हाईकोर्ट ने एमएमयू को लगाई फटकार, दाखिले के दिए आदेश
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्टेट काउंसिलिंग कमेटी की ओर से सीटें अलाट करने के बावजूद छात्रों को एडमिशन न देने पर हिमाचल हाईकोर्ट ने महर्षि मार्कंडेश्वर विश्वविद्यालय को कड़ी फटकार लगाई है।
खंडपीठ ने एमएमयू को आदेश दिए कि वह काउंसलिंग कमेटी की लिस्ट के अनुसार छात्रों को दाखिला दे। कोर्ट ने अपने आदेशों में यह भी स्पष्ट किया कि दाखिला लेने वाले छात्रों को यह अंडरटेकिंग देनी होगी कि यदि इस मामले में कभी भी कोर्ट ने दाखिला फीस में कोई बदलाव किया तो उन्हें वह मान्य होगा।
यह अंडरटेकिंग हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार के समक्ष देनी होगी। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने आरुषि ठाकुर सहित 62 छात्रों की ओर से दायर रिट याचिका की सुनवाई के बाद यह आदेश दिए हैं।
पहले विवि नहीं दे रहा था एडमिशन, कोर्ट गए थे छात्र
प्रार्थियों ने हाईकोर्ट में दरख्वास्त दी थी कि उन्हें एमएमयू एमबीबीएस कोर्स में दाखिला नहीं दे रहा है। वहीं, विश्वविद्यालय का कहना है कि मौजूदा फीस में उन्हें संस्थान चलाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
सरकार एक तरफ तो बेहतर शिक्षा देने की बात करती है, लेकिन फीस में जरूरत के हिसाब से बदलाव करने में पीछे रहती है। मामले में 8 सितंबर को स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ने भी दाखिला देने की अनुशंसा की।
लेकिन विश्वविद्यालय ने एडमिशन नहीं दिया। अब कोर्ट ने मामले के सभी पक्षों को याचिका का जवाब 26 सितंबर तक दायर करने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 3 अक्तूबर को होगी।