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सर्वे में खुलासा, हर महीने 9500 रुपये का काम मुफ्त कर रहीं महिलाएं

Tue, 19 Jun 2018 12:52 PM IST
प्रखर दीक्षित, अमर उजाला, शिमला
प्रखर दीक्षित, अमर उजाला, शिमला Updated Tue, 19 Jun 2018 12:52 PM IST
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Himachal Statistics Directorate Survey on womens working without wages

हिमाचल की महिलाएं करीब साढ़े नौ हजार रुपये प्रति महीने वेतन के बराबर काम मुफ्त में कर रही हैं। करीब साढ़े पांच हजार परिवारों पर अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग के अध्ययन में यह बात सामने आई है। महिलाओं का यही अवैतनिक काम राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में करीब 12.80 फीसदी के बराबर की हिस्सेदारी रखता है। विभाग का दावा है कि महिलाओं की इन गतिविधियों का योगदान करीब 16 हजार करोड़ के पार है।

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बच्चों को संभालने से लेकर उन्हें पढ़ाने, खाना पकाने जैसे घरेलू काम महिलाओं की जिम्मेदारी माने जाते रहे हैं। अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग ने पहली बार महिलाओं के इन्हीं अवैतनिक कामों का आर्थिक आधार पर आकलन किया है। सर्वे की मानें तो महिलाएं 9479 रुपये प्रतिमाह मेहनताने वाला काम मुफ्त में कर रही हैं। इसमें बच्चों को पढ़ाने और होमवर्क कराने में 748 रुपये प्रतिमाह प्रति महिला का योगदान है।

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6593 रुपये बनती है महीने की कीमत

Himachal Statistics Directorate Survey on womens working without wages

कृषि गतिविधियों में की गई मेहनत की एक महीने की कीमत प्रति महिला 6593 रुपये बनती है। इसमें पौधरोपण, फल-सब्जियां उगाना, मत्स्य और पशुपालन जैसे काम शामिल हैं। घरेलू काम का मानदेय 1714 रुपये प्रति महिला बनता है। घरेलू काम का मानदेय सालाना करीब 4153 करोड़ बनता है।

राज्य सकल घरेलू उत्पाद में सबसे ज्यादा योगदान 7.18 प्रतिशत के साथ कृषि और संबद्ध गतिविधियों का रहा। इसके अलावा घरेलू काम का योगदान 3.34 प्रतिशत, शिक्षा और स्कूल के काम में मदद का योगदान 1.46 और पारिवारिक सिलाई-कढ़ाई और कढ़ाई जैसे काम का योगदान 0.82 प्रतिशत है।

इसलिए किया गया अध्ययन

Himachal Statistics Directorate Survey on womens working without wages

सरकार के आर्थिक सलाहकार प्रदीप चौहान ने बताया कि बदलते दौर में महिलाएं घर और दफ्तर दोनों की ही जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं। दफ्तर में किए काम का उन्हें वेतन मिल रहा है, जबकि जिस घरेलू काम को अपनी जिम्मेदारी मानकर कर रही हैं उसी को अगर किसी अन्य से कराया जाए तो वह काफी कीमत रखता है। इसी को जानने के लिए यह सर्वे कराया गया कि आखिर महिलाओं के घर में किए जाने वाले अवैतनिक काम की कीमत कितनी हैं।

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साढ़े पांच हजार परिवारों का किया सर्वे

Himachal Statistics Directorate Survey on womens working without wages

प्रदीप चौहान ने बताया कि प्रदेश के 5332 घरों का सर्वे किया गया। इसमें 79.3 प्रतिशत परिवार ग्रामीण और 20.7 प्रतिशत परिवार शहरी क्षेत्र से थे। इनमें 23.26 प्रतिशत परिवार अनुसूचित जाति, 7.9 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति, 13.50 प्रतिशत पिछड़ी जाति और 55.85 प्रतिशत अन्य परिवारों से थे।

निर्धारित मापदंड पर गहराई के साथ परिवारों के पुरुषों, बेटियों, बहुओं, सांसों आदि से बात की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में 21 प्रतिशत, जबकि शहरी क्षेत्रों में 17 प्रतिशत महिलाएं परिवार में मुखिया की भूमिका निभा रही थीं।

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