हिमाचल में नए जिलों की कवायद तेज: सरकार ने बनाई चार सदस्यीय समिति, छह महीने में आएगी रिपोर्ट; जानें विस्तार से
हिमाचल प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव को लेकर सरकार ने चार सदस्यीय आयोग का गठन किया है। आयोग की अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी करेंगे। आयोग जिलों, उपमंडलों, तहसीलों, उपतहसीलों और विकास खंडों की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करेगा। उसे छह महीने के भीतर सरकार को रिपोर्ट देनी होगी। हालांकि, अभी नए जिले बनाने का कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
विस्तार
हिमाचल प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। प्रदेश सरकार ने जिलों और तहसीलों सहित अलग-अलग प्रशासनिक इकाइयों की समीक्षा करने के लिए चार सदस्यीय आयोग का गठन किया है। आयोग की अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी करेंगे। आयोग को छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी।
कौन-कौन होगा आयोग में शामिल?
सरकार की ओर से 14 अक्तूबर 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, सेवानिवृत्त न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी आयोग के अध्यक्ष होंगे। अधिवक्ता विशाल पंवार और भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी राजेश शर्मा को सदस्य बनाया गया है। भूमि अभिलेख विभाग के निदेशक आयोग के सदस्य सचिव होंगे।
जिलों और तहसीलों की व्यवस्था की होगी समीक्षा
आयोग प्रदेश में जिलों, उपमंडलों, तहसीलों, उपतहसीलों और विकास खंडों की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करेगा। यह देखा जाएगा कि कहां नई प्रशासनिक इकाई बनाने, मौजूदा इकाइयों को मिलाने या उनके बंटवारे की जरूरत है। इस दौरान जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति, लोगों को कार्यालयों तक पहुंचने में होने वाली परेशानी और प्रशासनिक कामकाज को ध्यान में रखा जाएगा। आयोग संबंधित विभागों और जनप्रतिनिधियों से भी सुझाव लेगा।
आयोग का मुख्यालय शिमला में होगा। सरकार की ओर से इसे जरूरी दस्तावेज, आंकड़े और अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। आयोग नई प्रशासनिक इकाइयां बनाने पर आने वाले खर्च और कर्मचारियों की जरूरत का भी आकलन करेगा। आयोग अपनी रिपोर्ट में सरकार को बताएगा कि प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को किस तरह बेहतर बनाया जा सकता है।
क्या हिमाचल में नए जिले बनेंगे?
फिलहाल सरकार की अधिसूचना में किसी नए जिले के गठन की घोषणा नहीं की गई है। अभी आयोग अलग-अलग प्रशासनिक इकाइयों की जरूरत की समीक्षा करेगा और अपनी सिफारिशें देगा। नए जिले बनाने या किसी अन्य प्रशासनिक बदलाव पर अंतिम फैसला सरकार की ओर से लिया जाएगा।