हिमाचल में राम राज, सीएम के बाद अब मंत्रिमंडल के गठन पर माथापच्ची
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भाजपा के लिए जितना कठिन सूबे के नए मुख्यमंत्री का नाम तय करना था, उससे कहीं ज्यादा मंत्रियों के नाम तय करना दिखाई दे रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सूबे के कुल 68 विधायकों में से भाजपा के 44 विधायक हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को हटा भी दें तो भी 43 विधायक हैं जिनमें एक ओर जहां प्रधानमंत्री मोदी के युवा भारत का सपना लिए 23 वह विधायक हैं जो पहली बार विधानसभा पहुंचे हैं।
वहीं कई पूर्व मंत्री व दिग्गज हैं जिन्होंने चुनाव में जीत हासिल की है। ऐसे में संगठन के लिए दिग्गजों और युवाओं के साथ साथ जातीय व क्षेत्रीय समीकरण को साधना बड़ी चनौती बन गया है। सूबे को नया मुख्यमंत्री मिलने के साथ ही अब मंत्रियों की सूची को लेकर भाजपा में माथापच्ची शुरू हो गई है।
एक दो विधायकों को छोड़ दें तो जयराम के मुख्यमंत्री बनने के बाद अधिकतर विधायक मंत्री बनने का ख्वाब संजो चुके हैं। यही नहीं, कुछ ने तो पद के लिए जगह जगह हाजिरी लगाना भी शुरू कर दी है। चूंकि इस बार पूर्व मंत्री गुलाब सिंह ठाकुर, रविंद्र रवि, प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती चुनाव हार गए हैं।
ऐसे में वरिष्ठों की सूची कम है लेकिन युवाओं, जातीय और क्षेत्रीय समीकरण को साधना भाजपा के रणनीतिकारों के रणनीतिक कौशल की कसौटी जरूर बन गया है। खुद प्रधानमंत्री मोदी युवाओं पर ज्यादा जोर देते रहे हैं, ऐसे में माना जा रहा है कि आधा मंत्रिमंडल युवाओं का हो सकता है। मंत्री बनाने की भी सीमा है, जिससे चुनौती और बढ़ गई है।
मंडी से दो, कांगड़ा से तीन मंत्री होने की संभावना
मुख्यमंत्री जयराम के अलावा मंडी से कम से कम दो कैबिनेट मंत्री बनने की उम्मीद है। इनमें हाल में कांग्रेस से भाजपा में आए पूर्व मंत्री व मंडल सदर से विधायक अनिल शर्मा का मंत्री बनना तो लगभग तय है।
वहीं वरिष्ठ नेता महेंद्र सिंह को भी पार्टी नजरंदाज नहीं कर सकती। 11 सीटें जिताने वाले कांगड़ा जिले को भी मुख्यमंत्री पद के बदले में कम से कम तीन मंत्री मिल सकते हैं।
मंत्रिमंडल में चंबा को भी जगह मिलने की उम्मीद है। शिमला में चूंकि इस बार सुरेश भारद्वाज लगातार तीसरी बार विधायक चुनकर आए हैं, ऐसे में जुब्बल से विधायक नरेंद्र बरागटा के लिए मंत्री पद पाना आसान नहीं होगा।
इन दिग्गजों की राह है आसान
वरिष्ठ नेताओं की सूची में शामिल पूर्व मंत्री राजीव बिंदल के अलावा सरवीण चौधरी और किशन कपूर के कैबिनेट में शामिल होने की संभावना है।
चूंकि तीनों ही जातीय, क्षेत्रीय और वरिष्ठता के समीकरण में फिट बैठते हैं, ऐसे में इनको मंत्रिमंडल से बाहर रख पाना संगठन के लिए आसान नहीं है।
वहीं, कांग्रेस के दिग्गज नेताओं को चुनावी रण में धूल चटाने वाले विधायकों को भी प्रसाद मिल सकता है।
कौल सिंह को हराने वाले जवाहर ठाकुर, जीएस बाली को मात देने वाले अरुण कुमार उर्फ कूका, भरमौर से जिया लाल कपूर, बल्ह से इंद्र सिंह गांधी, कसौली से राजीव सैजल को भी सीपीएस की कुर्सी मिल सकती है।
यूपी उत्तराखंड की तर्ज पर ही होगा मंत्रिमंडल
हिमाचल में भी यूपी उत्तराखंड की तर्ज पर ही मंत्रिमंडल बनाए जाने की संभावना है। दोनों ही राज्यों में पूरा मंत्रिमंडल नहीं बनाया गया, वैसा ही हिमाचल में भी हो सकता है।
ऐसा इसलिए भी किया जा सकता है कि किसी को आगे एडजस्ट करना हो तो आसानी से किया जा सकता है। जानकार बताते हैं कि मंत्रिमंडल में उन चेहरों को प्राथमिकता मिलने की संभावना है जिनके पक्ष में जातीय, क्षेत्रीय, वरिष्ठता या युवा जैसे कम से कम दो समीकरण हों।
युवाओं में नेतृत्व संगठन की असली चुनौती
वरिष्ठों में से मंत्रियों का चयन करने से ज्यादा युवा शक्ति को नेतृत्व देना संगठन के लिए असली चुनौती रहेगा। पार्टी के टिकट पर पहली बार 23 ऐसे प्रत्याशी विधानसभा पहुंचे हैं जिन्होंने पहली बार चुनाव लड़ा।
चूंकि युवा और फर्स्ट टाइमर पर पीएम मोदी का विश्वास रहा है, ऐसे में इनमें से मंत्रिमंडल में सबको संतुष्ट करते हुए सही चुनाव की परीक्षा रहेगी।