कैबिनेट के फैसले: अवैध भवनों को नियमित करने की मंजूरी, कर्मचारियों को तोहफे
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हिमाचल मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को आखिरकार सूबे के सभी अवैध भवनों को नियमित करने की मंजूरी दे ही दी। प्रदेश भर में ऐसे करीब 30 हजार भवनों को ‘जैसा है, जहां है’ की तर्ज पर नियमित किया जाएगा।
इसके लिए मंत्रिमंडल ने अध्यादेश लाने को मंजूरी दे दी है। अध्यादेश की घोषणा के 45 दिन के भीतर अवैध भवन मालिकों को आवेदन करना होगा। तय समय पर आवेदन नहीं किया तो बिजली और पानी के कनेक्शन काट दिए जाएंगे।
सचिवालय में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में फैसला लिया गया कि नगर पालिका की भूमि, सरकारी या ग्रीन एरिया में कब्जा कर बनाए गए भवन नियमित नहीं किए जाएंगे। यही नहीं, जिस अवैध भवन को नियमित करना है, उसके लिए भी 30 फीसदी सेटबैक की शर्त लगा दी गई है।
यानी सिर्फ 70 फीसदी डेविएशन को ही नियमित किया जाएगा। बैठक में यह फैसला भी लिया गया कि नए सिरे से ग्रीन एरिया चिह्नित किए जाएंगे। इन ग्रीन एरिया की अधिसूचना के बाद किसी भी अवैध निर्माण को नियमित नहीं किया जाएगा। अवैध निर्माण को नियमित करने का यह अंतिम मौका है।
शहरों और ग्रामीण इलाकों के लिए यह होगी फीस
शहरी क्षेत्र : 800 रुपये प्रति वर्ग मीटर
जिन भवन मालिकों ने पहले नक्शा पास कराया है और सेटबैक में डेविएशन किया है, उन लोगों को सेटबैक पर 35 प्रतिशत की दर से बेसमेंट 800 रुपये प्रति वर्ग मीटर और ऊपर ही हर मंजिल 400 रुपये की दर से नियमित होगी।
ग्रामीण क्षेत्र : 400 रुपये प्रति वर्ग मीटर
ग्रामीण क्षेत्रों व नगरपालिका से बाहर के इलाकों में अवैध भवनों के लिए धरातल स्तर की कवरेज के लिए निर्धारित दर 400 रुपये प्रति वर्ग मीटर होगी। इसके बाद प्रत्येक मंजिल के लिए 200 रुपये प्रति वर्ग मीटर फीस देनी होगी। सेटबैक पर 35 से 70 प्रतिशत तक निर्धारित दरें दोगुना होंगी।
व्यावसायिक : कंपाउंडिंग दर होगी दोगुना
नगरपालिका क्षेत्रों में अनाधिकृत मंजिलों की संख्या 100 वर्ग मीटर अनाधिकृत क्षेत्र तक 1500 रुपये प्रति वर्ग मीटर रखी जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर एक हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर होगी। अनाधिकृत मंजिलों में 100 वर्ग मीटर से अधिक की दर दोगुना होगी।
जनरल डॉक्टर अब 60 की उम्र में होंगे रिटायर
हिमाचल सरकार ने स्वास्थ्य निदेशालय के तहत कार्य करने वाले जनरल ड्यूटी मेडिकल अफसरों की सेवानिवृत्ति आयु 58 से बढ़ाकर 60 साल कर दी है। मंत्रिमंडल के इस फैसले से प्रदेश के करीब 1400 डॉक्टर लाभान्वित होंगे। मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. जीवानंद चौहान ने रिटायरमेंट उम्र दो साल बढ़ाने के लिए सरकार का आभार जताया है।
पे स्केल के लिए नहीं देनी होगी परीक्षा
शिमला। स्वास्थ्य विभाग के पात्र चिकित्सा अधिकारियों को 4-9-14 का पे स्केल देने के लिए सरकार द्वारा लगाई गई परीक्षा की शर्त हटा दी गई है। मंत्रिमंडल ने डॉक्टरों को बड़ी राहत देते हुए नियमित सेवाएं पूरी होने पर 4-9-14 पे स्केल देने को मंजूरी दी है
पी मित्रा को विदाई, नए चीफ सेक्रेटरी को लेकर चर्चा
मंत्रिमंडल की बैठक में मुख्य सचिव पी मित्रा को विदाई दी गई। मुख्य सचिव पी मित्रा की यह अंतिम मंत्रिमंडल की बैठक थी। बैठक में मंत्रियों के अलावा अधिकारी भी उपस्थित रहे। एजेंडा खत्म होने के बाद सभी अधिकारी बैठक से चले गए। इसके बाद कैबिनेट के मंत्रियों में नए चीफ सेक्रेटरी को लेकर भी चर्चा की गई।
