वीरभद्र के खिलाफ ईडी की कार्रवाई पर सदन में हंगामा, विपक्ष का वाकआउट
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नौ दिन की छुट्टी के बाद सोमवार को विधानसभा सत्र के शुरू होते ही सदन में खूब हंगामा हुआ। ईडी की ओर से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की संपत्ति जब्त करने के मामले पर चर्चा न होने से नाराज विपक्ष ने जमकर नारेबाजी की। मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए विपक्ष ने वाकआउट कर दिया। सोमवार को दोपहर बाद दो बजे सत्र शुरू होते ही विपक्षी दल भाजपा के विधायकों ने प्रश्नकाल स्थगित कर नियम 67 के तहत वीरभद्र मामले पर चर्चा का प्रस्ताव रखा।
भाजपा विधायक डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार पर आय से अधिक संपत्ति के मामले की जांच व कार्रवाई होना बेहद गंभीर मामला है। इस पर चर्चा होनी चाहिए। विस अध्यक्ष बीबीएल बुटेल ने मामले को सब जुडिस बता और नियमों का हवाला देते हुए प्रस्ताव खारिज कर दिया।
इस बीच नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि जब सीएम मीडिया और विभिन्न प्लेटफार्म पर इस बारे में बयानबाजी कर सकते हैं तो सदन में इस मामले पर चर्चा क्यों नहीं हो सकती है। धूमल ने स्पीकर को सुझाव दिया कि नियम के तहत ही वे चाहें तो इस असामान्य घटनाक्रम पर चर्चा की अनुमति दे सकते हैं।
लेकिन स्पीकर ने चर्चा की अनुमति नहीं दी और प्रश्नकाल शुरू होने की घोषणा कर दी। इस पर विपक्ष ने सदन में हंगामा शुरू कर दिया। एक तरफ सीएम एवं मंत्री सवालों के जवाब दे रहे थे, वहीं दूसरी ओर सदन के भीतर भाजपा विधायक कुर्सी छोड़ो के नारे लगाते रहे। स्पीकर के प्रस्ताव स्वीकार न करने पर बाद में विपक्षी विधायक कुछ देर के लिए वाकआउट कर गए।
यूपीए सरकार के दौरान शुरू हुई थी जांच
सदन में धूमल ने कहा कि मुख्यमंत्री हमेशा कहते हैं कि वर्तमान केंद्र सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही है। लेकिन वह भूल रहे हैं कि जब वह केंद्र सरकार में 2009 से 2012 के बीच मंत्री थे तब उन पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगे। उस समय की यूपीए सरकार ने उनके खिलाफ जांच शुरू की थी। धूमल ने चुटकी लेते हुए कहा ‘हम हमेशा साजिश करते हैं और इनकी संपत्ति बढ़ती चली गई।’
बाली बोले, मीडिया छाप रहा है तो उसे बताएं तथ्य- विपक्ष की चर्चा की मांग के बीच सीएम के बचाव में उतरे परिवहन मंत्री जीएस बाली ने कहा कि मीडिया में भले ही मामला छप रहा हो, लेकिन ये कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में विधानसभा के नियमों के तहत ऐसे मामले पर चर्चा होना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर आपके पास भी ऐसे तथ्य हैं तो आप भी मीडिया में जा सकते हैं, लेकिन सदन में ऐसे मामले की चर्चा नहीं हो सकती।