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चार्जशीट मामला: विजिलेंस ने जांच के लिए विभागों से मांगी मंजूरी

Fri, 21 Dec 2018 01:56 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Fri, 21 Dec 2018 01:56 PM IST
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Himachal vigilance bureau demands for Probe on BJp charge sheet

कांग्रेस द्वारा चार्जशीट लाने के एलान के बीच प्रदेश की सत्तारूढ़ भाजपा की विपक्ष में रहते तत्कालीन कांग्रेस सरकार के खिलाफ सौंपी गई चार्जशीट की जांच पर विजिलेंस ब्यूरो की गतिविधियां तेज हो गई हैं। ब्यूरो की सिफारिश पर प्रमुख सचिव विजिलेंस ने चार्जशीट की जांच के दायरे में आने वाले विभागों से जांच की मंजूरी मांगी है।

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ब्यूरो ने यह कवायद हाल में भ्रष्टाचार निरोधक कानून के सेक्शन 17 ए में केंद्र सरकार द्वारा किए गए संशोधन के बाद की है। इसके तहत किसी भी सरकारी कर्मचारी अधिकारी के खिलाफ जांच के लिए भी ब्यूरो को अनुमति लेना जरूरी हो गया है। अब विभागों से मंजूरी मिलने के बाद ब्यूरो चार्जशीट के मामलों में प्रारंभिक जांच शुरू करेगा। अभी तक ब्यूरो प्रारंभिक शिकायतों पर जांच करने के बाद रिपोर्ट सरकार को सौंपता था।
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सरकार की अनुमति के बाद मामले दर्ज होते थे और चार्जशीट से पहले दोबारा संबंधित विभाग से मंजूरी ली जाती थी। लेकिन मोदी सरकार के पीसी एक्ट में संशोधन के बाद अब प्रारंभिक जांच के लिए भी जांच एजेंसी को विभागीय अनुमति लेनी जरूरी हो गई है।

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Himachal vigilance bureau demands for Probe on BJp charge sheet

इसी बदलाव के बीच प्रमुख सचिव विजिलेंस संजय कुंडू ने सभी विभागों को पत्र लिखकर भाजपा चार्जशीट में शामिल मामलों की जांच की मंजूरी मांगी है। खास बात यह है कि विभागों से ब्यूरो ने मंजूरी किसी एक व्यक्ति की नहीं बल्कि विभागीय मंजूरी मांगी है ताकि जांच के बाद जो भी नाम सामने आए, उन्हें सरकार के सामने रखकर अभियोग पंजीकृत करने की मंजूरी मांगी जा सके।

ब्यूरो के इस कदम के बाद विभिन्न विभागों के अफसरों में हड़कंप मच गया है। नाम न लिखने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि किसी व्यक्ति के खिलाफ जांच की मंजूरी पर तो निर्णय आसान था। लेकिन पूरे विभाग की मंजूरी को लेकर पेंच फंस गया है। अधिकारिक सूत्र का कहना है कि विभाग के अधिकारी तय नहीं कर पा रहे कि वह मंजूरी दें या न न दें। चूंकि उन्होंने ही आरोपों के संबंध में जांच के  लिए दस्तावेज भेजे थे, ऐसे में अब उनके लिए इंकार कर पाना भी आसान नहीं रह गया है।

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