प्रदेश में कच्चे माल पर आधारित पर नौ क्लस्टर बनाए जाएंगे
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धर्मशाला में इन्वेस्टर मीट से हिमाचल में कच्चे माल पर आधारित नौ क्लस्टर बनेंगे। इन्वेस्टर मीट के माध्यम से उद्योग स्थापित करने को क्लस्टर बनाने की कवायद शुरू हो गई है। प्रदेश में कच्चे माल की उपलब्धता पर जिलों में अलग-अलग क्लस्टर तैयार होंगे। ये फूड प्रोसेसिंग, हस्तशिल्प, इंजीनियरिंग, चाय प्रोसेसिंग, फार्मा, सूचना प्रौद्योगिकी क्लस्टर प्रमुख रहेंगे।
सरकार इन्वेस्टर मीट से पहले विभिन्न उद्योगों को स्थापित करने के लिए बाकायदा क्लस्टर तैयार कर रही है। राज्य के विभिन्न जिलों में कच्चा माल और कामगारों की उपलब्धता को देखते हुए जिलों में क्लस्टर बनाने की प्रक्रिया जोरों पर है। इसके लिए केंद्र सरकार की मान्यता प्राप्त एजेंसियों की सेवाएं ली जा रही हैं। ये एजेंसी तय करेंगी कि किस जिले में किस प्रकार के उद्योगों को बढ़ावा दिया जा सकता है। इन उद्योगों से स्थानीय लोगों खासकर कामगारों को कैसे अधिक से अधिक आर्थिक लाभ दिला सकते हैं।
फूड प्रोसेसिंग क्लस्टर
प्रदेश के जिन जिलों में फल और सब्जी उत्पादन से किसान और बागवान जुड़े हैं, वहां फूड प्रोसेसिंग क्लस्टर तैयार किए जा रहे हैं। फूड प्रोसेसिंग क्लस्टर में जिलों में उत्पादित फलों और सब्जियों को डिब्बा बंद करके देश विदेश के बाजार में बेचा जाना है।
हस्तशिल्प क्लस्टर
जिला चंबा और कुल्लू में हस्तशिल्प क्लस्टर बनाया जाना है। इन जिलों में दस्तकारी को बढ़ाव देकर लोगों को वित्तीय लाभ पहुंचाया जाएगा। इस क्लस्टर में कुल्लू शाल और चंबा रुमाल को देश विदेश के बाजार तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
इंजीनियरिंग कलस्टर
राज्य में तकनीकी शिक्षा क्षेत्र की श्रम शक्ति का इस्तेमाल करने के लिए इंजीनियरिंग क्लस्टर बनेगा। इस क्षेत्र में इंजीनियरिंग और अन्य तकनीकी शिक्षा प्राप्त युवाओं को रोजगार देने की कवायद की जा रही है। इंजीनियरिंग क्लस्टर उन जिलों में बनेगा, जहां कच्चा माल अपेक्षाकृत सस्ता पड़ता।
फार्मा क्लस्टर
प्रदेश में पुराने फार्मा उद्योगों का विस्तार करने के लिए संभावनाएं तलाशी जा रही हैं और जिलों में नए फार्मा उद्योग का क्लस्टर भी तैयार होगा।
सूचना प्रौद्योगिकी क्लस्टर
सूचना प्रौद्योगिकी क्लस्टर में आईटी कंपनियों को आकर्षित करने के लिए जिला सोलन और शिमला में आईटी क्लस्टर बनाए जाएंगे। आईटी के लिए अन्य जिलों में भी संभावनाएं देखी जा रही हैं।