हिमाचल में नई सरकार भी बन गई पर नहीं टूटी विभागों की सुस्ती
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तेरहवीं विधानसभा के लिए 12 अक्तूबर को चुनावों का एलान होने के बाद से महकमों में छाई सुस्ती अभी भी नहीं टूटी है। आचार संहिता लगने के बाद से अब तक कई बड़े मामलों की फाइलें अफसरों की अलमारियों में बंद पड़ीं हैं।
अभिनंदन समारोहों में व्यस्त जयराम सरकार भी इन जरूरी कामों को लेकर अभी तक फैसला नहीं ले सकी है। इन फैसलों का लंबित होना जनता सहित कुछ विशेष वर्गों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। सरकार से इन प्रस्तावों के अनुमोदन का विभाग भी इंतजार कर रहे हैं।
कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने शिमला सहित कई शहरों में नए भवनों के निर्माण के लिए नए नियम तैयार किए हैं। अवैध भवनों को नियमित करने का मामला भी पहले से पेचीदा हो गया है।
इन मामलों पर भी सरकार की स्थिति स्पष्ट नहीं
जयराम सरकार ने अपने एक माह के कार्यकाल में इस मामले को लेकर कोई फैसला नहीं लिया है। प्रदेश के लाखों भवन मालिक सरकार की ओर टकटकी लगाए हुए हैं। इसके अलावा पुलिस और एचआरटीसी में भर्ती प्रक्रिया भी ठप पड़ी हुई है।
सरकारी स्कूलों में नर्सरी कक्षाएं शुरू करने और प्रदेश में इलेक्ट्रिक बसें चलाने के मामले को लेकर भी सरकार अभी तक अपना मत स्पष्ट नहीं कर सकी है। प्रदेश में औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देना तो दूर वर्तमान उद्योगों के पलायन को रोकने के लिए भी सरकार टैक्स में छूट देने को लेकर फैसला नहीं ले सकी है।
इसके अलावा चाय बागान भूमि उपयोग के नियमोंको बदलने और सोने की रिफाइनरी को राहत देने का मामला भी अभी लटका हुआ है। पूर्व सरकार के समय लिए गए इन फैसलों को लेकर अफसरशाही भी जयराम सरकार के समक्ष उठाने से कतरा रही है। तबादलों के खेल में उलझे अफसर इन जरूरी प्रस्तावों की पैरवी करने से कतरा रहे हैं, जिसका खामियाजा प्रदेश की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
इन फैसलों के इंतजार में हैं विभाग
- पुलिस कांस्टेबलों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर फैसला अटका।
- एचआरटीसी में कंडक्टरों की भर्ती अभी तक शुरू नहीं हुई।
- प्रदेश में चलाई जाने वाली इलेक्ट्रिक बसों पर फैसला नहीं हुआ।
- सरकारी स्कूलों में नर्सरी कक्षाएं शुरू करने का प्रस्ताव अधर में।
- उद्योगों के पलायन को रोकने के लिए अभी नहीं बन पाई नीति।
- सोने की रिफाइनरी को राहत देने का मामला भी अधर में।