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Shimla News: हिमाचल विश्वविद्यालय में पांच साल से नियमित भर्तियां बंद
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आरटीआई और रिकॉर्ड से खुलासा, वर्ष 2021 के बाद नहीं भरा गया कोई पद
फीस लेने के बावजूद आगे नहीं बढ़ी भर्ती प्रक्रिया
एक्सक्लूसिव
हर्षित शर्मा
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में वर्ष 2020 के बाद से नियमित गैर-शैक्षणिक पदों पर भर्तियां नहीं हुई हैं। सूचना के अधिकार के तहत सामने आई जानकारी और भर्ती से जुड़े उपलब्ध रिकॉर्ड बताते हैं कि वर्ष 2020 और 2021 में विश्वविद्यालय ने क्लर्क, जेओए आईटी और विभिन्न वर्गों के 275 पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। इन पदों के लिए प्रदेशभर से हजारों अभ्यर्थियों ने आवेदन किया और निर्धारित शुल्क भी जमा करवाया लेकिन भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। न लिखित परीक्षा आयोजित हुई।
आरटीआई के जवाब में विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान लागू आचार संहिता और उसके बाद राज्य सरकार के निर्देशों के कारण चयन प्रक्रिया को रोक दिया था। इसके बाद यह प्रक्रिया दोबारा शुरू नहीं हो सकी और विज्ञापन की वैधता भी समाप्त हो गई। ऐसे में अब इन पदों को भरने के लिए नए सिरे से विज्ञापन जारी करना अनिवार्य हो गया है जिसके लिए राज्य सरकार की अनुमति आवश्यक है। भर्ती शाखा के रिकॉर्ड के अनुसार इस अवधि में आउटसोर्स आधार पर कोई भर्ती नहीं की गई। केवल चपरासी पद के लिए दैनिक वेतन आधार पर अभ्यर्थियों की नियुक्ति की सिफारिश की गई जिसे नियमित भर्ती का हिस्सा नहीं माना गया। माली, चौकीदार और अन्य वर्ग-चार पदों पर भी 2020-21 के बाद कोई नियमित नियुक्ति नहीं हुई है। वर्ष
2022 से 2025 के बीच विश्वविद्यालय में भर्ती गतिविधियां सीमित और बिखरी हुई रहीं। कुछ शिक्षकों के पदों और शोध परियोजनाओं से जुड़ी अस्थायी नियुक्तियां जरूर हुईं लेकिन गैर-शैक्षणिक श्रेणी में बड़े स्तर पर कोई नई भर्ती नहीं की गई।
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स्टाफ की कमी से कामकाज प्रभावित
विश्वविद्यालय के कई विभागों, शाखाओं और कार्यालयों में कर्मचारियों की कमी अब स्पष्ट रूप से नजर आने लगी है। क्लर्क, तकनीकी स्टाफ और वर्ग-चार के कर्मचारियों के पद लंबे समय से खाली हैं। इससे प्रशासनिक कार्यों में देरी और अतिरिक्त कार्यभार की स्थिति बन रही है। उपलब्ध स्टाफ पर काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है जिसके कारण फाइलों का निपटारा, परीक्षा शाखा का काम और छात्र सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। कई जगहों पर अस्थायी व्यवस्था के सहारे काम चलाया जा रहा है लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं माना जा रहा।
सरकार से अनुमति पर अटकी नईं भर्तियां
विज्ञापनों की वैधता समाप्त होने के बाद अब इन पदों को भरने के लिए नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया शुरू करना अनिवार्य हो गया है लेकिन इसके लिए राज्य सरकार से अनुमति जरूरी बताई है। मौजूदा स्थिति में अब तक इन पदों को दोबारा विज्ञापित करने के लिए कोई स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आया है। ऐसे में पूरी प्रक्रिया फिर से प्रारंभ होने में और देरी की आशंका है। सरकार से जब तक स्वीकृति नहीं मिलती तब तक सैकड़ों पद खाली ही रहेंगे।
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फीस लेने के बावजूद आगे नहीं बढ़ी भर्ती प्रक्रिया
एक्सक्लूसिव
हर्षित शर्मा
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में वर्ष 2020 के बाद से नियमित गैर-शैक्षणिक पदों पर भर्तियां नहीं हुई हैं। सूचना के अधिकार के तहत सामने आई जानकारी और भर्ती से जुड़े उपलब्ध रिकॉर्ड बताते हैं कि वर्ष 2020 और 2021 में विश्वविद्यालय ने क्लर्क, जेओए आईटी और विभिन्न वर्गों के 275 पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। इन पदों के लिए प्रदेशभर से हजारों अभ्यर्थियों ने आवेदन किया और निर्धारित शुल्क भी जमा करवाया लेकिन भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। न लिखित परीक्षा आयोजित हुई।
आरटीआई के जवाब में विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान लागू आचार संहिता और उसके बाद राज्य सरकार के निर्देशों के कारण चयन प्रक्रिया को रोक दिया था। इसके बाद यह प्रक्रिया दोबारा शुरू नहीं हो सकी और विज्ञापन की वैधता भी समाप्त हो गई। ऐसे में अब इन पदों को भरने के लिए नए सिरे से विज्ञापन जारी करना अनिवार्य हो गया है जिसके लिए राज्य सरकार की अनुमति आवश्यक है। भर्ती शाखा के रिकॉर्ड के अनुसार इस अवधि में आउटसोर्स आधार पर कोई भर्ती नहीं की गई। केवल चपरासी पद के लिए दैनिक वेतन आधार पर अभ्यर्थियों की नियुक्ति की सिफारिश की गई जिसे नियमित भर्ती का हिस्सा नहीं माना गया। माली, चौकीदार और अन्य वर्ग-चार पदों पर भी 2020-21 के बाद कोई नियमित नियुक्ति नहीं हुई है। वर्ष
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2022 से 2025 के बीच विश्वविद्यालय में भर्ती गतिविधियां सीमित और बिखरी हुई रहीं। कुछ शिक्षकों के पदों और शोध परियोजनाओं से जुड़ी अस्थायी नियुक्तियां जरूर हुईं लेकिन गैर-शैक्षणिक श्रेणी में बड़े स्तर पर कोई नई भर्ती नहीं की गई।
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स्टाफ की कमी से कामकाज प्रभावित
विश्वविद्यालय के कई विभागों, शाखाओं और कार्यालयों में कर्मचारियों की कमी अब स्पष्ट रूप से नजर आने लगी है। क्लर्क, तकनीकी स्टाफ और वर्ग-चार के कर्मचारियों के पद लंबे समय से खाली हैं। इससे प्रशासनिक कार्यों में देरी और अतिरिक्त कार्यभार की स्थिति बन रही है। उपलब्ध स्टाफ पर काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है जिसके कारण फाइलों का निपटारा, परीक्षा शाखा का काम और छात्र सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। कई जगहों पर अस्थायी व्यवस्था के सहारे काम चलाया जा रहा है लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं माना जा रहा।
सरकार से अनुमति पर अटकी नईं भर्तियां
विज्ञापनों की वैधता समाप्त होने के बाद अब इन पदों को भरने के लिए नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया शुरू करना अनिवार्य हो गया है लेकिन इसके लिए राज्य सरकार से अनुमति जरूरी बताई है। मौजूदा स्थिति में अब तक इन पदों को दोबारा विज्ञापित करने के लिए कोई स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आया है। ऐसे में पूरी प्रक्रिया फिर से प्रारंभ होने में और देरी की आशंका है। सरकार से जब तक स्वीकृति नहीं मिलती तब तक सैकड़ों पद खाली ही रहेंगे।