{"_id":"6a9ae3029def74fc7406f2cc","slug":"teachers-are-fulfilling-the-role-of-a-mentor-even-outside-the-classroom-guiding-children-in-a-new-direction-shimla-news-c-19-sml1002-781452-2026-09-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shimla News: कक्षा से बाहर भी गुरु की भूमिका निभा रहे शिक्षक, बच्चों को दे रहे नई दिशा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shimla News: कक्षा से बाहर भी गुरु की भूमिका निभा रहे शिक्षक, बच्चों को दे रहे नई दिशा
विज्ञापन
कोई गरीब बच्चों का सहारा बनें तो किसी ने खेल और योग जगत को दिए सितारे, शिक्षक दिवस पर आज होंगे सम्मानित
कई शिक्षा बिना पुरस्कार पाए भी बने मिसाल
अनिल पंवार
शिमला। शिक्षक का काम सिर्फ ब्लैक बोर्ड पर पढ़ाना नहीं बल्कि बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानकर उसे निखारना भी है। राजधानी शिमला में ऐसे कई शिक्षक हैं, जो स्कूल में पढ़ाने की जिम्मेदारी निभाने के साथ अपने स्तर पर बच्चों को नई दिशा देने में जुटे हैं।
कोई जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क पढ़ा रहा है तो कोई खेल मैदान में प्रतिभाओं को तराश रहा है। वहीं कुछ शिक्षक बच्चों को योग और अनुशासन से जोड़कर स्वस्थ जीवन का संदेश दे रहे हैं। इन शिक्षकों की पहल उन बच्चों के लिए खास मायने रखती है जिन्हें आर्थिक या अन्य कारणों से अतिरिक्त सुविधाएं नहीं मिल पातीं। स्कूल से छुट्टी के बाद भी इन शिक्षकों की क्लास जारी रहती है। कमजोर आर्थिक स्थिति वाले बच्चों को किताब-कॉपी के साथ पढ़ाई का सहारा मिलता है।
खिलाड़ियों को तराश रहे ईश्वर कंवर
सुन्नी के रहने वाले ईश्वर कंवर वर्ष 2005 में भारतीय सेना से सेवानिवृत्ति के बाद सरोग स्कूल में बतौर पीटीई शिक्षक सेवाएं दे रहे हैं। ईश्वर से खेल के गुर सीख चुके 28 छात्र अब तक राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं। वहीं 68 छात्रों ने राज्य स्तर पर पदक जीते हैं। कंवर खुद भी पेशेवर बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। वह अब तक सात राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं। इनमें दो बार उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर रजत पदक भी जीते हैं। क्षेत्र में ईश्वर की पहचान ऐसे शिक्षक के तौर पर होती है, जो युवाओं की प्रतिभा को तराशकर उन्हें खेलों में राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा रहे हैं।
विज्ञापन
27 साल से योग सिखा रही तृप्ता
शहर के पोर्टमोर स्कूल की अंग्रेजी प्रवक्ता तृप्ता शर्मा अध्यापन और योग के क्षेत्र में दशकों से सक्रिय हैं। वह बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ लोगों को योग का प्रशिक्षण भी देती हैं। शिमला में तृप्ता की पहचान एक योग शिक्षिका के तौर पर भी होती है।शर्मा पिछले 22 वर्षों से बच्चों को पढ़ा रही हैं। इसके साथ ही वह 27 वर्षों से लोगों को योग का प्रशिक्षण दे रही हैं। तृप्ता आर्ट ऑफ लिविंग संस्था से जुड़ी हुई हैं। वह लोगों के लिए योग और ध्यान के सत्र आयोजित करती हैं। इसके अलावा वह तनाव प्रबंधन और प्रेरक वक्ता के रूप में भी अपनी सेवाएं देती हैं।
गरीब बच्चों को घर पर रखकर पढ़ा रहे अमित
राजधानी के केल्टी निवासी अमित ठाकुर बीते पांच वर्षों से शिक्षा विभाग में बतौर व्यावसायिक शिक्षक सेवाएं दे रहे हैं। वह आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को पढ़ाई में मदद कर रहे हैं। वर्तमान में तीन छात्रों को अपने घर में रखकर उन्हें स्कूली पढ़ाई में सहयोग कर रहे हैं। अमित न सिर्फ इनके रहने और खाने-पीने का खर्च उठा रहे हैं, बल्कि पढ़ाई का खर्च भी खुद वहन कर रहे हैं। खास बात यह है कि अमित से पढ़ चुके कई छात्र अब नौकरी पाकर आत्मनिर्भर भी हो गए हैं। वर्तमान में अमित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला टुटीकंडी में सेवाएं दे रहे हैं।
