69 एनएच की डीपीआर के लिए इसी माह नियुक्त होंगे कंसलटेंट, नई सड़कों का निर्माण होगा
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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल के 69 एनएच की डीपीआर बनाने के लिए इसी महीने कंसलटेंट नियुक्ति किए जाएंगे। केंद्र सरकार ने वर्ष 2016 में एनएच की घोषणा की थी लेकिन डीपीआर के लिए सलाहकारों की नियुक्ति न होने से यह मामला लटका हुआ है।
मुख्यमंत्री ने बजट भाषण में कहा कि 9,040 करोड़ की लागत से फोरलेन बनाने का कार्य दो राष्ट्रीय राजमार्गों परवाणू से शिमला, कीरतपूर से मनाली निर्माणाधीन है। हाल ही में भारत सरकार ने 3 अन्य एनएच बद्दी से नालागढ़, पठानकोट से मंडी और शिमला मटोर को एनएचआई को सौंप दिया है।
बद्दी से नालागढ़, चक्की से सिहुनी और ज्वालामुखी से कांगड़ा को फोरलेन बनाने के लिए भी निविदाएं आमंत्रित की गई हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में तृतीय पक्ष निरीक्षण प्रणाली आरंभ होगी। मुख्यमंत्री कार्यालय के अधीन एक स्वतंत्र गुणवत्ता परीक्षण स्क्वैड का गठन किया जाएगा।
जो सभी निर्माण कार्य का औचक निरीक्षण कर रिपोर्ट सीएम कार्यालय को भेजेगा। उन्होंने बजट भाषण में कहा कि टारिंग का लक्ष्य 1785 से बढ़ाकर 2500 किलोमीटर किया गया है।
प्रदेश में 600 किमी सड़कें, 35 नए पुल बनेंगे
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि वर्ष 2018-19 में हिमाचल में 600 किलोमीटर नई सड़कें और 35 पुलों का निर्माण होगा। इसके अलावा 1100 किलोमीटर सड़कों को पक्का किया जाएगा।
हिमाचल में रोड इंप्रूवमेंट स्कीम के तहत सड़कों में क्रास नालियों का निर्माण होगा। इससे सड़कों की टारिंग उखड़ने का सिलसिला रोका जाएगा। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि जलोड़ी दर्रे से नीचे सैज-लूहरी-औट मार्ग पर सुरंग निर्माण का मामला केंद्र के उठाया गया है।
सुरंग बनने से कई किलोमीटर दूरी कम होगी। साच जलोड़ी, खड़ा पत्थर और सीमा सड़क संगठन की अनुमति से रोहतांग दर्रे को सर्दियों में खुला रखने के लिए अंतररार्ष्ट्रीय निविदाएं आमंत्रित होंगी।
स्टेट रोड प्रोजेक्ट से बनेगी 650 किलोमीटर सड़कें
सीएम ने कहा, स्टेट रोड प्रोजेक्ट के तहत 650 किलोमीटर सड़कों का निर्माण, 1350 किमी सड़कों का रखरखाव किया जाएगा। केंद्र के वित्त मंत्रालय से 720 करोड़ की राशि को अनुमोदन प्राप्त कर लिया है। हिमाचल के 697 दुर्घटना स्थलों पर रेलिंग और साइन बोर्ड लगेंगे।
पीपीपी मोड़ पर होंगे विकास कार्य
हिमाचल के नगर निकायों में पीपीपी मोड पर विकास कार्य किया जाएगा। इससे निकायों की आय में बढ़ोतरी होगी। बस अड्डों और पुलों, सुरंगों का निर्माण भी पीपीपी मोड पर किए जाने का प्रयास किया जाएगा।