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राजकीय अध्यापक संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान को कारण बताओ नोटिस

Thu, 08 Jul 2021 02:18 AM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Thu, 08 Jul 2021 02:18 AM IST
सार

शिक्षा निदेशक ने कहा कि सरकार के फैसलों की अवहेलना कर टिप्पणी देना अनपेक्षित है। इससे पूर्व भी वीरेंद्र चौहान को दसवीं और 12वीं कक्षा की प्री बोर्ड परीक्षाएं करवाने के फैसले का विरोध करने पर कारण बताओ नोटिस जारी हुआ था।

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 himachal pradesh director higher education notice to rajkiya adhyapak sangh adhyaksh virender chauhan
जकीय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सरकार के फैसले पर आपत्ति जताने को लेकर राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान को कारण बताओ नोटिस जारी हुआ है। उन्होंने बीते दिनों 10वीं और 12वीं कक्षा के अंक निर्धारण के लिए तय फार्मूले पर सवाल उठाए थे। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने वीरेंद्र चौहान को नोटिस जारी कर सात दिन में स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा है। 

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शिक्षा निदेशक ने कहा कि सरकार के फैसलों की अवहेलना कर टिप्पणी देना अनपेक्षित है। इससे पूर्व भी वीरेंद्र चौहान को दसवीं और 12वीं कक्षा की प्री बोर्ड परीक्षाएं करवाने के फैसले का विरोध करने पर कारण बताओ नोटिस जारी हुआ था। मामले की जांच अभी जारी है। इसी बीच, दूसरा कारण बताओ नोटिस जारी हो गया है।
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नोटिस में कहा है कि राजकीय अध्यापक संघ के अध्यक्ष और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रझाना जिला शिमला में अर्थशास्त्र के प्रवक्ता वीरेंद्र चौहान ने सरकार और शिक्षा बोर्ड की ओर से 10वीं व 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम का क्राइटेरिया बनाने में बहुत खामियां होने और बोर्ड कक्षाओं के रिजल्ट के लिए तैयार किए गए फार्मूले पर सवाल उठाए हैं। निदेशक ने कहा कि वीरेंद्र ने आरोप लगाया है कि बोर्ड ने बच्चों के भविष्य के लिए होने वाले इतने बड़े निर्णय को लेकर कोई अभ्यास नहीं किया। पंजीकृत शिक्षक संघों, शिक्षाविदों और अभिभावकों से मंत्रणा करना भी उचित नहीं समझा। 
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संशोधन की मांग करना कोई गलत नहीं
राजकीय अध्यापक संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा कि अंक निर्धारण के क्राइटेरिया पर सरकार को सुझाव देना क्या गुनाह हो गया है। यदि 10वीं और 12वीं में हिंदी और अंग्रेजी का जो पेपर बोर्ड का हुआ है। यदि उसमें बच्चे ने जो मार्क्स लिए हैं और यदि वह मार्क्स क्राइटेरिया में जो बच्चों को मार्क्स दिए जा रहे हैं, उससे ज्यादा हैं तो क्या उस बच्चे को वार्षिक परीक्षा में अर्जित मार्क्स नहीं मिलने चाहिए थे।


ऐसे क्राइटेरिया पर सवाल उठाना या उसमें संशोधन की मांग करना क्या कोई गलत बात है। संघ का प्रदेश अध्यक्ष किसी के दबाव में आकर शिक्षक एवं शिक्षार्थी हित में अपनी बात रखना बंद कर दे, यह नहीं हो सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से भी मामले पर संज्ञान लेने की मांग की है।

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