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सीबीएसई की तर्ज पर हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड देगा गणित में विकल्प
Tue, 23 Apr 2019 12:33 PM IST
Krishan Singh
राकेश भारद्वाज, अमर उजाला, धर्मशाला
राकेश भारद्वाज, अमर उजाला, धर्मशाला
Published by: Krishan Singh
Updated Tue, 23 Apr 2019 12:33 PM IST
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सीबीएसई की तर्ज पर राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड बच्चों को गणित के प्रश्न पत्र के लिए विकल्प देगा। बेसिक मैथ और स्टैंडर्ड मैथ पर आधारित बोर्ड वार्षिक परीक्षाओं के लिए दो प्रश्न पत्र तैयार करेगा।
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परीक्षार्थियों को इन दो प्रश्नपत्रों में से एक को चुनना होगा। बोर्ड के इस फैसले से उन हजारों बच्चों को लाभ मिलेगा, जो गणित में कमजोर होने के कारण पढ़ाई से वंचित रह जाते हैं।
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शुरुआती दौर में मैट्रिक में इसे शुरू किया जाएगा। जबकि इसके सफल परिणाम को देखकर अन्य कक्षाओं में भी शुरू किया जा सकेगा। इसके अलावा अन्य प्रश्न पत्रों में भी बोर्ड बदलाव करके 40:40:20 के अनुपात प्रश्नों की संख्या रखेगा।
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प्रत्येक प्रश्न पत्र में 40 फीसदी आसान, 40 फीसदी मध्यम दर्जे के प्रश्न पूछे जाएंगे, जबकि 20 फीसदी प्रश्नों का स्तर ऊंचा होगा। ऐसे में जहां निम्न दर्जे के विद्यार्थियों को पास होने में आसानी होगी।
कक्षाओं में ड्रॉप आउट रुकेगा
डॉ. सुरेश कुमार सोनी
वहीं मेरिट में वही बच्चे आएंगे, जो उच्च स्तरीय 20 फीसदी अंकों को हल कर सकेंगे। बोर्ड ने यह फैसला बच्चों की सहूलियत के लिए लिया है। बोर्ड के इस फैसले से निम्न स्तर के बच्चे, जो फेल होने के बाद स्कूल छोड़ देते हैं।
उनका स्कूलों से ड्रॉपआउट रूकेगा, जबकि प्रश्न पत्रों में बदलाव से वह बच्चे ही मेरिट में आ सकेंगे, जिन्होंने वार्षिक परीक्षा के लिए उच्च स्तरीय तैयारी की होगी।
स्कूल शिक्षा बोर्ड सामाजिक विज्ञान की पाठ्य पुस्तकों में सुधार करेगा। पुस्तकों में शामिल पाठ की रुपरेखा ठीक न होने के कारण उसको पढ़ने और पढ़ाने में निरंतरता नहीं बन पाती है।
प्रश्न पत्रों के पैटर्न में बदलाव के लिए बोर्ड अध्यापकों की कार्यशाला होगी। मैट्रिक में बेसिक और स्टैंडर्ड प्रश्न पत्रों सहित अन्य बदलाव को लेकर रूपरेखा तैयार होगी। - डॉ. सुरेश कुमार सोनी, अध्यक्ष स्कूल शिक्षा बोर्ड
उनका स्कूलों से ड्रॉपआउट रूकेगा, जबकि प्रश्न पत्रों में बदलाव से वह बच्चे ही मेरिट में आ सकेंगे, जिन्होंने वार्षिक परीक्षा के लिए उच्च स्तरीय तैयारी की होगी।
स्कूल शिक्षा बोर्ड सामाजिक विज्ञान की पाठ्य पुस्तकों में सुधार करेगा। पुस्तकों में शामिल पाठ की रुपरेखा ठीक न होने के कारण उसको पढ़ने और पढ़ाने में निरंतरता नहीं बन पाती है।
प्रश्न पत्रों के पैटर्न में बदलाव के लिए बोर्ड अध्यापकों की कार्यशाला होगी। मैट्रिक में बेसिक और स्टैंडर्ड प्रश्न पत्रों सहित अन्य बदलाव को लेकर रूपरेखा तैयार होगी। - डॉ. सुरेश कुमार सोनी, अध्यक्ष स्कूल शिक्षा बोर्ड