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औषधीय खेती के क्षेत्र में हिमाचल की लंबी छलांग, इन छह राज्यों को देगा सीख

Sun, 03 Dec 2017 02:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,जोगिंद्रनगर (मंडी)
ब्यूरो/अमर उजाला,जोगिंद्रनगर (मंडी) Updated Sun, 03 Dec 2017 02:55 PM IST
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himachal will train six state for medicinal farming

आयुर्वेदिक अनुसंधान संस्थान जोगिंद्रनगर में उत्तर भारत के पहले राष्ट्रीय औषध पादक बोर्ड के क्षेत्रीय केंद्र ने काम करना शुरू कर दिया है। यह केंद्र आयुष मंत्रालय भारत सरकार की ओर से प्रायोजित देश में स्वीकृत आठ क्षेत्रीय केंद्रों में से एक है। 

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राज्य आयुर्वेद विभाग क्षेत्रीय सह सुविधा केंद्र (आरसीएफसी) स्थापित होने से भारत के उत्तरी राज्यों में औषधीय पौधों की संरक्षण की तकनीक का विस्तार करने में अहम भूमिका निभाएगा। यह केंद्र 6 पड़ोसी उत्तर भारतीय राज्यों में औषधीय पौधों की खेती और संरक्षण को बढ़ावा देगा। 
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पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, यूपी, हिमाचल सहित चंडीगढ़ का औषधीय कार्यभार देखेगा। आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र सेरेथाना (कांगड़ा) के आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी डॉ अरुण चंदन को क्षेत्रीय निदेशक के रूप में जोगिंद्रनगर आयुर्वेदिक अनुसंधान संस्थान में तैनात किया गया है। 
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उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इस क्षेत्रीय केंद्र में पांच साल की अवधि के लिए प्रतिवर्ष 149.60 लाख प्रति वर्ष के बारे में 7.82 करोड़ की दर से इस परियोजना भारत सरकार द्वारा 100 प्रतिशत वित्त पोषित होगी। राज्य के राजकोष पर कोई वित्तीय बोझ नहीं होगा।

यह है मुख्य उद्देश्य

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क्षेत्रीय निदेशक ने कहा कि आरसीएफसी के उद्देश्यों में औषधीय पौधों पर संरक्षण, टिकाऊ खेती, प्रौद्योगिकी उन्नयन, प्रशिक्षण और शोध पर इनपुट यहीं से जनरेट होंगे। स्थानीय स्टेक होल्डर / प्रतिष्ठानों के संगठनों के सहयोग से प्राथमिक संसाधन, ग्रेडिंग, मार्केटिंग सुविधा पर भी काम होगा। केंद्र उत्पादकों, कलेक्टरों सहित संबंधित हितधारकों के बीच प्रबंधकीय और तकनीकी कौशल विकसित करना उद्देश्य होगा।

डाटाबेस होगा विकसित
इस केंद्र में जैविक खेती पर ध्यान देने के साथ विशेष रूप से लुप्तप्राय और उच्च मांग वाली प्रजातियों की तकनीक का विकास होगा। पहले से विकसित कृषि तकनीकों का अनुकूलन/ क्षेत्रीय परीक्षण, औषधीय पौधों/ उपज आदि की बिक्री की सुविधा मिलेगी। मांग आपूर्ति समस्या इत्यादि को हल करने और विपणन की सुविधा कम साथ-साथ मांग, मात्रा बेचने और प्रमुख प्रजातियों की कीमत पर एक डाटाबेस विकसित करना। न्यूनतम समर्थन मूल्य की स्थापना करना भी सुनिश्चित किया गया है।

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