फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   50,000 penalty on agricultural university: Arrears put into FD instead of being paid; High Court takes serious

कृषि विवि को 50 हजार हर्जाना: एरियर की एफडी बनाई, भुगतान नहीं किया; हाईकोर्ट ने लिया कड़ा संज्ञान

Wed, 14 Oct 2026 07:03 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 14 Oct 2026 07:03 PM IST
सार

 प्रदेश हाईकोर्ट ने कृषि विवि पालमपुर की एक सेवानिवृत्त वैज्ञानिक के एरियर रोकने की मनमानी और वित्तीय लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है।  अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए विवि को 18,60,374 का एरियर 6 फीसदी ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया। 

विज्ञापन
50,000 penalty on agricultural university: Arrears put into FD instead of being paid; High Court takes serious
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कृषि विवि पालमपुर की एक सेवानिवृत्त वैज्ञानिक के एरियर रोकने की मनमानी और वित्तीय लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए विवि को 18,60,374 का एरियर 6 फीसदी ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया। इसके साथ ही याचिकाकर्ता को अकारण मुकदमेबाजी में घसीटने और रिटायर्ड कर्मचारी का हक मारने के लिए विवि को 50,000 रुपये हर्जाना देगा। न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की अदालत ने यह प्रक्रिया नौ नवंबर से पहले पूरी करने के आदेश दिए हैं। डाॅ. पूनम अगस्त 1991 में सहायक वैज्ञानिक के पद पर तैनात हुईं। जनवरी 2023 में ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटर रिसर्च प्रोजेक्ट ऑन एग्रोफॉरेस्ट्री में प्रधान वैज्ञानिक के पद से सेवानिवृत्त हुईं।

विज्ञापन
Trending Videos

प्रोजेक्ट में कार्यरत कर्मचारियों का 75 फीसदी वेतन/एरियर आईसीएआर (केंद्रीय कृषि वानिकी अनुसंधान संस्थान झांसी) और 25 फीसदी राज्य सरकार की ओर से वहन किया जाता है। मार्च 2023 में आईसीएआर ने विश्वविद्यालय के 6 कर्मचारियों के 7वें वेतन आयोग के बकाया के लिए 42,97,603 रुपये (इसमें डॉ. पूनम का 75 फीसदी हिस्सा 18,60,374 रुपये शामिल था) की राशि विवि को भेज दी। उच्च न्यायालय ने फैसले में स्पष्ट किया कि आईसीएआर की ओर से भेजा गया फंड स्पष्ट रूप से कर्मचारियों के बकाया एरियर के भुगतान के लिए ही जारी किया गया था। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब धनराशि किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए प्राप्त हुई थी, तो उसे उसी उद्देश्य के लिए उपयोग किया जाना अनिवार्य था। विश्वविद्यालय के पास इस राशि को अपने खाते में जमा करने या रोकने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था।

विज्ञापन
विज्ञापन

अदालत ने पाया कि विवि ने आईसीएआर से मिले रुपये को कर्मचारियों को देने के बजाय अपने सेंट्रलाइज्ड फंड स्कीम खाते में ट्रांसफर कर दिया और एफडी बना ली। विवि ने 29 अप्रैल 2023 को फंडिंग एजेंसी (आईसीएआर) को यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट भी जमा करा दिया, जिसमें यह प्रमाणित किया गया कि राशि का उपयोग कर लिया गया है, जबकि वास्तव में कर्मचारियों को एक रुपये का भी भुगतान नहीं किया गया। विवि की ओर से दलील दी गई कि वे राज्य सरकार की ओर से एरियर जारी करने के निर्देशों का इंतजार कर रहे थे। वहीं राज्य के वित्त विभाग ने कोर्ट में हलफनामा देकर इस तर्क को खारिज कर दिया। राज्य के वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि उसने आईसीएआर की ओर से जारी 75 फीसदी हिस्से के भुगतान पर कभी कोई रोक नहीं लगाई थी। राज्य का रुख केवल अपने 25 फीसदी हिस्से तक सीमित था। आईसीएआर की ओर से पहले ही जारी की जा चुकी राशि को राज्य सरकार के निर्देशों के नाम पर रोकना पूरी तरह तर्कहीन है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed