अब रेप पीड़ित लड़की को हर महीने देने होंगे 5000 रुपये
- हाईकोर्ट ने सिरमौर जिला के मामले की सुनवाई के बाद दिए आदेश
- कहा, डीजीपी स्वयं करें दुष्कर्म मामले की जांच, पीड़ित को दें सुरक्षा
- पीड़ित के अटेंडेंट को नाहन रेस्टहाउस में ठहराने का करना होगा इंतजाम
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हिमाचल के जिला सिरमौर में बीते साल हुए दुष्कर्म के बाद गर्भवती हुई नाबालिग लड़की के मामले में हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिए हैं कि वह पीड़ित को एक साल तक प्रतिमाह पांच हजार रुपये अंतरिम राहत दे। तुरंत प्रभाव से राशि देने के आदेश दिए गए हैं।
न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर की खंडपीठ ने पीड़ित लड़की की याचिका की सुनवाई के बाद दुष्कर्म के मामले की जांच की निगरानी डीजीपी को स्वयं करने के आदेश भी दिए हैं। कोर्ट ने इस मामले में सरकार से चार सप्ताह के भीतर जवाबतलब किया है।
हाईकोर्ट ने सिरमौर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को प्रतिवादी बनाते हुए आदेश दिए हैं कि वह पीड़ित लड़की को सभी स्वास्थ्य सुविधाएं मुफ्त में दें। पीड़ित लड़की को नाहन के जिला अस्पताल में डिलिवरी के लिए भर्ती किया गया है।
पिछले साल शिक्षक ने किया था नाबालिग से रेप
कोर्ट ने स्थानीय प्रशासन को आदेश दिए कि वह पीड़ित लड़की के अटेंडेंट को नाहन के रेस्ट हाउस में पर्याप्त रिहायश मुहैया करवाए। कोर्ट ने पुलिस अधीक्षक सिरमौर को भी आदेश दिए हैं कि वह पीड़ित लड़की और उनके परिवार के सदस्यों को सुरक्षा मुहैया करवाए।
ज्ञात हो कि पीड़ित नाबालिग लड़की के साथ कथित तौर पर उसके ही टीजीटी (शिक्षक) जगतार सिंह द्वारा बीते साल सितंबर में दुष्कर्म करने का आरोप है। दुष्कर्म की एफआईआर इस साल अप्रैल महीने में दर्ज हुई है।
दुष्कर्म के कारण पीड़ित लड़की 32 सप्ताह की गर्भवती हो चुकी है। इस कारण उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। पीड़ित लड़की को सरकार व प्रशासन से जरूरी सुविधाएं और सुरक्षा न मिल पाने के कारण हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।