हालांकि, बैठक में नए चीफ सेक्रेटरी को लेकर किसी अधिकारी के नाम पर मोहर नहीं लगाई गई। चीफ सेक्रेटरी पी मित्रा 31 मई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। बैठक में उनके कार्यों की भी सराहना की गई। मुख्यमंत्री समेत कैबिनेट मंत्रियों ने उनकी ओर से हिमाचल के विकास कार्यों के लिए किए गए कार्यों को सराहना की और सेवानिवृत्ति के बाद उनके स्वस्थ रहने की कामना की।
इधर, मुख्य सचिव की नई कुर्सी पर किसी वरिष्ठ को बैठने के लिए खींचतान शुरू हो गई है। हिमाचल के तीन वरिष्ठ अधिकारी चीफ सेक्रेटरी की दौड़ में हैं। इसमें अतिरिक्त मुख्य सचिव विनीत चौधरी हैं, इनके बाद उपमा और वीसी फारका है।
हालांकि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पहले ही कह चुके हैं कि काबिल और विश्वसनीय अफसर को ही चीफ सेक्रेटरी बनाया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि चीफ सेक्रेटरी ने अभी तक किसी के नाम पर मोहर नहीं लगाई है। चीफ सेक्रेटरी पी मित्रा की सेवानिवृत्ति के बाद ही नए मुख्य सचिव के नाम की घोषणा होगी।
पुलिस मेडल प्राप्त इंस्पेक्टरों को दो अग्रिम वेतन वृद्धि
कैबिनेट ने पुलिस कर्मियों की सुविधा के लिए भी दो अहम फैसले लिए हैं। इनमें पुलिस मेडल प्राप्त करने वाले पुलिस निरीक्षकों को दो अग्रिम वेतन वृद्धि देने का निर्णय लिया गया। साथ ही बैठक में सिरमौर जिला के कृषि विभाग के खेरी फार्म की भूमि को छठी आई आर बी बटालियन स्थापित करने के लिए गृह विभाग को हस्तांतरित करने का भी निर्णय लिया गया।
खनन पट्टे नियमों में बदलाव को मंजूरी
शिमला। मंत्रिमंडल ने खनन पट्टे के लिए हिमाचल प्रदेश लघु खनिजों (छूट) एवं खनिज (अवैध खनन, परिवहन एवं स्टोरेज रोकथाम) नियम, 2015 में अधिसूचित दूरी के मापदंडों में छूट प्रदान करने को मंजूरी प्रदान की। साथ ही हिमाचल प्रदेश गौवंश संवर्धन बोर्ड के संविधान में संशोधन करने की स्वीकृति दी गई।
ये अहम फैसले भी लिए गए
अंशकालीन कर्मियों का 200 रुपये बढ़ा मानदेय
मंत्रिमंडल ने शिक्षा विभाग में कार्यरत अंशकालीन कर्मियों का मानदेय पहली अप्रैल 2016 से 1700 रुपये से बढ़ाकर 1900 रुपये करने को मंजूरी प्रदान की। चंबा जिले के डलहौजी नगर परिषद क्षेत्र में जिन लोगों को स्वतंत्रता से पूर्व पट्टे पर भूमि दी गई थी, उन्हें मालिकाना हक देने के लिए नीति बनाने को भी स्वीकृति प्रदान की गई।
अन्य घोषणाएं
- शिमला जिले के डुमैहर तथा मंडी जिले की थुनाग तहसील की ग्राम पंचायत कलहानी तथा पदर तहसील की ग्राम पंचायत मढ़ में नए पटवार वृत्त सृजित करने को स्वीकृति प्रदान की।
- कांगड़ा जिले के फतेहपुर में नया सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंडल सृजित करने तथा आईपीएच उपमंडल धीरा के तहत द्रंग में नया सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य अनुभाग खोलने का निर्णय लिया गया।
- लोक निर्माण विभाग मंडल नंबर एक मंडी के तहत झटिंगरी में लोक निर्माण विभाग का नया उपमंडल खोलने को मंजूरी प्रदान की।
- कांगड़ा जिला के भवारना में उप तहसील खोलने को स्वीकृति।
- बिलासपुर के कोठीपुरा में एम्स के प्रस्तावित स्थापना के दृष्टिगत बिलासपुर योजना क्षेत्र की परिधि को बढ़ाने को मंजूरी।
- घुमारवीं योजना क्षेत्र तथा भोटा योजना क्षेत्र के संशोधन को स्वीकृति।
- सिरमौर जिला के पांवटा खंड की पलहोरी पंचायत को पिछड़ी पंचायती श्रेणी में रखने को स्वीकृति।
- भारतीय खाद्य निगम को मंडी जिला के कांगनी में गोदाम/स्टोर के निर्माण के लिए पचास वर्ष के लिए एक रुपये प्रति वर्ष पट्टे पर सरकारी भूमि देने का निर्णय।
