पतंजलि के नमूनों की रिपोर्ट तलब, देरी से सरकार खफा
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पतंजलि उत्पाद के नमूनों की जांच में हुई देरी से प्रदेश सरकार से खफा है। सरकार ने स्वास्थ्य अधिकारी से इसकी रिपोर्ट तलब की है। सचिवालय में शुक्रवार को पीलिया को लेकर आयोजित हाई पावर कमेटी की बैठक में रामदेव प्रोडेक्ट के सैंपल मामले में काफी चर्चा हुई। स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ने बैठक में पूछा कि क्यों कंडाघाट लैब के अधिकारी मंडी जिले के सैंपल की जांच करने से क्यों इंकार कर रहे हैं? बैठक में लैब अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सैंपल की जांच करने से मना नहीं किया गया।
ऐसे में वास्तविक स्थिति पता करने के लिए उन्होंने मंडी स्वास्थ्य विभाग की ओर से कंडाघाट को भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट और कंडाघाट में जमा हुए सैंपल की रिपोर्ट तलब की है। ताकि सच्चाई की पता लगाकर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर सके। ‘अमर उजाला’ ने बुधवार को सरकार क्यों छिपा रही पतंजलि प्रोडक्ट की रिपोर्ट शीर्षक से इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है।
इसके बाद प्रदेश सरकार ने खबर पर संज्ञान लेकर अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है। गौरतलब है कि एक महीना पहले स्वास्थ्य विभाग ने रामदेव के प्रोडेक्ट के सैंपल जुटाए थे, लेकिन अभी तक इसकी रिपोर्ट सरकार को नहीं मिली है। नियमों के मुताबिक 14 दिन के भीतर सैंपल की रिपोर्ट आनी चाहिए। लेकिन कंडाघाट लैब ने अभी तक रिपोर्ट इसकी रिपोर्ट सरकार को नहीं दी है।
पतंजलि के शहद में चीनी की मिलावट की शिकायत
प्रदेश सरकार को शिकायत मिली है कि बाबा रामदेव के उत्पाद शहद में चीनी की मिलावट हो सकती है। इस आशंका के चलते सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को शहद के साथ घी के सैंपल लेने के निर्देश जारी किए हैं। सरकार को यह शिकायतें विभिन्न जिलों से प्राप्त हुई हैं। उधर, पतंजलि की ओर से इस बात को सिरे से नकारा जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि शुद्ध शहद कभी भी जमता नहीं है।
शहद हमेशा तरल रहता है लेकिन शहद के जमने के मामले सामने आए हैं। जबकि विज्ञापनों में पतंजलि कंपनी का शहद न जमने का दावा किया जा रहा है। इतना ही नहीं देशी घी की शुद्धता को लेकर कई तरह के दावे हो रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार को शहद और देशी घी में मिलावट की शिकायतें मिली हैं। इसके चलते स्वास्थ्य महकमे को सैंपल भरने को कहा है।
पुरानी मशीन बदलने के निर्देश- प्रदेश सरकार ने कंडाघाट प्रयोगशाला में पुरानी मशीनें बदलने के निर्देश दिए हैं। कंडाघाट में 1980 -85 की पुरानी मशीनों में सैंपल की जांच की जा रही है। इसके लिए पैसा स्वीकृति हुआ है।