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नियमों को ताक पर रख विधायकों पर मेहरबानी, सरकारी जमीन देने का नहीं प्रावधान
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Thu, 21 Sep 2017 11:19 AM IST
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विधायकों और पूर्व विधायकों को हाउसिंग सोसायटी के नाम पर औने-पौने दामों पर भूमि लीज पर देने के लिए राजस्व नियमों को ताक पर रखा गया है। कैबिनेट ने विशेषाधिकार के तहत नियमों को दरकिनार कर विधायकों की सोसाइटी के नाम जमीन निर्धारित करने का फैसला लिया।
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जबकि हाउसिंग सोसायटियों को लीज पर भूमि देने का प्रावधान ही नहीं है। जिस हाउसिंग लेजिस्लेटिव सोसाइटी को जुब्बड़हट्टी में भूमि देने का निर्णय लिया गया है, वो एक कांग्रेस के मौजूदा विधायक के नाम पर है। इतना ही नहीं कुछ भाजपा विधायकों के नाम भी सोसायटी में शुमार बताए जा रहे हैं।
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हालांकि प्रदेश भाजपा ने सरकार के फैसले को गलत करार देते हुए निरस्त करने की मांग उठाई है। ऐसे में आने वाले दिनों में मामले पर सियासी पारा चढ़ सकता है। संभावना जताई जा रही है कि 23 सितंबर को प्रस्तावित कैबिनेट की बैठक में मामले को सरकार वापस ले सकती है।
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यह है नियम
राजस्व विभाग के नियमों के तहत सरकारी भूमि को राज्य के विकास को ध्यान में रखकर लीज पर दिया जा सकता है। विकास की दृष्टि से शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए शिक्षण संस्थानों को भूमि देने का प्रावधान है। जरूरी सुविधाओं को विकसित करने के लिए पेट्रोल पंप और गैस के गोदाम के लिए सरकारी भूमि लीज पर दी जा सकती है। इसके अलावा पूर्व सैनिकों तथा वीर नारियों को स्वरोजगार के लिए भूमि को लीज पर देने का भी प्रावधान है।
विशेष परिस्थितियों में प्रावधान
सरकारी भूमि को लीज पर देने के नियमों में विशेष परिस्थितियों में भी भूमि देने का प्रावधान है। अनुसूचित जाति और जनजाति के परिवारों के पास अगर जीवन यापन के लिए भूमि नहीं है तो लीज पर दी जा सकती है। अन्य पिछड़ा वर्ग या फिर किसी भी परिवार जिसके पास भूमि नहीं है उसे भी सरकार लीज पर भूमि दे सकती है। आपदा में अगर किसी का आवासीय परिसर क्षतिग्रस्त होता है तो सरकार पीड़ितों को पुनर्वास के लिए भूमि दे सकती है।
भाजपा और माकपा भी कर रही विरोध
विधायकों को लीज पर भूमि देने का भाजपा विरोध कर रही है, लेकिन उसके विधायकों और पूर्व विधायकों के नाम भी सोसायटी में होने की बात आ रही है। सरकार के हाउसिंग सोसायटी को भूमि देने की प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही नामों का खुलासा होगा। ऐसे में मामले को चुनावी मुद्दा बनाने में लगी भाजपा के तेवर भी ढीले पड़ सकते हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सत्ती और पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने सरकार के नीतिगत फैसले का विरोध किया है। प्रदेश प्रभारी मंगल पांडेय ने कहा कि किन विधायकों को जमीन दी जा रही है, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन निर्वाचित सदस्यों को सरकारी भूमि लीज पर भूमि देने का कोई औचित्य नहीं है। माकपा के राज्य सचिवालय सदस्य संजय चौहान ने प्रदेश के विधायकों और पूर्व विधायकों को राजधानी शिमला के समीप लीज पर भूमि देने के फैसले का विरोध किया है।