रिटायर अफसरों के पुनर्वास का अड्डा बना बस अड्डा प्राधिकरण
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम ने बस अड्डा प्राधिकरण को रिटायर अधिकारियों के पुनर्वास का अड्डा बना दिया है। प्राधिकरण में करीब 23 कर्मचारियों का स्टाफ है। इनमें आधे से ज्यादा रिटायरी है। प्रदेश में बस अड्डों के लिए भूमि चयन से लेकर निर्माण और रखरखाव जैसी अहम जिम्मेदारी प्राधिकरण के पास है।
नियमित कर्मचारियों में निगम के चार कारिंदे हैं, जबकि जूनियर इंजीनियर और डाटा एंट्री ऑपरेटर पदों पर आउटसोर्स पर कर्मचारी तैनात हैं। प्राधिकरण में एडजस्ट रिटायर अधिकारियों को मोटे वेतन के साथ गाड़ी और बंगले की तमाम सहूलियतें दी जा रही हैं। प्रतिमाह 90 लाख रुपये प्राधिकरण के वेतन-भत्तों पर जा रहे हैं।
सेवानिवृत्ति के बाद अगर एचआरटीसी अफसर को री-इंप्लायमेंट नहीं मिलती है तो उन्हें बस प्राधिकरण अथॉरिटी में तैनाती दी जाती है। एचआरटीसी का यह विंग बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। बस अड्डे के निर्माण की प्लानिंग के साथ इनके रखरखाव का जिम्मा अथॉरिटी पर रहता है।
एचआरटीसी की बीओडी में इन अफसरों का उपस्थित होना अनिवार्य होता है। प्रधान सचिव एचआरटीसी संजय गुप्ता ने कहा कि सेवानिवृत्त के बाद किस अफसर को री- इंप्लायमेंट दी जानी है, इसका फैसला बीओडी में होता है।
मलाईदार कुर्सी पर जमे हैं रिटायरी
बस अड्डा प्राधिकरण में रिटायरियों को दो से तीन बार री-इंप्लायमेंट दी गई है। इसके अलावा एचआरटीसी में भी जिन अफसरों की ऊपर तक पहुंच है, उन्हें निगम या प्राधिकरण में तैनाती दी जाती है।
ये हैं रिटायरी
प्राधिकरण अथॉरिटी का मुख्य सीजेएम, अधिशासी अभियंता, एसडीओ इलैक्ट्रीकल और सिविल, हेड ड्राफ्ट्समैन, डिप्टी कंट्रोलर, सेक्शन ऑफिसर (एसओ), अधीक्षक के अलावा सूत्र बताते हैं कि छोटे पदों पर रिटायरियों की तैनाती हुई है। 6 जूनियर इंजीनियर और 4 डाटा एंट्री ऑपरेटर (आउट सोर्स)।