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हिमाचल प्रदेश: ग्रेट हिमालयन पार्क से अलग होंगे तीर्थन, सैंज; दोनों क्षेत्रों को वन्यजीव अभयारण्य का दर्जा
Fri, 17 Apr 2026 11:20 AM IST
Ankesh Dogra
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Fri, 17 Apr 2026 11:20 AM IST
सार
हिमाचल प्रदेश सरकार ने कुल्लू जिले के तीर्थन और सैंज क्षेत्रों को अब ग्रेट हिमालयन पार्क में प्रस्तावित विलय से अलग कर दिया गया है। पढ़ें पूरी खबर...
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वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के प्रावधानों के तहत लिया गया फैसला
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश सरकार ने कुल्लू जिले के तीर्थन और सैंज क्षेत्रों को अलग-अलग वन्यजीव अभयारण्य के रूप में बहाल कर दिया है। वन विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार इन दोनों क्षेत्रों को अब ग्रेट हिमालयन पार्क में प्रस्तावित विलय से अलग कर दिया गया है। यह निर्णय वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के प्रावधानों के तहत लिया गया है।
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वर्ष 1999 में सरकार ने 61 वर्ग किलोमीटर के तीर्थन और 90 वर्ग किलोमीटर के सैंज क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया था। वर्ष 2010 में अधिसूचना जारी कर इन दोनों क्षेत्रों को ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में मिलाने का प्रस्ताव रखा गया था। 26 जून 2025 को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की बैठक में इन क्षेत्रों को पार्क से अलग रखने की सिफारिश की गई थी।
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वीरवार को राज्यपाल ने राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की सिफारिश को स्वीकार करते हुए 2010 की अधिसूचना को रद्द करते हुए 1999 की मूल अधिसूचनाओं को फिर से बहाल कर दिया है। अब दोनों क्षेत्रों को दोबारा स्वतंत्र वन्यजीव अभयारण्य घोषित कर दिया गया है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि इस निर्णय से स्थानीय पारिस्थितिकी संरक्षण को बल मिलेगा। क्षेत्र विशेष की जैव विविधता के अनुसार प्रबंधन आसान होगा।
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स्थानीय समुदायों और वन विभाग के बीच समन्वय बेहतर होगा। संरक्षण योजनाओं को अधिक लचीलापन मिलेगा। वन विभाग अब इन दोनों अभयारण्यों के लिए अलग-अलग प्रबंधन योजनाएं तैयार करेगा, जिससे वन्यजीव संरक्षण, पर्यटन और स्थानीय हितों के बीच संतुलन बनाया जा सके।