विज्ञापन
कई शिक्षा बिना पुरस्कार पाए भी बने मिसाल
अनिल पंवार
शिमला। शिक्षक का काम सिर्फ ब्लैक बोर्ड पर पढ़ाना नहीं बल्कि बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानकर उसे निखारना भी है। राजधानी शिमला में ऐसे कई शिक्षक हैं, जो स्कूल में पढ़ाने की जिम्मेदारी निभाने के साथ अपने स्तर पर बच्चों को नई दिशा देने में जुटे हैं।
कोई जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क पढ़ा रहा है तो कोई खेल मैदान में प्रतिभाओं को तराश रहा है। वहीं कुछ शिक्षक बच्चों को योग और अनुशासन से जोड़कर स्वस्थ जीवन का संदेश दे रहे हैं। इन शिक्षकों की पहल उन बच्चों के लिए खास मायने रखती है जिन्हें आर्थिक या अन्य कारणों से अतिरिक्त सुविधाएं नहीं मिल पातीं। स्कूल से छुट्टी के बाद भी इन शिक्षकों की क्लास जारी रहती है। कमजोर आर्थिक स्थिति वाले बच्चों को किताब-कॉपी के साथ पढ़ाई का सहारा मिलता है।
विज्ञापन
खिलाड़ियों को तराश रहे ईश्वर कंवर
सुन्नी के रहने वाले ईश्वर कंवर वर्ष 2005 में भारतीय सेना से सेवानिवृत्ति के बाद सरोग स्कूल में बतौर पीटीई शिक्षक सेवाएं दे रहे हैं। ईश्वर से खेल के गुर सीख चुके 28 छात्र अब तक राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं। वहीं 68 छात्रों ने राज्य स्तर पर पदक जीते हैं। कंवर खुद भी पेशेवर बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। वह अब तक सात राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं। इनमें दो बार उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर रजत पदक भी जीते हैं। क्षेत्र में ईश्वर की पहचान ऐसे शिक्षक के तौर पर होती है, जो युवाओं की प्रतिभा को तराशकर उन्हें खेलों में राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा रहे हैं।
विज्ञापन
27 साल से योग सिखा रही तृप्ता
शहर के पोर्टमोर स्कूल की अंग्रेजी प्रवक्ता तृप्ता शर्मा अध्यापन और योग के क्षेत्र में दशकों से सक्रिय हैं। वह बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ लोगों को योग का प्रशिक्षण भी देती हैं। शिमला में तृप्ता की पहचान एक योग शिक्षिका के तौर पर भी होती है।शर्मा पिछले 22 वर्षों से बच्चों को पढ़ा रही हैं। इसके साथ ही वह 27 वर्षों से लोगों को योग का प्रशिक्षण दे रही हैं। तृप्ता आर्ट ऑफ लिविंग संस्था से जुड़ी हुई हैं। वह लोगों के लिए योग और ध्यान के सत्र आयोजित करती हैं। इसके अलावा वह तनाव प्रबंधन और प्रेरक वक्ता के रूप में भी अपनी सेवाएं देती हैं।
गरीब बच्चों को घर पर रखकर पढ़ा रहे अमित
राजधानी के केल्टी निवासी अमित ठाकुर बीते पांच वर्षों से शिक्षा विभाग में बतौर व्यावसायिक शिक्षक सेवाएं दे रहे हैं। वह आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को पढ़ाई में मदद कर रहे हैं। वर्तमान में तीन छात्रों को अपने घर में रखकर उन्हें स्कूली पढ़ाई में सहयोग कर रहे हैं। अमित न सिर्फ इनके रहने और खाने-पीने का खर्च उठा रहे हैं, बल्कि पढ़ाई का खर्च भी खुद वहन कर रहे हैं। खास बात यह है कि अमित से पढ़ चुके कई छात्र अब नौकरी पाकर आत्मनिर्भर भी हो गए हैं। वर्तमान में अमित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला टुटीकंडी में सेवाएं दे रहे हैं।