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विधानसभा चुनाव: खाली पड़े मंत्री पद से हटी विधायकों की नजर
सुरेश शांडिल्य/अमर उजाला, शिमला
Updated Thu, 29 Jun 2017 02:50 PM IST
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विधानसभा चुनाव की आहट के बीच अपने-अपने क्षेत्रों में चुनावी तैयारियों में फंसे हिमाचल के कांग्रेस विधायकों की अब मंत्री बनने में कोई खास रुचि नहीं दिख रही। कुछ महीने बाद चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में विधायकों को भी मंत्री बनाए जाने की संभावना शायद कम नजर आ रही है, जबकि इससे पहले मंत्री बनने की ख्वाहिश रखने वाले विधायक कुर्सी की ओर टकटकी बांधे हुए थे।
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डेढ़ साल पहले मंत्री पद के प्रबल दावेदार रह चुके एक एमएलए अब साफ कह रहे हैं कि हर चीज का एक वक्त होता है। उधर, मंत्रिमंडल विस्तार का फैसला मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को लेना है। सीएम की चुप्पी के बाद ग्यारहवें मंत्री का पद इस 12वीं विधानसभा के कार्यकाल के आखिर तक खाली ही रह सकता है। मंत्री कर्ण सिंह के मई में हुए देहांत के बाद से ये पद रिक्त है।
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प्रदेश सरकार ने सत्ता में आते ही नौ मंत्रियों की ताजपोशी की थी। शुरू में मंत्रियों के दो पद खाली रखे गए। कुछ समय बाद मंडी से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पंडित सुखराम के बेटे अनिल शर्मा को दसवां मंत्री बना दिया गया। एक अन्य पद कुछ और अरसे तक खाली रहा।
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कांग्रेस विधायकों की मंत्री बनने को रस्साकशी के बीच बंजार के कांग्रेस विधायक कर्ण सिंह को अगस्त 2015 में मंत्री बनाया गया। उन्हें आयुर्वेद और सहकारिता महकमे दिए गए। कर्ण सिंह के मंत्री बनने से पहले घुमारवीं के कांग्रेस विधायक राजेश धर्माणी ने भी झंडी हासिल करने के लिए दिल्ली तक पसीना बहाया।
पर वे क्षेत्रीय संतुलन की दुहाई देते ही रह गए। कुछ अन्य विधायक भी अपने लिए मंत्री पद मांग रहे थे। मुख्य संसदीय सचिव आईपीएच जगजीवन पाल शांता कुमार के कांगड़ा किले के सुलाह विधानसभा क्षेत्र से वरिष्ठ कांग्रेस विधायक हैं। पिछले विधानसभा
चुनाव में कांगड़ा में कांग्रेस को मिली बड़ी जीत के बाद इस क्षेत्र को दोबारा कांग्रेस के नियंत्रण में लाने के लिए जगजीवन पाल पर दांव खेलने की बातें हो रही थीं। ज्वाली के विधायक एवं मुख्य संसदीय सचिव शिक्षा नीरज भारती का नाम भी मंत्री पद नए दावेदारों में गिना जा रहा था। गगरेट के विधायक राकेश कालिया भी दावेदार बताए जा रहे थे, लेकिन अब मामला ठंडा पड़ गया है।
हर चीज का एक वक्त होता है: धर्माणी
घुमारवीं के कांग्रेस विधायक राजेश धर्माणी ने बताया कि हर चीज का एक वक्त होता है। मंत्री बनने के बाद काम करने के लिए भी तो टाइम चाहिए। हमने तीन साल पहले क्षेत्रीय संतुलन की बात उठाते हुए मंत्री पद की दावेदारी की थी।
मंत्री बनने का बहुत इच्छुक नहीं हूं: जगजीवन
सुलाह के कांग्रेस विधायक जगजीवन पाल ने कहा है कि वे मंत्री बनने के लिए बहुत इच्छुक नहीं हैं। मंत्री बनाना मुख्यमंत्री का ही विशेषाधिकार है। वही जानें कि किसे मंत्री बनाया जाना है, किसे नहीं। अगर दायित्व मिलेगा तो उसे निष्ठा से निभाएंगे।