दस साल में देश की हेल्थ कैपिटल बनेगा हिमाचल
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हिमाचल प्रदेश को देश की हेल्थ कैपिटल बनाने का प्लान तैयार हो गया है। साल 2025 तक हिमाचल की स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाव लाने के लिए टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। टास्क फोर्स की देखरेख में सुविधाएं बढ़ाने की प्रक्रिया चलेगी। स्टेट हेल्थ कमीशन ने राज्य सरकार को पहली रिपोर्ट सौंप दी है।
नया स्वास्थ्य ढांचा तैयार करने के बजाय पुराना ढांचा मजबूत करने की रिपोर्ट में सिफारिश की गई है। कमीशन ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को सौंपी। इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने भी कमीशन से एक-एक योजना पर विस्तार से जानकारी ली।
इसके बाद आर्म्सडेल बिल्डिंग में आयोजित प्रेस वार्र्ता में कमीशन के चेयरमैन और आईआईटी के नेशनल रिसर्च प्रोफेसर प्रो. महाराज के भान ने रिपोर्ट को सार्वजनिक किया।
इस अवसर पर कमीशन के उपाध्यक्ष और पिड्रिक्टिक्स डिपार्टमेंट एम्स प्रो. विनोद के पाल, पूर्व निदेशक चंडीगढ़ पीजीआई प्रो. एसके शर्मा, बाबा फरीद यूनिवर्सिटी आफ हेल्थ साइंस के वाइस चांसलर प्रो. राज बहादुर, स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ पीजीआई चंडीगढ़ प्रो. राजेश कुमार, राज्य सरकार के पूर्व सलाहकार योजना डीके शर्र्मा, अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य विनीत चौधरी और निदेशक स्वास्थ्य डा. डीएस गुरंग मौजूद रहे।
अगस्त 2014 में गठित हुआ था कमीशन- राज्य सरकार ने प्रदेश में स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए अगस्त 2014 में स्टेट हेल्थ कमीशन का गठन किया था। वीरवार को कमीशन ने अपनी पहली रिपोर्ट सरकार को सौंपी।
कमीशन ने ये की हैं सिफारिशें
- अगले पांच सालों में सभी क्षेत्रीय व जिला अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर को पदोन्नत किया जाए।
- शिमला में लेवल वन का ट्रामा सेंटर, टांडा में लेवल टू का सेंटर, लेवल थ्री का सेंटर सभी क्षेत्रीय, जिला अस्पतालों और लेवल फोर का सेंटर सीएचसी स्तर पर खोला जाएगा।
- विशेषज्ञ सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए मेडिकल कालेजों और जिला/क्षेत्रीय अस्पतालों की एडवाइजरी बनाई जाए।
- सिरमौर और कांगड़ा जिला को आदर्श स्वास्थ्य देखभाल जिलों के रूप में विकसित किया जाए।
- वित्तीय संपदा के उत्पादन के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य स्वास्थ्य कोष का निर्माण किया जाए।
- सामाजिक बीमा प्रणाली के लिए सरकार द्वारा कार्य समूह गठित किया जाए। इसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना को भी जोड़ा जाए।
- विशेषज्ञ डॉक्टरों और मेडिकल कॉलेज नर्सों का अलग से काडर बनाया जाए।
- आईजीएमसी शिमला से संबद्ध स्वास्थ्य स्कूल और टांडा मेडिकल कॉलेज में जन स्वास्थ्य स्कूल की स्थापना की जाए।
- आईजीएमसी, टांडा के लिए स्वास्थ्य प्रणाली उत्कृष्टता केंद्र और अंतर संस्थागत शैक्षिक परिषद की स्थापना की जाए।
- दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट पहनने के लिए बाध्य किया जाए।
- धूम्रपान और शराब के खिलाफ आंदोलन शुरू किया जाए।
- प्रदेश के बजट का तीन प्रतिशत स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च किया जाए। वर्तमान में यह दो प्रतिशत है।
अगले पांच सालों के लिए ये है प्लान
- अगले दो सालों में भारतीय जन स्वास्थ्य मानक की स्वीकृति प्राप्त करने के लिए मौजूदा 48 उप जिला अस्पतालों को दुरुस्त किया जाए। अगले पांच सालों में 12 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को 100 बिस्तर वाले उप जिला अस्पतालों में पदोन्नत किया जाए।
- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल, पुराने रोगों की जांच और गुणवत्ता औषधालय सेवाओं के क्षेत्र में कार्य क्षमता हासिल की जाए।
- 494 में से चयनित 100 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सितारा प्राथमिक केंद्र के तौर पर पदोन्नत किया जाए। 75 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को 2018 तक सितारा श्रेणी में पदोन्नत किया जाए।
- शेष प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में अगले 5 साल में व्यापक औषधालय, सामुदायिक विस्तार किया जाए। इन केंद्रों को आयुष चिकित्सकों और नर्सों द्वारा चलाया जाए।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बच्चों की सामान्य बीमारियों के इलाज और लोगों की गंभीर बीमारियों के लिए स्वास्थ्य उप केंद्रों को सुदृढ़ किया जाए।
रोटा वायरस टीका तैयार करने वाला हिमाचल पहला राज्य
हिमाचल प्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य होगा, जो अगले महीने से कांगड़ा जिला से रोटा वायरस टीकाकरण शुरू करेगा। रोटा वायरस बच्चों और युवाओं में डायरिया का प्रमुख कारण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य आयोग की संस्तुतियों पर कदम उठाएगी और आयोग की संस्तुतियों को कार्यान्वित करने के लिए शीघ्र कार्य किया जाएगा। जिला अस्पतालों में वरिष्ठ चिकित्सकों एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों का रोटेशन सुनिश्चित बनाया जाएगा।
उन्होंने आयुष फिजिशियन, नर्सिज एवं पैरामैडिक्स के लिए ब्रीज कोर्स करवाए जाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जिला अस्पताल परामर्श बोर्ड तथा अंतर संस्थानगत शैक्षणिक परिषद की स्थापना पर भी विचार करेगी। स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों से प्रदेश में स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं में आशातीत परिवर्तन होगा और विशेषकर गरीब लोगों को इसका लाभ मिलेगा।
हिमाचल में ट्रामा केयर सुविधा के लिए 17 करोड़ मंजूर
हिमाचल प्रदेश में ट्रॉमा केयर सुविधाओं के विस्तार के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 17 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। यह राशि केंद्र प्रायोजित योजना के लिए होगी। राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित सरकारी अस्पतालों में क्षमता विकास और ट्रॉमा केयर विस्तार के लिए राशि का उपयोग किया जा सकेगा।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि इस राशि में से मंडी क्षेत्रीय अस्पताल के लिए 2.75 करोड़ रुपये हैं। हमीरपुर क्षेत्रीय अस्पताल, रामपुर, शिमला, चंबा के अस्पतालों में ट्रॉमा केयर सुविधाओं पर 6.07 करोड़ रुपये खर्च हो सकेंगे। कांगड़ा के टांडा स्थित डा. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कालेज के लिए भी राशि स्वीकृत की गई है। नड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार हिमाचल में स्वास्थ्य संरचना को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। हिमाचल के लिए एम्स को मंजूरी दी गई है और इसे जल्द चालू किया जाएगा।
नड्डा ने कहा कि शिमला में कैंसर केयर सेंटर के लिए 45 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। नाहन और हमीरपुर के जिला अस्पतालों और दो मेडिकल कॉलेजों को उन्नत बनाने के लिए भी प्रथम किस्त जारी की जा चुकी है। शिमला में ए लेबल वन की ट्रामा सुविधा भी प्रस्तावित है। टांडा मेडिकल कालेज के लिए 32.78 करोड़ के उपकरणों की खरीद की कार्रवाई की जा रही है। शिमला के लिए सीजीएचएस सेंटर को भी मंजूरी दी गई है।