- कुल्लू जिला के आनी में अग्निशमन पोस्ट को वांछित स्टाफ और वाहनों सहित स्थापित करने का निर्णय।
- शिमला जिला के रोहडू तहसील के कुठाड़ा में वांछित स्टाफ सहित नया पशु अस्पताल खोलने को स्वीकृति।
- सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ देने के लिए ‘ट्रांसजेंडर’ को शामिल करने को मंजूरी।
- केंद्रीय प्लास्टिक अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान बद्दी में पायलट आधार पर व्यवसायिक कौशल विकास पाठ्यक्रमों को शुरू करने की मंजूरी प्रदान की।
- पालमपुर लोक निर्माण उपमंडल के तहत खेड़ा स्थित प्रदेश लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में अतिरिक्त आवासीय सुविधा निर्मित करने को मंजूरी।
- जिला शिमला के रामपुर में सब जेल खोलने और विभिन्न श्रेणियों के 13 पदों को सृजित करने का फैसला लिया गया।
अपोलो अस्पताल का एक साल बढ़ाया अनुबंध
जनजातीय तथा दुर्गम क्षेत्रों काजा और केलांग के लोगों को विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने के उद्देश्य से मंत्रिमंडल ने अपोलो अस्पताल इंटरप्राइज लिमिटेड के साथ एक वर्ष की अवधि के लिए अनुबंध बढ़ाने को मंजूरी प्रदान की है।
इसके अलावा 150 बिस्तरों वाले नागरिक अस्पताल पालमपुर को स्तरोन्नत कर 200 बिस्तरों का अस्पताल बनाने, बिलासपुर जिले में कबीर पंथी बस्ती तथा बल्ही मरेटा में स्वास्थ्य उपकेंद्र खोलने, कांगड़ा जिले में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रक्कड़ तथा पीर सलूही को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्तरोन्न करने का निर्णय भी बैठक में लिया गया।
हमीरपुर जिले के रैल तथा फाल में वांछित स्टाफ सहित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने का भी निर्णय लिया गया।
आम को बढ़ावा देने को मंडी मध्यस्थता योजना
कैबिनेट ने प्रदेश में आम की पैदावार को बढ़ावा देने के लिए साल 2016 के दौरान विधायन योग्य आम प्रापण के लिए मंडी मध्यस्थता योजना को कार्यान्वित करने का निर्णय लिया। इस योजना के अंतर्गत 300 मीट्रिक टन गुठलीदार और 200 मीट्रिक टन कलमी आम की खरीद 5.50 रुपये प्रति किलोग्राम तथा 6.50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से की जाएगी।
प्रापण का कार्य एचपीएमसी तथा हिमफैड द्वारा 34 फल एकत्रिकरण केन्द्रों के माध्यम से किया जाएगा। दोनों एजेंसियों को 1.30 रुपये प्रति किलोग्राम हैंडलिंग चार्जिज की वसूली करने की अनुमति होगी।
योजना के अंतर्गत प्रापण तथा हैंडलिंग के दौरान परिवहन क्षति को ध्यान में रखते हुए किसानों व बागवानों से 2.5 प्रतिशत (भार) अधिक फलों का प्रापण किया जाएगा। यह योजना प्रथम जुलाई से 15 अगस्त, 2016 तक कार्यांवित की जाएगी।
बिजली प्रोजेक्टों में गैर हिमाचली बन सकेंगे साझेदार
मंत्रिमंडल ने राज्य की जल विद्युत नीति में संशोधन करने को मंजूरी दे दी ही। जिन मूल हिमाचलियों को दो मेगावाट क्षमता तक की परियोजनाएं आवंटित की जाती है, सरकार परियोजना के आवंटन तथा परियोजना आरंभ होने के दो वर्ष के बाद पूर्ण विनिवेश की किसी भी अवस्था के दौरान प्रमोटरों की ओर से 49 प्रतिशत इक्विटी शेयर को बेचने अथवा हस्तांतरण के आवेदन पर विचार करेगी।
मूल हिमाचलियों जिन्हें दो मेगावाट से पांच मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं आवंटित की जाती हैं, सरकार परियोजना के शुरू होने के दो वर्ष बाद पूरे विनिवेश तथा परियोजना के आवंटन के बाद किसी भी चरण में गैर हिमाचलियों को 51 प्रतिशत इक्विटी शेयर को बेचने अथवा हस्तांतरित करने के प्रमोटर के आवेदन पर विचार करने का फैसला लिया है।