Himachal News: छह साल में हांफ गईं ई-बसें, निगम को नहीं मिल रहे कलपुर्जे; बसों की बैटरियां हो रहीं खराब
राजधानी शिमला में करोड़ों रुपये की ई- बसें धूल फांक रही हैं। करोड़ों रुपये की इन बसों की रिपेयर नहीं हो पा रही है। हालत यह हैं कि कई बसों की बैटरी खराब है तो कई में तकनीकी खराबी आई है। पढ़ें पूरी खबर...
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एचआरटीसी की कार्यशालाओं में करोड़ों रुपये की इलेक्ट्रिक बसें जंग खा रही हैं। राजधानी शिमला में जहां प्रदेश सरकार के वित्तपोषण से चल रहे एचआरटीसी का प्रबंधन बैठता है, वहां करोड़ों रुपये की ई- बसें धूल फांक रही हैं। ढली स्थित एचआरटीसी की वर्कशॉप में ही नहीं बल्कि संजौली बाईपास के किनारे वर्षों से यह बसें खड़ी हैं। हिमाचल प्रदेश में पहली बार वर्ष 2018-19 में निगम के बेड़े में 50 नई बसें जोड़ी गईं, इनमें से 22 बसें खराब हैं।
वर्ष 2020 में इन बसों ने जवाब देना शुरू कर दिया। करोड़ों रुपये की इन बसों की रिपेयर नहीं हो पा रही है। निगम के पास इन बसों को ठीक करने के लिए कलपुर्जे नहीं हैं। चीन की कंपनी की इन बसों को ठीक करने के लिए निगम के पास पर्याप्त स्टाफ नहीं है। हालत यह है कि कई बसों की बैटरी खराब है तो कई में तकनीकी खराबी आई है। वर्कशॉप में खड़ी बसों के कलपुर्जे निकालकर दूसरी बसों में डाले जा रहे हैं। परिवहन निगम ने जब इन्हें खरीदा था, उस समय अधिकारियों ने करार के दौरान मरम्मत का वार्षिक क्लॉज नहीं डाला। अब करोड़ों की यह बसें जगह-जगह सड़क पर खड़ी हैं।
ई-बसों की बैटरी की कीमत 15 लाख से ज्यादा है। इसके अलावा इन बसों के पुर्जे भी महंगे हैं। देश के किसी भी राज्य में बसों की बैटरियां नहीं मिल रही हैं। चीन से ही इन बसों का मरम्मत का सामान मंगवाना पड़ता है। सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को भी बढ़ावा दे रही है। इस वर्ष अप्रैल तक एचआरटीसी के बेड़े में लगभग 297 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल होने जा रही हैं।