फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal News: Third party medical report will not given in RTI

आरटीआई में नहीं मिलेगी थर्ड पार्टी की मेडिकल रिपोर्ट

Fri, 16 Apr 2021 12:51 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Fri, 16 Apr 2021 12:51 PM IST
सार

व्यापक जनहित नहीं तो थर्ड पार्टी की मेडिकल रिपोर्ट और इससे संबंधित जानकारी आरटीआई एक्ट के तहत सार्वजनिक नहीं होगी। डॉक्टर और मरीज से संबंधित ऐसी जानकारी को राज्य सूचना आयोग ने गोपनीय की श्रेणी में रखा है। आयोग ने कहा कि ऐसे मामलों में आरटीआई एक्ट 2005 निजता के व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा करता है। राज्य मुख्य सूचना आयुक्त नरेंद्र चौहान ने आईजीएमसी की प्रथम अपीलीय अथारिटी डॉ. रजनीश पठानिया के फैसले को सही ठहराया।

विज्ञापन
Himachal News: Third party medical report will not given in RTI
आरटीआई एक्ट 2005 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

व्यापक जनहित नहीं तो थर्ड पार्टी की मेडिकल रिपोर्ट और इससे संबंधित जानकारी आरटीआई एक्ट के तहत सार्वजनिक नहीं होगी। डॉक्टर और मरीज से संबंधित ऐसी जानकारी को राज्य सूचना आयोग ने गोपनीय की श्रेणी में रखा है। आयोग ने कहा कि ऐसे मामलों में आरटीआई एक्ट 2005 निजता के व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा करता है। राज्य मुख्य सूचना आयुक्त नरेंद्र चौहान ने आईजीएमसी की प्रथम अपीलीय अथारिटी डॉ. रजनीश पठानिया के फैसले को सही ठहराया।

विज्ञापन


आयोग ने अपीलकर्ता डॉ. पवन कुमार बंटा बनाम आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक की अपील पर यह फैसला सुनाया है। बंटा ने एक व्यक्ति को जारी फिटनेस प्रमाणपत्र से संबंधित सूचना मांगी। यह सूचना एसपी शिमला की जांच रिपोर्ट के साथ चिकित्सकों की तीन सदस्यीय कमेटी की इंटरनल नोटिंग्स के बारे में मांगी गई।
विज्ञापन


जांच रिपोर्ट के अनुसार इस व्यक्ति की मेडिकल रिपोर्ट सही है। इसमें कोई फर्जीवाड़ा नहीं है। आरटीआई एक्ट 2005 की धारा 8 के तहत निजता के व्यक्तिगत अधिकार की रक्षा करता है, जहां डॉक्टर और मरीज जैसे जिम्मेवारी वाले संबंध हों। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की नैतिकता संहिता के विनियम -5 के अनुसार भी मरीज की गोपनीयता की रक्षा की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


जनसूचना अधिकारी, उपचार कर रहे डाक्टर और प्रशासक भी मरीजों की स्वास्थ्य सुरक्षा से संबंधित जानकारी को सार्वजनिक नहीं कर सकते हैं। आरटीआई एक्ट की धारा 8(1)(जे) के अनुसार अगर व्यक्तिगत सूचना में व्यापक जनहित नहीं है और यह किसी की निजता को अनचाहे तरीके से नुकसान पहुंचा रहा हो तो इसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed