शब्दों में हेर-फेर कर विजिलेंस ने निकाला पीसी एक्ट का तोड़
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विजिलेंस ब्यूरो ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) का तोड़ निकाल लिया है। विजिलेंस मैनुअल में शब्दों का हेरफेर कर यह तोड़ निकाला गया है। मैनुअल के चैप्टर दो में लिखे इंक्वायरी शब्द की जगह डिस्क्रीट वेरिफिकेशन (विवेकशील सत्यापन) पढ़ने को कहा गया है। इस बदलाव के बाद अब सरकार की अनुमति के बिना भी ब्यूरो वेरिफिकेशन के नाम पर जांच कर सकेगा।
नियमों में हुए इस बदलाव को ब्यूरो ने लागू भी कर दिया है। केंद्र ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में बड़ा संशोधन किया है। संशोधन के मुताबिक किसी भी सरकारी कर्मचारी, अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार या आय से अधिक समेत किसी भी तरह की शिकायत मिलने पर उसके नियोक्ता विभाग की मंजूरी जांच के लिए अनिवार्य हो गई है। हालांकि, अगर वह घूस मांगता हो तो ट्रैप करने के लिए मंजूरी की जरूरत नहीं है।
लेकिन मंजूरी के पेंच के चलते ब्यूरो की कई जांचें अधर में लटक गई थीं। कुछ बड़े मामलों में संबंधित विभागों को पत्र लिखकर जांच की अनुमति भी मांगी गई लेकिन विभागों की ओर से विजिलेंस को जवाब नहीं मिला। लिहाजा, ब्यूरो ने विजिलेंस मैनुअल में इंक्वायरी शब्द को डिस्क्रीट वेरिफिकेशन कर दिया।
विजिलेंस के पूर्व प्रमुख डॉ. अतुल वर्मा के कार्यकाल के दौरान एक्ट में संशोधन से जांचों में आ रही दिक्कत की वजह से इस बदलाव के आदेश जारी कर दिए। अब वेरिफिकेशन के इस नए हथियार के जरिये ब्यूरो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में हाल ही में केंद्र द्वारा किए गए संशोधन के बाद भी सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों पर पकड़ बनाए रखेगा।