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सरकार को सीधे कोई पत्र नहीं भेज सकेंगे शिक्षक, विभाग ने दिया इन नियमों का हवाला

Wed, 07 Feb 2018 10:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Wed, 07 Feb 2018 10:14 AM IST
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hp govt teachers can not correspondence direct to minister

निदेशालय और वरिष्ठ अफसरों को दरकिनार कर सरकार से सीधे पत्राचार करने वाले शिक्षक अब नपेंगे। स्कूल और कॉलेज प्रिंसिपलों, लेक्चररों समेत तमाम शिक्षक अब सरकार को सीधे कोई पत्र नहीं लिख सकेंगे। 

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केंद्र के नियमों का हवाला देते हुए शिक्षा विभाग ने बिना सूचना के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्रियों, सचिवों और विभागाध्यक्षों को सीधे पत्र लिखने पर रोक लगा दी है। उच्च शिक्षा निदेशालय ने मंगलवार को इस बाबत कॉलेज प्रिंसिपलों एवं शिक्षा उपनिदेशकों को आदेश जारी कर दिए हैं। 
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आदेशों में कहा गया है कि अगर कोई अध्यापक इसका उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कंडक्ट रूल्स के तहत कार्रवाई की जाएगी। संयुक्त निदेशक की ओर से जारी आदेशों में सभी तरह का पत्राचार अब विभागीय चैनल के माध्यम से ही करने के लिए कहा गया है।

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मंत्री के कमरे के बाहर लगी रहती है भीड़

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इसके साथ ही सीएम और मंत्रियों से मिलने सचिवालय पहुंच रहे शिक्षकों पर भी शिकंजा कस दिया गया है। प्रदेश के विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों के कई शिक्षक लंबे समय से विभिन्न मसलों को लेकर सीधे सरकार से पत्राचार कर रहे थे। 

कई शिक्षक तो डेपुटेशन लेकर मुख्यमंत्री और मंत्रियों तक से मिलने सचिवालय पहुंच रहे हैं। इससे स्कूलों में पढ़ाई के साथ साथ विभागीय कामकाज भी प्रभावित हो रहा था। इसके चलते उच्च शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों-कॉलेजों के प्रिंसिपलों और शिक्षकों के सीधे पत्राचार पर रोक लगाते हुए नई व्यवस्था लागू कर दी है।

सचिवालय में शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज के कार्यालय में बीते एक माह से भारी संख्या में रोज शिक्षकों की भीड़ लगी रहती है। शिक्षक संघों के प्रतिनिधिमंडल आए दिन सचिवालय में देखने को मिल रहे हैं।

मुख्यमंत्री आवास ओक ओवर में भी रोजाना सैकड़ों शिक्षक अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंप रहे हैं। विभाग ने इस परंपरा को भी खत्म करने के लिए यह कदम उठाया है।

139 मॉडल स्कूलों पर कैसे खर्चा बजट, ब्योरा तलब

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 प्रदेश में अधिसूचित किए गए 139 मॉडल स्कूलों में बीते एक साल के दौरान बजट किस तरह से खर्च किया गया है? इन स्कूलों में पहले से क्या बदलाव आया है? उच्च शिक्षा निदेशालय ने दस फरवरी तक प्रदेश के सभी जिला उपनिदेशकों से इस संदर्भ में ब्योरा तलब किया है। 

साल 2016 के बजट में कांग्रेस सरकार ने प्रदेश में मुख्यमंत्री आदर्श विद्यालय योजना शुरू की थी। हर विधानसभा क्षेत्र के दो-दो स्कूलों को चिन्हित कर मॉडल बनाने का फैसला लिया था। शिमला ग्रामीण से पांच स्कूल चुने गए थे।

बीते साल हर स्कूल को शिक्षा निदेशालय ने 21-21 लाख रुपये का बजट जारी किया था। मॉडल स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम बनने हैं। खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए काम किया जाना है। कॉन्वेंट स्कूलों को टक्कर देने के लिए कांग्रेस सरकार ने यह योजना चलाई थी।

अब प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होते ही भाजपा सरकार ने इन मॉडल स्कूलों में किए गए कामों की समीक्षा करने का फैसला लिया है। इसी कड़ी में शिक्षा निदेशालय ने जिलों से स्कूलों में हुए विकास कार्यों का ब्योरा तलब किया है। 

संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा ने सभी जिला उपनिदेशकों से मॉडल स्कूलों को जारी हुए बजट, इस बजट से हुए कार्यों का ब्योरा तलब किया है। शिक्षा निदेशालय ने 100 दिनों के टारगेट में मॉडल स्कूलों को सही तरीके से चलाने का लक्ष्य रखा है।

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