किया। कोर्ट ने कहा कि क्रिकेट मैदान का अभाव होने पर इसके लिए न्यूनतम किराये पर जमीन लीज पर दी गई जो हिमाचल के लिए गर्व का विषय होना था।
बाकी क्लब हाउस और होटल के लिए लीज रूल्स 2011 के अनुसार लीज मनी वाणिज्यिक दरों पर तय की गई। मुश्किल से इसमें कोई अपराध का तत्व रहा है। बड़े अफसरों में से आरएस गुप्ता और दीपक सानन को ही संलिप्त बताया। निर्णय लेने वालों में छह वरिष्ठ अधिकारियों में से चार आईएएस और एक एचएएस अफसर शामिल थे।