कैबिनेट के बड़े फैसले: डीजल महंगा, होंगी बंपर भर्तियां
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल में डीजल करीब दो रुपये प्रति लीटर महंगा हो जाएगा। प्रदेश मंत्रिमंडल ने डीजल पर वैट में बढ़ोतरी कर ली है। इसे 11.50 से बढ़ाकर 16 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे आगामी दिनों में प्रदेश में डीजल के रेट बढ़ जाएंगे। मंत्रिमंडल की मंगलवार को हुई बैठक में ये बड़ा फैसला लिया गया है। सीएम वीरभद्र सिंह की अगुवाई में आयोजित इस बैठक में कई और बड़े फैसले भी लिए गए हैं।
हाल ही में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश ने डीजल पर वैट बढ़ाकर इसकी कीमतें एक बराबर करने का निर्णय लिया था। चारों राज्यों के इस संयुक्त फैसले के बाद हिमाचल मंत्रिमंडल ने डीजल पर मूल्य वर्द्धित कर (वैट) बढ़ाने को मंजूरी दी है। मंत्रिमंडल ने बिटुमिन पर भी मूल्यवर्द्धित कर में एकरूपता लाने का निर्णय लिया है। बिटुमिन एमल्सन पर इसे सामान्य बिटुमिन की तर्ज पर 13 फीसदी से घटाकर पांच प्रतिशत करने को स्वीकृति दी है।
पढ़िए सरकार के दूसरे अहम फैसले
इनमें दूसरा बड़ा फैसला राज्य के हजारों चकौताधारकों को उनके पास मौजूद जमीन में से पांच बीघा तक मालिकाना हक देने का लिया गया है। कैबिनेट ने चकौताधारकों को मालिकाना हक प्रदान करने संबंधी हिमाचल प्रदेश विलेज कॉमन लैंड्स बेस्टिंग एंड यूटीलाइजेशन एक्ट, 1974 को संशोधित करने की स्वीकृति प्रदान की।
इसके तहत पंजाब आम भूमि (नियमन अधिनियम) 1962 के तहत पंचायतों की ओर से आवंटित अथवा पट्टे पर दी भूमि का मालिकाना हक प्रदान करने की योजना को प्रभावी बनाया जाएगा। इसके बाद प्रदेश में आठ हजार चकौताधारकों को पांच बीघा भूमि तक मालिकाना हक दिए जाएंगे। इसका 100 रुपये प्रति बीघा शुल्क लिया जाएगा। 20 बीघा तक की भूमि अगर उनके कब्जे में है तो उसे उन्हें पट्टे पर दिया जाएगा।
मंत्रिमंडल ने मनोरंजन शुल्क अधिनियम - 1968 के तहत अप्रैल 2015 से 10 वर्षों की अवधि के लिए जादुई और सर्कस शो को मनोरंजन कर अदायगी में छूट देने का निर्णय लिया है। मंत्रिमंडल ने जिला के प्रत्येक पटवार सर्कल में अंशकालिक आधार पर बहुउद्देशीय कार्यकर्ताओं के पद सृजित करने का निर्णय भी लिया। प्रशिक्षित पटवारी मिलने तक रिक्त पदों पर राजस्व विभाग से सेवानिवृत पटवारियों एवं कानूनगो की अनुबंध आधार पर सेवाएं लेने का निर्णय लिया।
जिंदल ग्रुप चलाएगा कड़छम वांगतू, बास्पा-2 प्रोजेक्ट
जिला किन्नौर में स्थित बास्पा-दो और कड़छम वांगतू जल विद्युत ऊर्जा इकाइयों को जिंदल ग्रुप के हवाले कर दिया गया है। मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में दोनों प्रोजेक्टों को बेचने की जेपी कंपनी को मंजूरी दी गई। जेपी कंपनी हिमाचल में बने अपने दोनों पावर प्रोजेक्टों को जेएसडब्ल्यू एनर्जी लिमिटेड को बेचेगी। कड़छम-वांगतू 1000 मेगावाट और बास्पा प्रोजेक्ट 300 मेगावाट का है।
कैबिनेट ने बास्पा दो और कड़छम वांगतू जल विद्युत ऊर्जा इकाइयों को जय प्रकाश पावर वैंचर्ज लिमिटेड से इसकी सहायक हिमाचल बास्पा पावर कंपनी लिमिटेड को हस्तांतरित करने की अनुमति देने और हिमाचल बास्पा पावर कंपनी लिमिटेड की सिक्योरिटी को जेएसडब्ल्यू एनर्जी लिमिटेड को विक्रय करने का निर्णय लिया।
गंभीरता नहीं दिखाने पर 20 परियोजनाएं रद्द
मंत्रिमंडल ने निर्धारित समय में विद्युत परियोजनाओं के क्रियान्वयन में असफल रहने और प्रदेश सरकार को राजस्व नुकसान के दृष्टिगत 1.50 मेगावाट की आनी-दो और 1.50 मेगावाट की आनी-तीन जल विद्युत परियोजनाओं के आवंटन को रद्द कर दिया है।
यह परियोजनाएं साल 2000 में मैसर्ज एबीबी पावर प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित की गई थीं। इसके अलावा मंत्रिमंडल ने परियोजनाओं के कार्य में गंभीरता न दिखाने पर इन्हें रद्द करने और प्रतिभूति राशि जब्त करने का फैसला लिया है।
एक साथ मिलेगा दो महीने की दालों का कोटा
प्रदेश के राशनकार्ड उपभोक्ताओं को दो महीने की दालों का कोटा एक साथ मिलेगा। प्रदेश सरकार ने खाद्य आपूर्ति निगम को आदेश जारी कर दिए हैं। जून महीने में उपभोक्ताओं को दालों का कोटा नहीं मिला है। इसके चलते सरकार ने जुलाई महीने में मिलने वाली दालों के साथ जून महीने का कोटा देने का फैसला लिया है।
