शिक्षकों के लिए बड़ी खबर, जल्द होने वाले हैं तबादले
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हिमाचल के शहरी स्कूलों में सरप्लस शिक्षकों का तबादला होगा। प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में जेबीटी की तैनाती छात्रों की संख्या के हिसाब से होगी। शिक्षकों का युक्तिकरण करने में प्रारंभिक शिक्षा विभाग जुट गया है, जल्द ही तय मानकों के खिलाफ तैनात शिक्षकों को बदला जाएगा। प्रदेश के शहरी स्कूलों में नियमों के विपरीत शिक्षक स्कूलों में लगे हुए हैं।
नियमों के मुताबिक 60 विद्यार्थियों पर दो शिक्षकों की तैनाती होनी चाहिए लेकिन शहरी स्कूलों में 60 विद्यार्थियों पर पांच-पांच शिक्षक तैनात हैं। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह स्वयं इस तरह के मामलों की गंभीरता को देखते हुए युक्तिकरण के आदेश दे चुके हैं। कैबिनेट से भी यह प्रस्ताव पास हुआ है। शिक्षा विभाग में राजनीतिक दखल के चलते कई प्राइमरी स्कूलों में आरटीई एक्ट की अवहेलना हो रही है।
एक्ट के अनुसार होने चाहिए इतने टीचर
एक्ट के मुताबिक 0 से 60 छात्रों की संख्या पर दो शिक्षक, 61 से 90 छात्रों तक 3 शिक्षक तैनात होने चाहिए। स्कूल में सिर्फ एक शिक्षक की नियुक्ति भी नहीं होनी चाहिए, लेकिन प्रदेश के कई शहरी क्षेत्रों में एक्ट की धज्जियां उड़ रही है। शहरी स्कूलों में 60 छात्रों पर पांच-पांच शिक्षक तैनात हैं।
युक्ति करण के तहत ऐसे शिक्षकों को चिन्हित कर बदला जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। यहां भी शिक्षा का अधिकार एक्ट को पूरा नहीं किया जा रहा है। अफसरशाही भी नेताओं के आगे नतमस्तक है। सब कुछ देखकर भी चुप्पी साधने को विवश है।
नियमों के तहत ही होगी नियुक्ति : परुथी
प्रारंभिक शिक्षा विभाग के निदेशक आरके परुथी का कहना है कि युक्तिकरण की प्रक्रिया जारी है। फील्ड से रिकार्ड आ रहे हैं। कई जिलों में फेरबदल किया भी गया है। पूरे प्रदेश में नियमों के तहत ही शिक्षकों की तैनाती होगी।
शिक्षकों से गैर शिक्षक कार्य करवाना गलत
वहीं, राजकीय अध्यापक संघ ने शिक्षकों से गैर शिक्षण कार्य करवाने का विरोध किया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा है कि मुख्यमंत्री के शिमला लौटते ही इस समस्या को उठाया जाएगा। उन्होंने बताया कि शिक्षकों को एक महीने के लिए गैर शिक्षण कार्यों में लगाया जा रहा है।
सात सितंबर से छह अक्तूबर तक परिवार रजिस्ट्रर पंजीकरण और 15 सितंबर से 14 अक्तूबर तक इलेक्ट्रोल रोल रिवीजन में शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके लिए करीब 15 हजार शिक्षकों को नियुक्त किया गया है। जिलों में एक हजार से लेकर 1500 शिक्षकों की ड्यूटी उपायुक्तों ने लगाई है।
वीरेंद्र चौहान ने कहा कि इस तरह शिक्षकों से गैर शिक्षण कार्य लेना आरटीई एक्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करना है। मुख्यमंत्री के समक्ष इस मामले को उठाया जाएगा। संघ ने प्रारंभिक शिक्षा निदेशक को भी इस बारे अवगत कराया है।
कंप्यूटर शिक्षकों का हो रहा शोषण
उधर, प्रदेश कंप्यूटर टीचर्स एसोसिएशन ने कंप्यूटर शिक्षक वर्ग को सबसे अधिक शोषित वर्ग बताया है। संघ के प्रधान रमेश चंद ने बताया कि सूबे के सरकारी स्कूलों में वर्ष 2001 से कार्यरत कंप्यूटर शिक्षकों को अब कंपनी राज कतई मंजूर नहीं है। कंप्यूटर शिक्षा देकर शिक्षक प्रदेश का नाम अग्रणी राज्यों में शामिल कर रहे हैं, लेकिन उनका जमकर शोषण हो रहा है।
उनके अनुसार 14 वर्षों से कंप्यूटर शिक्षकों को उचित वेतन नहीं मिल रहा है। अभी तक सरकार ने कंप्यूटर शिक्षकों के लिए कोई नीति नहीं बनाई है। शिक्षा विभाग में रखे जा रहे शिक्षकों को कंप्यूटर शिक्षकों के मुकाबले दोगुना वेतन और अन्य सुविधाएं प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने वर्ष 2008 में कंप्यूटर शिक्षकों को शिक्षा विभाग में मर्ज करने के लिए एक नीति बनाई थी।
लेकिन दूसरी सरकार ने आते ही उसे दरकिनार कर दिया। जिसके विरोध में कंप्यूटर शिक्षकों ने 2008 में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार के खिलाफ गांधी चौक हमीरपुर में 45 दिनों तक आमरण अनशन किया था। 2013 में सत्ता में आते ही मुख्यमंत्री ने केवल एक वर्ष के लिए कंपनी को ठेका दिया था, लेकिन हर बार छह माह की एक्टेंशन देकर इसे अढ़ाई साल हो गए। अब यह 30 सितंबर 2015 को खत्म हो रही है।