विजिलेंस के निशाने पर डिफॉल्टर, लोन देने की भी होगी जांच
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बैंकों से लोन लेकर इच्छा से डिफॉल्टर बनने वाले हिमाचल के ‘नीरव मोदी’ अब स्टेट विजिलेंस के निशाने पर आ गए हैं। विजिलेंस ब्यूरो ने ऐसे डिफॉल्टरों व उन्हें लोन दिलाने वाले बैंक अधिकारियों, कर्मचारियों को चिह्नित करने का काम शुरू कर दिया है।
ब्यूरो ने यह काम इच्छानुसार डिफॉल्टर बनने वाले कई ‘नीरव मोदियों’ की शिकायत मिलने के बाद शुरू की है। विजिलेंस को ऐसे लोगों की शिकायत मिली है, जिन्होंने बैंकों से भारी भरकम लोन लिया लेकिन उसे चुकाने के बजाय खुद डिफॉल्टर बन गए। यही नहीं, लोन की रकम से ही अपनी आलीशान जिंदगी जी रहे हैं।
पहले चरण में इनकी हो सकती है जांच
ऐसे लोगों की शिकायतों के बीच विजिलेंस ने बैंकों से लोन लेकर हड़पने वालों की सूची बनाना शुरू कर दी है। बैंकों से भी संपर्क साधा जा रहा है। सूत्रों की मानें तो डिफॉल्टरों की तलाश के साथ ही लोन देने की प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है।
आशंका है कि इस खेल में बैंक के अधिकारी, कर्मचारी भी शामिल हैं, जो लोन देने के लिए नियमों में छूट देकर अपना हिस्सा तय कर लेते हैं। सूत्रों का कहना है कि चूंकि डिफॉल्टरों की संख्या ज्यादा है, ऐसे में विजिलेंस पहले चरण में करोड़ के फिगर वाले लोन डिफॉल्टरों की जांच कर रहा है।