सरहद पर बेटा शहीद, पिता ने कहा शहादत पर नाज
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भारत-पाकिस्तान सीमा पर बारामुल्ला के समीप सुरक्षा में तैनात मंडी जिला के टिहरा के नायब सुबेदार राजेश कुमार पठानिया मंगलवार को आंतकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद हो गया।
आंतकवादियों से लोहा लेते हुए राजेश कुमार गोलियों से बुरी तरह छलनी हो गया। राजेश के सिर पर गोली लगने से उसकी मौत हो गई। राजेश नायब सुबेदार के पद पर तैनात थे और छह माह पूर्व ही उनकी पदोन्नति हुई थी।
वर्तमान में उन्हें राष्ट्रीय राइफल में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया था। वह अपने पीछे बेटा व बेटी, पत्नि और माता-पिता छोड़ गए हैं। राजेश के शहीद होने की सूचना से क्षेत्र में माहौल शौक में बदल गया है।
वीरवार को सूचना मिलने पर राजेश के घर में खुशी का माहौल मातम में तबदील हो गया है। जानकारी के अनुसार सीमा सुरक्षा में तैनात सैनिक मंगलवार को सर्च आपेरशन में जुटे हुए थे। इस बीच आंतकवादियों ने हमला बोल दिया।
इस मुठभेड़ में एक आंतकवादी को भी सेना के जवानों ने मार गिराया है। लेकिन आंतकवादियों के साथ मुठभेड़ के दौरान राजेश को तीन-चार गोलियां लग गई। सिर पर लगी गोली से राजेश कुमार ने दम तोड़ दिया।
बेटा जरूर खोया, मगर शहादत पर नाज
राजेश कुमार 1988 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। उनके पिता रूप चंद पठानिया शिक्षा विभाग में टीजीटी पद से सेवानिवृत हुए हैं और मां गृहिणी हैं।
पिता रूप चंद पठानिया ने बताया कि राजेश बचपन से ही सेना में भर्ती होने के शौकीन थे और उनमें देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी हुई थी। उन्होंने बताया कि मैंने अपना बेटा जरूर खोया है, लेकिन देश की रक्षा के लिए बेटे की शहादत पर नाज है।
राजेश कुमार के शव का अंतिम संस्कार वीरवार को सैन्य सम्मान के साथ पैतृक गांव में होगा। राजेश के शहीद होने की सूचना से क्षेत्र में माहौल शौक में बदल गया है।