शराब स्टोरेज के नाम पर बांट दिए करोड़ों रुपये, विजिलेंस जांच में नया खुलासा
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हिमाचल में कांग्रेस की पूर्व सरकार के कार्यकाल में गठित बीवरेजेस लि. कारपोरेशन में कथित धांधली की परतें अब विजिलेंस की जांच में उधड़नी शुरू हो गई हैं। अभी तक की जांच में इस बात के सुबूत विजिलेंस के हाथ लगे हैं जिनसे यह साबित हो रहा है कि फर्जीवाड़ा कर चुनिंदा लोगों को करोड़ों का लाभ पहुंचाया गया। विजिलेंस ब्यूरो फिलहाल मामले की जांच को आगे बढ़ा रहा है। प्रभावशाली लोगों तक भी इस जांच की आंच पहुंच सकती है।
वीरभद्र सिंह की पूर्व सरकार के कार्यकाल में शराब वितरण के लिए 2016 में बीवरेजेस लिमिटेड नाम की एक कारपोरेशन बनाया गया। कारपोरेशन ने कुछ फर्मों को शराब बॉटलिंग प्लांट से आने वाली खेप को स्टोर कर वितरित करने की जिम्मेदारी दी गई।
इस काम के लिए प्रति बोतल के हिसाब से उन्हें पैसा दिया जाना था। आरोप है कि इसमें सरकारी पैसे की खूब बंदरबांट की गई। कुछ ही समय में चुनिंदा लोग करोड़पति हो गए। सरकार बदली तो जयराम सरकार ने कारपोरेशन भंग कर इससे हुए वित्तीय घाटे की विजिलेंस जांच के आदेश दे दिए।
ब्यूरो की अब तक की जांच में कई ऐसी फर्में मिली हैं जिनके पास एक छोटा कमरा तक नहीं था। यही नहीं उनके पास रिकॉर्ड भी सही नहीं था, जिससे ये साबित हो सके कि किस समय शराब आई या उसे वितरित किया गया।
नाम न लिखने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि मामले में जांच चल रही है और अगले दो महीने में रिपोर्ट सरकार को सौंपी जा सकती है। बता दें कि प्रमुख सचिव विजिलेंस संजय कुंडू खुद इस मामले की समीक्षा कर अधिकारियों को जांच में तेजी लाने के निर्देश देते रहे हैं।
ऐसे चलता था लूटखसोट का खेल
सूत्रों की मानें तो अब तक की जांच में यह बात सामने आई है कि शराब सीधे प्लांट से आती और इसे स्टोर करने के बजाय वेंडर को सीधे सप्लाई कर दिया जाता। कागजों में उसे स्टोर किया गया दिखाया जाता और फिर सप्लाई भी कागजों में ही दिखा दी जाती। इसके बदले में बिना कोई मेहनत या भवन के उन्हें कारपोरेशन से हर बार प्रति बोतल के हिसाब से पैसा अदा कर दिया जाता।