हिमाचल सरकार ने केंद्र से मांगी ये शक्तियां, जनता को होगा फायदा
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हिमाचल सरकार ने केंद्र से सरकारी योजनाओं के लिए फोरेस्ट क्लीयरेंस की शक्तियां मांगीं हैं। राज्य सरकार ने पांच हेक्टेयर तक की वित्तीय शक्तियां डीएफओ को देने की बात की है। वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने कहा कि वर्तमान में डीएफओ के पास एक हेक्टेयर तक की फोरेस्ट क्लीयरेंस की शक्ति है।
ये जानकारी बुधवार को विधानसभा में वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने दून के कांग्रेस विधायक राम कुमार के सवाल के जवाब में दी। रामकुमार ने पूछा था कि एक किलोमीटर तक की सड़कों के निर्माण के लिए वन विभाग का अनापत्ति प्रमाणपत्र कौन जारी करता है।
वन मंत्री ने कहा कि सरकारी योजनाओं के तहत आने वाली एक हेक्टेयर तक की वन भूमि पर अगर 75 पेड़ हों तो इसकी फोरेस्ट क्लीयरेंस के लिए डीएफओ को अधिकृत किया गया है। हिमाचल सरकार ने भारत सरकार को पत्र लिखा है कि पांच हेक्टेयर तक की फोरेस्ट क्लीयरेंस के लिए भी शक्तियां डीएफओ को दी जाएं। वन ठाकुर सिंह भरमौरी ने कहा के इसके लिए ये जरूरी है कि भूमि एक हेक्टेयर से कम हो। ऐसी भूमि की ग्राम सभा से सिफारिश की गई हो।
शक्तियों के बावजूद आनाकानी कर रहे डीएफओ : जयराम ठाकुर
अपने अनुपूरक सवाल में सिराज से भाजपा विधायक जयराम ठाकुर ने कहा कि एक हेक्टेयर तक की फोरेस्ट क्लीयरेंस की शक्तियां बेशक डीएफओ को दी गई हों, लेकिन इस पर अमल नहीं हो रहा है। डीएफओ कह रहे हैं कि ये उनसे नहीं हो सकता है। इसके जवाब में भरमौरी ने कहा कि इस बारे में विधायकों और मंत्रियों को खुद हस्तक्षेप करना होगा। इस मामले को निचले स्तर से ही लागू करना जरूरी है।
झंडूता के भाजपा विधायक रिखीराम कौंडल ने कहा कि नई व्यवस्था के बारे में सभी विभागों को जानकारी दिए जाने की जरूरत है। नया प्रावधान लागू नहीं हो रहा है। इस बारे में मुख्यमंत्री को हस्तक्षेप करना चाहिए। इस पर वन मंत्री ने जवाब दिया कि तमाम विभागों को नए प्रावधान को लागू करना चाहिए। वे इस बारे में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से भी प्रार्थना करेंगे कि इस पर आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं।
भाजपा का खुलासा, फर्जी दस्तावेज दिखा बैंक से लिया 19.50 करोड़ कर्ज
कंपनी ने फर्जी दस्तावेज के जरिये कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक से 19.50 करोड़ रुपये का ऋण ले लिया। भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने नियम-62 के तहत विधानसभा में यह मामला उठाया। मामले को गंभीर बताते हुए आयुर्वेद एवं सहकारिता मंत्री कर्ण सिंह ने कहा कि बैंक को ऋण देते वक्त कागजातों की गहनता से छानबीन करनी चाहिए थी।
सरकार इस मामले को लेकर चिंतित है। बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों को इससे डरने की जरूरत नहीं है। बैंक के निदेशक मंडल को इस मामले को दोबारा से मुख्यमंत्री के समक्ष उठाने को कहा गया है। जिस कंपनी को ऋण स्वीकार हुआ है उसे 1.88 करोड़ की पहली किस्त भी जारी कर दी गई है। माना कि किस्त जारी होने के बाद पता चला कि कंपनी में शामिल कुछ लोगों ने पंजाब के फगवाड़ा में बैंक ऑफ बड़ोदा से 20 करोड़ के ऋण में धोखाधड़ी की है।
सहकारिता मंत्री ने कहा कि बैंक ने ये ऋण किसी व्यक्ति विशेष नहीं बल्कि कंपनी को दिया। जिसमें तीन निदेशक शामिल हैं। इनमें से दो गैर हिमाचली हैं। कमेटी ने ऋ ण आवेदन को आकलन के लिए नाबार्ड के पास भेजा और नाबार्ड ने ऋण की स्वीकृत दी। कंपनी ने ऋ ण लेने के लिए जिस अचल संपत्ति का ब्योरा दिया है, उसकी कीमत 16.61 करोड़ आंकी गई है। जबकि कंपनी की ओर से लगाए जाने वाले प्लांट और मशीनरी की कीमत 5.06 करोड़ आंकी गई है।
