अध्ययन में खुलासा: हिमाचल में तेजी से बढ़ रहा कैंसर, सालाना 16 हजार नए मरीज, राष्ट्रीय औसत से अधिक
हिमाचल प्रदेश के अस्पतालों में सालाना करीब 16 हजार नए कैंसर मरीज सामने आ रहे हैं। इनमें आंत के कैंसर के मामले सबसे अधिक हैं। इसके बाद स्तन और ओरल कैंसर के मरीजों की संख्या अधिक है।अध्ययन के अनुसार 58 से 67 वर्ष की उम्र के लोगों में कैंसर के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं।
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रेफरल सुविधाओं में पहले की अपेक्षा सुधार
हालांकि, प्रदेश में जांच और रेफरल सुविधाओं में पहले की अपेक्षा सुधार हुआ है। इससे दूरदराज के क्षेत्रों के लोग भी अब जांच और उपचार के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। आईजीएमसी शिमला के टर्शरी कैंसर सेंटर में आने वाले मरीजों को लेकर कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के चिकित्सकों ने पिछले वर्षों के आंकड़ों पर अध्ययन किया है। यह शोध जून 2026 में मेडलेटर जर्नल में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन के अनुसार 58 से 67 वर्ष की उम्र के लोगों में कैंसर के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं। वहीं, 38 से 57 वर्ष की मध्यम आयु वर्ग की महिलाओं में भी कैंसर का जोखिम बढ़ रहा है।
ये हैं बड़े कारण
रेड मीट और असंतुलित खान-पान से आंत के कैंसर का खतरा बढ़ रहा है। सेब के बगीचों और सब्जियों में कीटनाशकों व रासायनिक खादों के अत्यधिक इस्तेमाल से खाद्य पदार्थों और पानी पर भी असर पड़ने की आशंका है। बीड़ी, सिगरेट और हुक्के का सेवन पुरुषों में फेफड़ों और गले के कैंसर का प्रमुख जोखिम कारक है। वायु प्रदूषण और बदलती जीवनशैली भी कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी की वजह बन रहे हैं।
ऐसे करें बचाव
विशेषज्ञों के अनुसार कैंसर का समय पर पता चलने पर उपचार अधिक प्रभावी हो सकता है। 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित जांच और मैमोग्राफी करवाने की सलाह दी गई है। वहीं, पुरुषों को शरीर में किसी असामान्य गांठ, लंबे समय तक रहने वाले लक्षण या अन्य बदलाव होने पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। संतुलित जीवनशैली, धूम्रपान से दूरी और रेड मीट का सीमित सेवन भी जोखिम कम करने में मदद कर सकता है।
प्रदेश में सालाना करीब 16 हजार नए कैंसर मरीज सामने आते हैं। इनमें आंत के कैंसर के मरीज सबसे अधिक हैं। प्रदेश में आने वाले कुल मरीजों में करीब आधे ही अपना उपचार यहीं करवाते हैं, जबकि अन्य बाहरी राज्यों का रुख करते हैं। प्रदेश में भी कैंसर के अत्याधुनिक उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हैं। रेड मीट का अधिक सेवन और धूम्रपान कैंसर के प्रमुख जोखिम कारक हैं, इसलिए इनसे बचाव जरूरी है। -डॉ. मनीष गुप्ता, विभागाध्यक्ष टर्शरी कैंसर सेंटर शिमला।