एंट्री टैक्स विवाद: 7.5 टन तक की गाड़ियों का प्रवेश फ्री करने का आश्वासन, प्रदर्शन टाला
ऑल हिमाचल प्रदेश टैक्सी ऑपरेटर एवं ड्राइवर वेलफेयर एसोसिएशन ने सीएम से मिलने के बाद धरना टाल दिया है।
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हिमाचल प्रदेश में एंट्री टैक्स को लेकर टैक्सी ऑपरेटरों और प्रशासन के बीच चल रहे विवाद में बड़ी राहत मिली है। ऑल हिमाचल प्रदेश टैक्सी ऑपरेटर एवं ड्राइवर वेलफेयर एसोसिएशन ने सीएम से मिलने के बाद धरना टाल दिया है। चेतावनी दी गई थी कि यदि तय समयसीमा तक समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो प्रदेशभर के 33 एंट्री बैरियरों पर 132 यूनियनों के साथ धरना-प्रदर्शन किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर बॉर्डर भी सील कर दिए जाएंगे।
हालांकि, सीएम के साथ हुई बैठक के बाद टैक्सी ऑपरेटरों ने धरना-प्रदर्शन का विचार फिलहाल टाल दिया। एसोसिएशन के अध्यक्ष राम रतन ने कहा कि हम बुधवार को सीएम से मिले। उन्होंने सभी मांगे पूरी कर दी हैं। तय हुआ कि ऐसी गाड़ियां जिनका कुल भार साढ़े सात टन तक है, अब एंट्री पूरी तरह फ्री होंगी। इसके ऊपर नई दरों के अनुसार अन्य शुल्क लागू रहेंगे। दावा किया कि यह निर्णय ट्रांसपोर्टरों के लिए राहत भरा है। दूसरी ओर जेपी परिवहन सभा के पूर्व महासचिव दौलत सिंह ठाकुर ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि यह टैक्स पूरी तरह बंद किया जाए। उन्होंने कहा कि एक अप्रैल से टैक्स बढ़ाया गया है, जिससे बाहरी राज्यों के लोग और हिमाचल के ट्रक ऑपरेटर प्रभावित हो रहे हैं।
बताया कि वाहन चालक गरामोड़, बलोह, कुराली और बझेड़ी पर भारी भरकम टोल टैक्स अदा करते हैं। इसके बावजूद हिमाचल प्रवेश पर टैक्स लेना सही नहीं है। यदि यह टैक्स बंद किया जाता है तो हिमाचल के पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और आम लोगों को सीधे लाभ होगा। उन्होंने कहा कि तीन सीमेंट कारखानों के करीब 12 हजार से अधिक ट्रक हर दिन हिमाचल में आते-जाते हैं। हिमाचल के ट्रक अन्य राज्यों में भी जाते हैं, लेकिन वहां प्रवेश शुल्क नहीं लिया जाता। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को एंट्री टैक्स पूरी तरह बंद करना चाहिए। इस टैक्स के कारण बाहरी राज्यों के अलावा हिमाचल के ट्रक ऑपरेटर और स्थानीय लोग भी परेशान हैं।