बागवानी विकास प्रोजेक्ट में जूनियर इंजीनियर के पदों पर भर्ती
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश में विश्व बैंक की वित्तीय मदद से चलाए जा रहे बागवानी विकास प्रोजेक्ट के तीन साल के काम का लक्ष्य पूरा हो गया है। विश्व बैंक की टीम 1134 करोड़ के प्रोजेक्ट की समीक्षा कर लौट गई है। टीम के सदस्यों को राज्य सरकार ने प्रोजेक्ट के अभी तक किए काम को लेकर पूरी तरह से संतुष्ट कर लौटाया है।
प्रोजेक्ट के फील्ड स्टाफ के रूप में कनिष्ठ अभियंताओं के 27 पद 30 नवंबर तक भरे जाएंगे। इन पदों को भरने के लिए 23 नवंबर को परीक्षा ली गई है। प्रोजेक्ट में फील्ड स्टाफ के सौ और पदों को तुरंत भरा जाना है। साल के भीतर बागवानों को 1.10 लाख हाई डेंसिटी फल पौधे देने का लक्ष्य रखा है।
प्रोजेक्ट निदेशक दिनेश मल्होत्रा के अनुसार विश्व बैंक की टीम बागवानी विकास प्रोजेक्ट के तहत किए कामों का जायजा लेकर लौट चुकी हैै। विश्व बैंक की टीम को राज्य सरकार ने प्रोजेक्ट के काम में तेजी लाने का भरोसा दिलाया है।
उन्होंने कहा कि फील्ड स्टाफ की तैनाती न होने के कारण प्रोजेक्ट के काम फील्ड में तेजी से नहीं हो रहे थे। जूनियर इंजीनियर हिप्पा में 10 से 12 दिसंबर तक प्रशिक्षण हासिल करेंगे। इसके तुरंत बाद उन्हें क्लस्टरों में तैनात किया जाएगा। इसके बाद से क्लस्टरों में सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन स्कीमें तैयार की जाएंगी। प्रोजेक्ट के तहत करीब 302 क्लस्टर तैयार किए गए हैं।
एक क्लस्टर में 10 से 30 हेक्टेयर जमीन शामिल की गई है। मल्होत्रा ने बताया कि प्रोजेक्ट में विश्व बैंक ने क्लस्टर बनाकर कार्य करने की शर्त रखी है। इन क्लस्टरों से जुड़े बागवानों को सामूहिक रूप में लाभ पहुंचाया जाएगा। बागवानों को एक साल में सेब सहित विभिन्न फलों के पौधे उपलब्ध कराए जाने हैं।