टीचर्स सावधान, राजनीति की तो क्या होगा...
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एचपीयू टीचर्स को यूनिवर्सिटी ऑर्डिनेंस में दिए गए विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ने का विशेष अधिकार को आर्डिनेंस में बदलाव करने को ईसी से हरी झंडी मिल चुकी है। जिसका अर्डिनेंस में 35:20 को बदलकर छीना जाना तय है, आर्डिनेंस बदलने को ईसी में आम सहमति बन चुकी है, जिसे विधानसभा में बदला जाना है।
चुनाव लड़ने के अधिकार को समाप्त करने के साथ ही अब सिर्फ शिक्षकों के लिए राजनीतिक गतिविधि का दायरा निर्धारित किया जा रहा है। इस दायरे के भीतर रहकर ही शिक्षक परिसर में राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा ले सकेंगे। 24 जून को विश्वविद्यालय कार्यकारी परिषद द्वारा गठित की गई विशेष कमेटी राजनीतिक गतिविधियों के दायरे को तय करने पर अपनी रिपोर्ट जल्द सौंपेगी।
विरोध में थे टीचर्स
ईसी सदस्य चंद्रशेखर, विधि विभागाध्यक्ष प्रो. एचआर झिंगटा और उप कुल सचिव की तीन सदस्यीय कमेटी ने बीते दिनों बैठक की। इसमें विवि में सक्रिय तीनों विचारधारा के शिक्षक संगठन प्रतिनिधियों से राजनीतिक गतिविधियों के दायरे पर चर्चा की।
इस बैठक में हपुटा अध्यक्ष प्रो. रघुविंद्र सिंह, हपुटवा अध्यक्ष प्रो. कुलवंत पठानिया, तीसरी विचारधारा से संबद्ध शिक्षकों के प्रतिनिधि के रूप में प्रो. घनश्याम ने हिस्सा लिया। तीनों ने कर्मचारियों से विधानसभा चुनाव लड़ने के अधिकार को छीनने का विरोध किया।
इसके साथ ही उन्होंने परिसर में शिक्षकों के राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने और सीमा तय करने पर भी विचार रखे। कमेटी के सदस्य प्रो. एचआर झिंगटा ने बताया कि शिक्षक प्रतिनिधि लिखित में परिसर में राजनीतिक गतिविधियों के दायरे को लेकर अपनी बात कमेटी को सौंपेंगे। इसके बाद कमेटी अपनी रिपोर्ट विवि प्रशासन को सौंपेगी।
क्या था कर्मचारियों का अधिकार
विवि आर्डिनेंस के क्लोज 35.20 में विवि के शिक्षकों को विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ने का अधिकार था। अब विवि ईसी के फैसले के बाद इसे समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
विवि शिक्षकों पर सेंट्रल कंडक्ट सर्विस रूल (सीसीएस) पूरी तरह से लागू होगा। हालांकि यह पहले भी लागू था, मगर शिक्षक अवकाश लेकर इन दो चुनाव को पार्टी सिंबल पर लड़ सकते थे।
तीन शिक्षकों ने लड़ा था चुनाव
विवि आर्डिनेंस में दिए विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए अब तक तीन शिक्षकों प्रो. शिव राज सिंह, प्रो. एसी पॉल और प्रो. प्रमोद शर्मा ने विधानसभा चुनाव लड़ा है। इसके लिए उन्होंने आर्डिनेंस के तहत अपनी छुट्टियाें का इस्तेमाल किया था।