बढ़ने वाली हैं वीरभद्र सरकार के मंत्रियों की मुश्किलें, सीएम ने दिए सख्त निर्देश
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गोल्ड रिफाइनरियों को कर में छूट देने के मामले में वीरभद्र सरकार के मंत्रियों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। सरकार ने लंबे मंथन के बाद विजिलेंस को मामले की जांच सौंप दी है। यूं तो सरकार ने 27 फरवरी को हुई मंत्रिमंडल बैठक में जांच कराने का फैसला लिया था, लेकिन अफसरों के खेल के चलते जांच की फाइल शासन में ही अटकी थी। अब मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश के बाद फाइल विजिलेंस को भेज दी गई है।
वीरभद्र सरकार के कार्यकाल में नादौन और परवाणू में स्थापित दो गोल्ड रिफाइनरियों को एंट्री टैक्स में भारी छूट दी गई थी। तत्कालीन वीरभद्र नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने नादौन वाली रिफाइनरी को 2013-14 से 2015-16 का 8 करोड़ 45 लाख 75 हजार 466 रुपये माफ किए, जबकि परवाणू की रिफाइनरी के 2010-11 से 2016-17 तक के 5 करोड़ 65 लाख 21 हजार 975 रुपये माफ किए थे। कहने को यह फैसला तत्कालीन मंत्रिमंडल ने लिया था, लेकिन इससे सरकार को करीब 15 करोड़ का घाटा हुआ।
अफसर भी आ सकते हैं लपेटे में
सूत्रों की मानें तो 22 अगस्त, 2017 को मंत्रिमंडल बैठक में इस प्रस्ताव को पेश किया गया और अफसरों को दरकिनार कर छूट देने का निर्णय लिया। इसके बाद 11 अक्तूबर, 2017 को इसकी अधिसूचना जारी कर दी।
चुनावों से पहले हुए इस फैसले को लेकर उस समय भी विपक्ष में बैठी भाजपा ने सवाल उठाए थे। मामले की जांच की भी मांग की थी। प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 27 फरवरी को हुई मंत्रिमंडल बैठक में निर्णय लिया कि दोनों रिफाइनरियों को दी गई टैक्स में छूट की जांच कराई जाएगी।
सूत्रों की मानें तो मामले की जांच में उद्योग, वित्त, विधि और आबकारी एवं कराधान विभाग के कुछ अधिकारी भी मुश्किल में पड़ सकते हैं।
भले ही मंत्रिमंडल बैठक में उनकी ओर से प्रस्ताव न लाया गया हो, लेकिन प्रस्ताव पास होने के बाद उनके पास गया तो उन्हीं अफसरों ने सरकार के इस निर्णय को लागू करने में परोक्ष रूप से मदद की। मंत्रिमंडल के निर्णय संबंधित विभाग और उसके बाद विधि और वित्त विभाग के पास भी जाते हैं।
बस खरीद, पॉलीहाउस सब्सिडी में हेराफेरी मामले में जांच की तैयारी
प्रदेश सरकार ने एचआरटीसी में अतिरिक्त बसें खरीदने और पॉलीहाउस सब्सिडी में हेराफेरी करने के मामले में जांच की तैयारी कर ली है। विधानसभा में दोनों मामलों में हुए हंगामे के चलते विभागों के मंत्रियों ने जांच के आदेश दिए हैं।
सरकार ने अधिकारिक तौर पर दोनों मामले में अधिकारियों से पूछा है। अब इनकी जांच की जा रही है। ये बसें पूर्व सरकार के कार्यकाल के दौरान खरीद गई हैं, जबकि पॉलीहाउस की सब्सिडी का मामला भी पूर्व सरकार के कार्यकाल का है।
सत्ता पक्ष की ओर से ही बस खरीद का मामला सदन में उठाया गया था। इसमें परिवहन मंत्री गोबिंद ठाकुर ने कहा कि हिमाचल में जरूरत से ज्यादा बसें खरीदी गई हैं। इसके अलावा जवाहर लाल नेहरू अर्बन रिन्यूअल मिशन के तहत खरीदी गई बसें भी सड़कों पर ही खड़ी हैं। इसका कारण सही तरीके से क्लस्टर न बनाया जाना है। निजी ऑपरेटर भी मामले में हाईकोर्ट गए हैं।
अब परिवहन निगम निजी ऑपरेटरों के साथ मिलकर रूट परमिट को लेकर विचार-विमर्श कर रहा है। वहीं, नयनादेवी के विधायक रामलाल ठाकुर ने विधानसभा में सब्सिडी का मामला उठाया था। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को पॉलीहाउस लगाने के लिए सब्सिडी दी गई थी।
उन्होंने पैसा हड़पने के बाद यह पॉलीहाउस दूसरों को बेच दिए हैं। नियमों के तहत ऐसा नहीं किया जा सकता है। सदन में हंगामे के बीच कृषि मंत्री रामलाल मारकंडा ने इस मामले में जांच की बात कही थी। अब विभाग में इसकी जांच कराने के लिए कमेटी गठित की जा रही है।