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बजट पर चर्चा आज, सदन में इन मुद्दों पर हंगामे के आसार
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Updated Mon, 12 Mar 2018 01:42 PM IST
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विधानसभा सत्र में बजट पर चर्चा के दौरान विपक्ष बढ़ते कर्ज और रोजगार सहित कई मुद्दों पर हंगामा कर सकता है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के बीते शुक्रवार को बजट पेश करने के दो दिन बाद दोबारा सत्र चलेगा। बजट चर्चा में आय संसाधन बढ़ाने के साथ रोजगार सहित पुरानी पेंशन योजना पर अनिर्णय की स्थिति का मुद्दा भी गर्मा सकता है। सत्र से पहले भाजपा और कांग्रेस के विधायक दल रणनीति तैयार करेंगे।
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बजट सत्र के दौरान आक्रामक दिख रहे विपक्ष के तेवर अब ओर कड़े होने की आशंका है। पहले दो दिन वाकआउट और तीसरे दिन सांकेतिक वाकआउट कर विरोध जता चुका विपक्ष केवल मुख्यमंत्री के बजट पेश करने के दौरान ही शांत रहा है। बजट के बाद विपक्ष की बयानबाजी से साफ है कि आने वाले दिनों में सदन में खूब हंगामा बरपेगा।
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कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री साफ कर चुके हैं कि बजट में कुछ भी खास नहीं है। बढ़ते कर्ज, आय साधन बढ़ाने, बेरोजगारी भत्ते जैसे मुद्दों पर सरकार का मौन रुख विपक्ष को अखरा है। हालांकि, सत्ता पक्ष भी पहले दिन होमवर्क कर पहुंचेगा। आर्थिक फ्रंट पर विपक्ष को जवाब देने के साथ दूसरे मुद्दों पर विपक्ष को पलटवार करने की तैयारी की गई है।
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दोपहर से शुरू होगा सत्र, आएंगे दो प्रस्ताव
बजट सत्र सोमवार को दोपहर दो बजे से शुरू होगा। सत्र में बजट पर चर्चा होनी है, जिसमें दोनों ओर से वार और पलटवार होना तय है। इसके अलावा सदन में हिमाचल प्रदेश सहकारी परिषद में सदस्यों और अलावा प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय के बोर्ड सदस्यों के मनोनयन का प्रस्ताव लाया जाएगा।
बेरोजगारी भत्ते पर जयराम सरकार को घेरेगी कांग्रेस
कांग्रेस विधायक सोमवार को विधानसभा में सत्ता पक्ष को बेरोजगारी भत्ते पर घेरेंगे। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के बजट भाषण में बेरोजगारी भत्ते को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। बजट भाषण में युवाओं को कौशल विकास भत्ता देने की बात कही गई है। पूर्व कांग्रेस सरकार ने अपने अंतिम बजट में युवाओं के लिए बेरोजगारी भत्ता देने की घोषणा की थी। इसमें युवाओं को 1000 से 1500 रुपये बेरोजगार भत्ता दिया गया है।
लेकिन जयराम ठाकुर के बजट में बेरोजगारी भत्ते का कोई जिक्र न होने से कांग्रेस विधायकों ने बजट के दिन भी इसका विरोध किया। जयराम ने अपने बजट भाषण में अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, दिव्यांग, एकल महिला विधवा को रोजगार दिलाने के लिए कौशल प्रशिक्षण कराए जाने की बात कही है। इसमें पारिवारिक आय 3 लाख वार्षिक से कम होने की बात कही गई है।
हिमाचल विश्वविद्यालय के माध्यम से प्रशिक्षण एवं निशुल्क कोचिंग दिलाई जाएगी। सीएम ने कहा कि दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना को 77 करोड़ की लागत से लागू करने को कहा है।
इसमें 65 हजार युवाओं को कौशल प्रदान कर रोजगार दिलाएगी। जयराम ने अपने बजट भाषण में उल्लेख किया है कि पूर्व सरकार ने चुनावी घोषणापत्र में कहा था कि वे हिमाचल के सभी बेरोजगार युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देंगे। लेकिन यह घोषणा पूरी करने में विफ ल रही। यह भत्ता केवल 21000 युवाओं को आखिरी तीन महीनों में दिया गया था।
बंदरों से निपटने को बजट में कोई प्रावधान नहीं
जयराम सरकार ने बीते 9 मार्च को पेश किए बजट में किसानों की आय को 2022 तक दोगुना करने और किसानों-बागवानों के लिए कई योजनाएं और परियोजनाएं घोषित की हैं लेकिन बंदरों से फसलों को बचाने के लिए कोई प्रावधान नहीं किया। दरअसल, किसान संगठनों की मानें तो कई हजार किसान-बागवान बंदरों की वजह से किसानी-बागवानी छोड़ चुके हैं। हजारों हेक्टेयर उपजाऊ भूमि बंजर होती जा रही है।
पिछले करीब बारह साल में तकरीबन हर विधानसभा सत्र के दौरान बंदरों से निपटने को लेकर सभी राजनीतिक दलों के किसी न किसी विधायक ने मुद्दा उठाया और सरकार ने हर बार आश्वासन दिया है। पिछले तीन चुनावों में भी बंदरों का आतंक एक अहम मुद्दा रहा है। यही कारण रहा कि चाहे भाजपा हो या फिर कांग्रेस, दोनों ही दलों ने सरकार में आने के बाद बंदरों के आतंक से निपटने के लिए हर साल के वित्तीय बजट में प्रावधान जरूर किया।
लेकिन जयराम सरकार ने बंदरों से निपटने को लेकर कोई ठोस रणनीति ही नहीं रखी है। यह तब है, जब 8 मार्च को बंदरों के आतंक को लेकर कांग्रेस विधायक अनिरुद्ध सिंह चर्चा प्रस्ताव लेकर आए और दोनों ही दलों के विधायकों ने इसमें भाग लिया। सोमवार को विधानसभा सत्र के दौरान जब बजट चर्चा शुरू होगी तो देखना यह होगा कि सरकार बंदरों की समस्या से निपटने और किसानों की आय दोगुना करने के विषय पर क्या तथ्य पेश करती है।