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Himachal News: टिकाऊ होंगी हिमाचल की सड़कें, 10 साल तक खराब नहीं होंगी; दो नई आधुनिक तकनीकों का होगा प्रयोग
Tue, 13 Jan 2026 07:32 PM IST
अंकेश डोगरा
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Tue, 13 Jan 2026 07:32 PM IST
सार
हिमाचल की सड़कें टिकाऊ होंगी, कम से कम 10 साल तक खराब नहीं होंगी। ये जानकारी लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने दी। पढ़ें पूरी खबर...
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लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह (फाइल फोटो)।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के लिए दो आधुनिक और प्रभावी तकनीकों ‘सीमेंट ग्राउटेड बिटुमिनस मैकाडम (सीजीबीएम) और स्टेबलाइज्ड बेस लेयर तकनीक को परीक्षण के लिए चुना गया है। शुरुआत में इन तकनीकों का प्रयोग शोघी-मैहली सड़क पर किया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग राज्य में लगभग 35,000 किलोमीटर सड़कों का रखरखाव करता है और सड़क गुणवत्ता सुधारने तथा हर मौसम में संपर्क सुविधा सुचारु बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इस तकनीक से हिमाचल की सड़कें टिकाऊ होंगी, कम से कम 10 साल तक खराब नहीं होंगी। मंत्री ने यह जानकारी सचिवालय में मीडिया को दी। लोक निर्माण मंत्री ने कहा कि खराब मौसम और जलभराव के कारण राज्य की लगभग 20 फीसदी सड़कें बार-बार क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे बार-बार मरम्मत करनी पड़ती है। इससे रखरखाव की लागत बढ़ जाती है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए नई और टिकाऊ सड़क निर्माण तकनीकों को दीर्घकालीन उपाय के रूप में अपनाया जाएगा। केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान के साथ चर्चा के बाद शोघी-मेहली सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्सों पर इन तकनीकों से एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इन तकनीकों से सड़कें अधिक मजबूत होने के साथ-साथ भारी यातायात के लिए सक्षम होंगी। पानी से होने वाले नुकसान से भी बेहतर रूप से बचाव होगा, जिससे बार-बार मरम्मत की आवश्यकता नहीं होगी।
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कहा कि इन तकनीकों से बनीं सड़कों के करीब 10 साल तक खराब नहीं होने की उम्मीद है, जिससे रखरखाव खर्च कम होगा और लोगों को सुरक्षित व आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा। मंत्री ने यह भी कहा कि ये तकनीक पहले से ही देश के कई राज्यों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई), अन्य सरकारी योजनाओं और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा सफलतापूर्वक उपयोग की जा रही हैं। नई तकनीकों पर आधारित अधिकारियों ने एक प्रस्तुति भी दी गई। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को एक समिति गठित करने के निर्देश भी दिए हैं, जो वर्ष 2026-27 की वार्षिक रखरखाव योजना के तहत उन सड़कों की पहचान करेगी, जहां इन तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है।