विशेषज्ञ बोले - बिजली दोहन और पर्यटन विकास को बने समान नीति
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हिमकास्ट की ओर से आयोजित मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में राजनेताओं और विशेषज्ञों ने बिजली दोहन और पर्यटन विकास को लेकर समान नीति बनाने की वकालत की। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि लोगों की परेशानियां दूर कर कम समय में प्रोजेक्ट लगाए जाने चाहिए। इससे न सिर्फ लागत घटेगी, बल्कि समय से प्रोजेक्ट शुरू होंगे। सांसद वीरेंद्र कश्यप ने कहा कि पर्यटन के लिहाज से ठोस योजना के तहत काम करना चाहिए। इसमें पहाड़ी राज्यों को आपस में तालमेल रखना चाहिए।
विशेषज्ञ वाईके चौबे ने कहा कि पन बिजली परियोजनाओं में ऐसी तकनीक अपनाई जाए, जिससे ये जल्द तैयार हों। परियोजना बनाने से पहले सड़कों आदि का बुनियादी ढांचा तैयार हो। पर्यावरण मंजूरी जल्द मिले। लोगों की सुनवाई समय पर हो। एचपीपीटीसीएल के निदेशक केशव अत्री ने कहा कि पनबिजली में पहले ज्यादा खर्च आता है और बाद में उत्पादन लागत कम होती है। सिल्ट बढ़ रही है और बर्फ कम पड़ रही है। इससे बिजली उत्पादन पर विपरीत असर पड़ रहा है। ट्रांसमीटर लाइनों के लिए वित्तीय मदद की जाए।
जम्मू-कश्मीर के वन सचिव मनोज द्विवेदी ने कहा कि पहाड़ी राज्यों की चुनौतियां समान हैं। छोटे बिजली प्रोजेक्टों पर ध्यान देना चाहिए। जहां तक संभव हो, दस मेगावाट से नीचे के प्रोजेक्टों पर ध्यान देना चाहिए। अरुणाचल के उप मुख्यमंत्री चौउना मेंय ने कहा कि उनके प्रदेश में एक जगह पहले लोग अफीम खाते थे। कांटेक्ट फार्मिंग जरूरी है और बायो डायवर्सिटी कर खेती को बढ़ावा देने से लोग खेती पर जोर दे रहे हैं। पीएमजीएसवाई सड़कों की मरम्मत को पैसा मिलना चाहिए।
पहाड़ी प्रदेशों में किसान न्यूनतम आय आयोग बनाने की सिफारिश
सोलन। सतत पर्वतीय विकास शिखर सम्मेलन में किसानों की आय सुनिश्चित करने के लिए किसान न्यूनतम आय आयोग गठित करने की सिफारिश रखी गई है। आयोग की स्थापना के अलावा हिमालयी राज्यों की ओर से दी गई ईको सिस्टम सेवाओं को प्रोत्साहित करना और पहाड़ी किसानों के जलवायु परिवर्तन के अनुसार खुद को ढालने की कला पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने अगली पीढ़ी के किसानों की जरूरतें पूरी करने के लिहाज से उपयोगी सभी तंत्रों पर विचार रखे।
शूलिनी विवि में दो दिन चर्चा के बाद इन सिफारिशों की रूपरेखा तय की गई। शिखर सम्मेलन की सिफारिशें शिमला में हिमालयी क्षेत्र में लगभग एक दर्जन राज्यों के मुख्यमंत्रियों और प्रतिनिधियों के सम्मेलन में प्रस्तुत जाएंगी। अन्य प्रमुख सिफारिशों में ईको सिस्टम सेवाओं के लिए किसानों की क्षतिपूर्ति को ईको सिस्टम तैयार करना, ग्रीन सेस का प्रावधान, ग्रीन बांड्स और ग्रीन इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड की स्थापना है। ब्रांड हिमालय के विकास के लिए भी आह्वान किया गया।
प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए हिमालयी राज्यों की क्षतिपूर्ति की सिफारिश की गई। सम्मेलन के समापन पर सामाजिक न्याय एवं सहकारिता मंत्री डॉ. राजीव सैजल ने कहा कि शिखर सम्मेलन में की गई सिफारिशों का अध्ययन सरकार की ओर से कार्यान्वयन के लिए किया जाएगा। आठ देशों में फैले हिमालयी क्षेत्र को भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जाना चाहिए।
आईएमआई के अध्यक्ष सुशील रामोला ने चुनौतियों का सामना करने के लिए एकसाथ आने की आवश्यकता पर बल दिया। कहा कि हिमालयी क्षेत्र हिमनदों के पिघलने, बाढ़, धूल भरी आंधियों और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रतिकूल रूप से प्रभावित है। शूलिनी विवि के कुलपति पीके खोसला के अलावा चार पूर्व मुख्य सचिव, पांच कुलपति, सिविल सोसायटी के सदस्य और आईएमआई के सलाहकार शामिल हुए।
आईसीआईएमओडी-नेपाल के उपमहानिदेशक एकलव्य शर्मा ने कहा कि हिमालय कुल 36 वैश्विक विविधता हॉटस्पॉट में से चार के साथ वैश्विक संपत्ति है। दुनिया की एक चौथाई आबादी हिमालय से सीधे प्रभावित होती है। ऐसे में सहकारी प्रयासों पर जोर दिए जाने की जरूरत है।