बैंक अधिकारियों को मिल रही धमकियां : सत्ती
विधायक सतपाल सत्ती ने मामला उठाते हुए कहा कि पैसा जारी करने के लिए बैंक के कर्मचारियों और अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है और उन्हें पैसा रिलीज कराने की धमकियां तक दी जा रही हैं। सत्ती ने कहा कि उनके पास इस तरह की धमकियों की रिकार्डिंग है। उन्होंने ऋ ण लेने वाले लोगों द्वारा पंजाब में इससे पहले ऋण लेने के नाम पर की गई धोखाधड़ी के कागजात सदन में रखे।
भारत सरकार ने बजट घटाया, इसीलिए घटाए पेयजल के टारगेट : स्टोक्स
लाहौल स्पीति के कांग्रेस विधायक रवि ठाकुर के सवाल के जवाब में सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य मंत्री विद्या स्टोक्स ने कहा है कि वित्त वर्ष 2015-16 के लिए 2074 आबादियों को कवर करने का टारगेट रखा गया है। वर्ष 2015-16 के लिए इस लक्ष्य को इसलिए घटाया गया है कि भारत सरकार ने इस मामले में फंड घटा दिए हैं। ये 14वें वित्तायोग को फंड हस्तांतरण के बाद घटाए गए हैं।
इससे इससे पिछले वर्ष की तुलना में घटा दिया गया है। बुधवार को प्रश्नकाल में कांग्रेस विधायक रवि ठाकुर ने सवाल किया कि वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान आईपीएच विभाग ने छूटी हुई आबादियों को कवर करने के लिए क्या लक्ष्य रखा गया है। क्या ये तथ्य हैं कि विभाग ने लक्ष्य को आखिरी स्टेज तक घटा दिया है।
अगर ऐसा है तो इसका कारण बताया जाए। ये बताया जाए कि 31 जनवरी 2016 को फंड आवंटन की क्या स्थिति है। आईपीएच मंत्री विद्या स्टोक्स ने कहा कि सूचना सभा पटल पर रख दी गई है। उन्होंने साथ ही कहा कि अगर भारत सरकार बजट में कटौती नहीं करती तो ये स्थिति पेश नहीं आती।
विश्व बैंक पोषित प्रोजेक्टों से लाभान्वित होंगी पंचायतें
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि विश्व बैंक पोषित परियोजनाओं में ऐसी पंचायतों को प्राथमिकता दी जाएगी जो इनमें शामिल नहीं हैं। सीएम बुधवार को विधानसभा में गैर सरकारी सदस्य दिवस के तहत भाजपा विधायक रविंद्र रवि की ओर से इस संबंध में लगाए गए संकल्प प्रस्ताव पर बोल रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समय राज्य में 12 हजार करोड़ रुपये की बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं।
यह परियोजनाएं लोक निर्माण विभाग, वानिकी, ऊर्जा, पर्यटन और कृषि क्षेत्रों में चल रही हैं। ऊर्जा क्षेत्र में 6674 करोड़, 1803 करोड़ की स्टेट रोड परियोजना और पर्यटन क्षेत्र में 428 करोड़ की आधारभूत ढांचा विकास निवेश परियोजना शामिल है। इस के अलावा 599 करोड़ रुपये की मिड हिमालय वाटरशेड परियोजना, 227 करोड़ की स्वां नदी एकीकरण वाटरशेड परियोजना, 321 करोड़ की फ सल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजनाएं भी स्थानीय समुदाय की सहभागिता से लागू की जा रही हैं।
सीएम के आश्वासन के बाद रविंद्र रवि ने अपना संकल्प वापस ले लिया। इससे पूर्व विधायक रविंद्र रवि ने अपना संकल्प प्रस्तुत करते हुए कहा कि जिन पंचायतों में आज तक विश्व बैंक या अन्य विदेशी सहायता वाली परियोजना लागू नहीं हुई हैं, उन पंचायतों को ऐसी परियोजनाओं में प्राथमिकता के आधार पर शामिल किया जाए। विधायक विक्रम सिंह ने पहले से चल रही पंचायतों को ही नई परियोजनाओं में शामिल करने पर आपत्ति जताई। उन्होंने परियोजनाओं में व्यापक धांधलियों का आरोप भी लगाया। विधायक केएल ठाकुर ने अपने विधानसभा क्षेत्र में विश्व बैंक परियोजनाओं में 8 सड़कों को शामिल करने की मांग की।