खाद्य आपूर्ति निगम का दावा है कि हिमाचल में दालों की सप्लाई शुरू हो गई है। यह सप्लाई कुछेक गोदामों में पहुंची है। लेकिन डिपो में दालें उपलब्ध न होने से लोगों को महंगे दामों में बाजार से दालें खरीदनी पड़ रही हैं। लोग प्रतिदिन दालों के लिए डिपो जा रहे हैं लेकिन उन्हें मायूस होकर बाजारों की ओर रुख करना पड़ रहा है।
एक सप्ताह में दालें देने का किया था दावा
कंपनी को दालों के टेंडर दिए 10 दिन हो गए हैं लेकिन अभी तक हिमाचल में दालों की सप्लाई नहीं पहुंची है। वहीं, प्रदेश सरकार ने एक सप्ताह के भीतर डिपो में दालों की सप्लाई देने का दावा किया था।
ये भी लिए फैसले
- द्वितीय विश्वयुद्ध के सैनिकों और उनकी विधवाओं को दी जाने वाली वित्तीय सहायता को 2000 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये करने का निर्णय लिया गया।
- हिमाचल प्रदेश कोर्ट शुल्क (ई-स्टैंपिंग) नियम 2015 के कार्यान्वयन को भी स्वीकृति प्रदान की गई।
- शिमला जिले के क्वार में हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग का एक नया विश्राम गृह बनाने को स्वीकृति दी।
- वर्ष 2013 में सिरमौर जिला के पांवटा साहिब के समाह गांव में भारी बारिश के कारण जिन 36 परिवारों के मकान ढह गए थे, उन्हें नियमों में विशेष छूट देते हुए सरकारी भूमि हस्तांतरित करने को मंजूरी प्रदान की।
इन पर भी बनी सहमति
- अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के तहत अत्याचार के पीड़ितों के मुआवजे, राहत और पुनर्वास अनुदान में बढ़ोतरी को मंजूरी।
- श्रम शक्ति पहचान अभियान के तहत असंगठित कामगारों को यूडब्ल्यूआईएन स्मार्ट कार्ड्स (सामाजिक सुरक्षा कार्ड) जारी किए जाएंगे। ये कार्ड वर्तमान में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत पंजीकृत असंगठित कामगारों को भी दिए जाएंगे।
- ज्वालामुखी, धर्मपुर, मंडी (ग्रामीण), सुजानपुर और शिलाई में नवसृजित उपमंडलीय निर्वाचन कार्यालयों में सूचना एवं प्रौद्योगिकी की विभिन्न श्रेणियों के पद सृजित करेंगे।
- मोबाइल ट्रैफिक मजिस्ट्रेट की छह अदालतें स्थापित की जाएंगी, जिन्हें सिविल जज (जूनियर डिविजन) का रैंक देने के साथ ही सहायक स्टाफ भी उपलब्ध करवाया जाएगा।
आईआईएम के लिए धौलाकुआं में भू-हस्तांतरण को मंजूरी
कैबिनेट की बैठक में सिरमौर जिले के धौलाकुआं में भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) स्थापित करने के लिए भू-हस्तांतरण का निर्णय लिया गया। इसके अलावा बद्दी के संढोली में सेंट्रल इंस्टीच्यूट ऑफ प्लास्टिक इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने के लिए संस्थान के निदेशक को पट्टे के आधार पर भूमि हस्तांतरित करने को मंजूरी दी गई।
मंत्रिमंडल ने कांगड़ा जिले के नगरोटा बगवां स्थित राजीव गांधी राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में 60 सीटों की प्रवेश क्षमता के साथ इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग में बीटेक शुरू करने और विभिन्न पदों के सृजन एवं उन्हें भरने का निर्णय लिया। शिमला जिले के ज्यूरी में राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज कोटला को प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय हमीरपुर का संघटक कॉलेज बनाने को भी मंजूरी दी।
मंत्रिमंडल ने हिमाचल प्रदेश सहकारी समितियां नियम, 1971 के नियम 56 के उपनियम (3) में संशोधन करते हुए पंजीयक, सहकारी समितियां से बिना पूर्व अनुमति नए कर्मचारियों की नियुक्तियों के लिए प्राथमिक समितियों की वित्तीय सीमा 1000 रुपये से बढ़ाकर 5000 रुपये और उप एवं उच्चतम समितियों के लिए यह सीमा 8000 रुपये प्रतिमाह तक बढ़ाने का निर्णय लिया।
मंत्रियों, विधायकों की स्वैच्छिक निधि बढ़ाई
हिमाचल मंत्रिमंडल ने मंत्रियों और विधायकों की वार्षिक स्वैच्छिक निधि बढ़ाने को मंजूरी दी है। विधायकों की स्वैच्छिक निधि अब दो लाख के बजाय चार लाख और मंत्रियों की आठ लाख के बजाय 15 लाख रुपये होगी। विशेष कार्य अधिकारियों के मासिक वेतन को 12 हजार रु पये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये करने को मंजूरी दी गई। राज्य सचिवालय में तैनात अधिकारियों के भत्ते बढ़ाने को भी स्वीकृति दी गई।
नगरोटा बगवां को आईपीएच मंडल का दर्जा
मंत्रिमंडल ने विभिन्न श्रेणियों के पद सृजन के साथ कांगड़ा जिला के नगरोटा बगवां में सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग का एक नया मंडल सृजित करने और टांडा में नया सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य उपमंडल स्थापित करने का निर्णय भी लिया।