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Himachal News: स्कूलों में कौन सा अध्यापक कौन से गैर शिक्षण कार्य करेगा, जारी हुए नए दिशा-निर्देश

Fri, 08 May 2026 02:35 PM IST
Ankesh Dogra न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Ankesh Dogra Updated Fri, 08 May 2026 02:35 PM IST
सार

हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में गैर शिक्षण कार्यों को स्कूल शिक्षा निदेशालय ने बांट दिया है। यह फैसला शिक्षकों के बीच लंबे समय से चले आ रहे कार्यभार के असमान बंटवारे की शिकायतों के बाद लिया गया है। पढ़ें पूरी खबर...

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Himachal News: New Guidelines Issued — Which Teacher Will Perform Which Non-Teaching Duties in Schools
शिक्षा विभाग हिमाचल प्रदेश। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों पर डाले जाने वाले गैर-शैक्षणिक कार्यों को लेकर शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। शिक्षा निदेशालय ने सभी उपनिदेशकों और स्कूल मुखियाओं को निर्देश जारी करते हुए स्कूलों में विभिन्न गैर-शैक्षणिक कार्यों और चार्ज का समान एवं व्यवस्थित वितरण सुनिश्चित करने को कहा है। इसके लिए विस्तृत मॉडल गाइडलाइन भी जारी की गई है, जिसमें यह तय किया गया है कि कौन-सा कार्य किस श्रेणी के शिक्षक या कर्मचारी को सौंपा जाएगा।

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नई व्यवस्था के तहत छात्रवृत्ति, परीक्षा कार्य, एनएसएस, एनसीसी, खेलकूद, लाइब्रेरी, डिजिटल लाइब्रेरी, ईको क्लब, समग्र शिक्षा, स्काउट एंड गाइड्स, आपदा प्रबंधन, यू-डाइस, रोबोटिक्स लैब और अटल टिंकरिंग लैब जैसे कार्यों का विषयवार बंटवारा किया गया है।

शिक्षा विभाग के अनुसार यह गाइडलाइन फिलहाल मॉडल व्यवस्था के तौर पर लागू होगी, लेकिन स्कूल प्रमुखों को इसे प्राथमिकता से लागू करने को कहा गया है। हालांकि प्रधानाचार्य और मुख्याध्यापक आवश्यकता अनुसार इसमें बदलाव भी कर सकेंगे।
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सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी शिक्षक को दो से अधिक गैर-शैक्षणिक चार्ज नहीं दिए जाएंगे। वहीं 10 से कम शिक्षकों वाले स्कूलों में जरूरत पड़ने पर अपवाद रखा गया है।

गाइडलाइन में विज्ञान और गणित विषय पढ़ाने वाले टीजीटी शिक्षकों को कम गैर-शैक्षणिक कार्य देने की भी सिफारिश की गई है, ताकि उनका अधिक समय पढ़ाई में लग सके। विभाग ने कहा है कि जहां तक संभव हो टीजीटी मेडिकल और नॉन-मेडिकल शिक्षकों को अतिरिक्त जिम्मेदारियों से राहत दी जाए।
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नई सूची के अनुसार छात्रवृत्ति का कार्य इतिहास प्रवक्ता या टीजीटी आर्ट्स को, जबकि परीक्षा कार्य गणित, अर्थशास्त्र या हिंदी विषय के शिक्षकों को सौंपा जाएगा। ईको क्लब की जिम्मेदारी जीवविज्ञान या मेडिकल स्ट्रीम के शिक्षकों को मिलेगी। वहीं खेलकूद का कार्य डीपीई या पीईटी को सौंपने का प्रावधान किया गया है।

डिजिटल लाइब्रेरी और आईसीटी से जुड़े कार्य कंप्यूटर साइंस या आईटी शिक्षकों को दिए जाएंगे। स्काउट एंड गाइड्स का जिम्मा डीपीई, पीईटी, सीएंडवी अथवा शास्त्री शिक्षकों को सौंपा गया है।

शिक्षा विभाग ने यह भी कहा है कि 500 मीटर के दायरे में स्थित सह-स्थित स्कूलों में प्राथमिक स्कूलों के कार्य भी उसी संस्थान के शिक्षकों द्वारा देखे जाएंगे, ताकि कार्यों का दोहराव न हो और व्यवस्था सुचारू रह सके।
 

शिक्षा जगत में इस फैसले को शिक्षकों पर बढ़ते गैर-शैक्षणिक दबाव को संतुलित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। कई शिक्षकों का कहना है कि अब कार्यों का स्पष्ट बंटवारा होने से मनमाने तरीके से जिम्मेदारियां देने पर रोक लगेगी और पढ़ाई पर अधिक ध्यान दिया जा सकेगा।
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