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आईजी समेत हिमाचल के चार पुलिस कर्मचारियों को पदक, रोचक हैं इनके किस्से
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Wed, 16 Aug 2017 12:11 PM IST
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हिमाचल प्रदेश पुलिस के एक आईजी और तीन अन्य पुलिस कर्मियों को 15 अगस्त पर राष्ट्रपति पुलिस पदक व सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक से नवाजा गया। सम्मानित होने वालों में आईजी हिमांशु मिश्रा के अलावा इंस्पेक्टर रामदेव, सब इंस्पेक्टर धरम सैन और हेड कांस्टेबल देवेंद्र सिंह शामिल हैं।
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चारों ही पुलिस अधिकारियों को पदक दिए गए। सराहनीय सेवा के लिए पुरस्कार पाने वाले हिमांशु मिश्रा वर्तमान में आईजी एपी एंड टी हैं। पुलिस ट्रेनिंग में जबरदस्त बदलाव के अलावा पुलिस के लिए होने वाली खरीद की कमेटी के चेयरमैन के रूप में पहली बार ब्रांडेड कंपनियों की वर्दी जवानों को मुहैया
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कराने के लिए पूरे विभाग में उनकी तारीफ हुई। इसके अलावा अपने सेवा काल के दौरान उन्होंने करीब सात साल यूएन मिशन के दौरान अफ्रीका, बोस्निया और अफगानिस्तान में भी अपनी सेवाएं दीं। वहीं, साल 1999 के सोलन के ब्लाइंड गैंगरेप का खुलासा और विजिलेंस में सेवा के दौरान स्वास्थ्य घोटाले की जांच कर तत्कालीन स्वास्थ्य सेवा निदेशक को सजा कराने का भी श्रेय इन्हीं को जाता है।
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इंस्पेक्टर रामदेव को राष्ट्रपति पुलिस पदक
मंडी में स्टेट विजिलेंस एंड एंटी क्रप्शन ब्यूरो में इंस्पेक्टर के पद पर तैनात रामदेव को राष्ट्रपति पुलिस मेडल से नवाजा गया। वह हिमाचल प्रदेश से एकमात्र पुलिस अधिकारी हैं जिन्हें इस पुरस्कार के लिए चयनित किया गया। केंद्र के गृह मंत्रालय ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देश के 93 पुलिस अधिकारियों के नाम की सूची जारी की गई थी।
जिन्हें इस पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। इसमें हिमाचल प्रदेश से सिर्फ इंस्पेक्टर रामदेव ही शामिल थे। राष्ट्रपति पदक मिलने पर रामदेव व उनके सहयोगियों में खुशी की लहर है। मूल रूप से कुल्लू जिला के धाओगी पंचायत के निहाई गांव के रहने वाले रामदेव ने 15 नवंबर 1984 को पुलिस विभाग में बतौर कांस्टेबल अपना कैरियर आरंभ किया था।
इसके बाद उन्होंने विभिन्न पदों पर रहते हुए अनेकों उपलब्धियां अर्जित की हैं। रामदेव को 2007 में प्रदेश सरकार से भी पुलिस मेडल मिल चुका है। उन्होंने एक बार डिजी डिस्क पाने के अलावा रिकॉर्ड 127 बार अपनी एसीआर में गुड (प्रशस्ती पत्र) पाया है। इंस्पेक्टर रामदेव ने बताया कि आने वाले समय में राजभवन में आयोजित होने वाली कार्यक्रम में उन्हें यह मेडल प्रदान किया जाएगा। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि के लिए उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन को श्रेय दिया है।
सब इंस्पेक्टर धर्म सेन नेगी
उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सब इंस्पेक्टर धर्म सेन नेगी को पुलिस पदक से सम्मानित किया गया। धर्म सेन नेगी मौजूदा समय में एसएचओ थाना छोटा शिमला में कार्यरत हैं। 1992 में पुलिस में कांस्टेबल के तौर पर भर्ती हुए थे। ट्रेनिंग के दौरान अपने बैच में बेस्ट आलराउंडर का खिताब दो बार अपने नाम कर चुके हैं।
सोलन में साल 2012 में हुए बहुचर्चित एजीएम (बीएसएनएल) ब्लाइंड मर्डर केस की गुत्थी सुलझाने में धर्म सेन नेगी का बड़ा योगदान है। कत्ल के आरोप में पकड़ी गई महिला को सजा भी हो चुकी है। इनकी गिनती पुलिस के तेज तर्रार पुलिस अधिकारी के तौर पर होती है।
इस साल थाना छोटा शिमला के तहत 40 केस एक्साइज और 19 केस ड्रग्स के पकड़ चुके हैं। इस साल अप्रैल महीने में थाना छोटा शिमला को बेस्ट थाने का अवार्ड भी मिला है। इससे पहले थाना कोटखाई में बतौर एसएचओ अपनी ड्यूटी बखूबी निभा चुके हैं। इसके अलावा कई अनसुलझे मामलों को सुलझाया है। ड्यूटी के दौरान कठोर अनुशासन के लिए इन्हें जाना जाता है।
हेड कांस्टेबल देवेंद्र सिंह
देवेंद्र सिंह मौजूदा समय में सीआईडी विंग में एडहाक में एएसआई के पद पर सेवा दे रहे हैं। 1996 में पुलिस फोर्स में बतौर कांस्टेबल भर्ती हुए थे। ड्यूटी के प्रति निष्ठा और ईमानदारी को देखते हुए साल 2014 में भी डीजी डिस्क अवार्ड से सम्मानित हो चुके हैं।
अब तक प्रदेश पुलिस मुख्यालय के अलावा जुब्बल और बालूगंज थाने में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इस दौरान जांच अफसर भी रहे। अपने सीनियरों के सान्धिय में हत्या और दुराचार के कई मामले सुलझाए। इसके अतिरिक्त अपने स्तर पर चोरी और सेंधमारी के कई मामले हल किए हैं। थाना बालूगंज में इनकी सेवाएं काफी सराहनीय रही हैं।
कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी भी देवेंद्र सिंह ने बखूबी निभाई है। अब तक के इनके बेहतरीन कार्यकाल को देखते हुए इन्हें उत्कृष्ट सेवाओं के लिए पुलिस पदक से सम्मानित किया जा रहा है।