हिमाचल: कर्तव्य पथ पर दिखेगी भारत-रूस मैत्री की प्रतीक नग्गर रोरिक आर्ट गैलरी, जानें इसका इतिहास
हिमाचल प्रदेश 26 जनवरी को दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड में रूस और भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन विख्यात चित्रकार निकोलस रोरिक के माध्यम से करेगा।
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वर्ष 2025 में कर्तव्य पथ पर भारत-रूस की मैत्री की मिसाल निकोलस रोरिक आर्ट गैलरी की झलक दिखेगी। हिमाचल प्रदेश 26 जनवरी को दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड में रूस और भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन विख्यात चित्रकार निकोलस रोरिक के माध्यम से करेगा। रूसी कलाकार रोरिक का 1874 में जन्म हुआ था। इस वर्ष उनकी 150वीं जयंती है। रोरिक आर्ट गैलरी कुल्लू जिला के नग्गर में है। 1917 की रूस क्रांति के बाद रशियन चित्रकार रोरिक हिमाचल आए थे। नग्गर में रोरिक ने रहकर चित्रकला में देश-विदेश में नाम कमाया था। इन चित्रकलाओं की झांकी को हिमाचल प्रदेश सरकार गणतंत्र दिवस की परेड के माध्यम से देश-प्रदेश में दर्शाएगी।
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विकासात्मक परियोजनाएं भी दिखाई जाएंगी
इसके अलावा हिमाचल में बन रहे फोरलेन के मॉडल के माध्यम से विकासात्मक परियोजनाएं भी दिखाई जाएंगी। शुक्रवार को नई दिल्ली में हुई बैठक में भारत सरकार ने दोनों मॉडल में प्रदेश के अफसरों को कुछ और सुधार करने के सुझाव दिए हैं। इसी माह इसको लेकर एक और बैठक दिल्ली में होगी। नग्गर में रोरिक के स्टूडियो, उनकी चित्रकला सहित जीवन यात्रा को दर्शाने के लिए इन दिनों मॉडल तैयार किए जा रहे हैं। भाषा एवं संस्कृति विभाग के अधिकारियों ने बताया कि रोरिक का प्रदेश से जुड़ाव, यहां की संस्कृ़ति को किस प्रकार से उन्होंने सहेजा। किस प्रकार स्वरूप एवं रंगों के द्वारा जीवन को प्रदर्शित किया। यह सब मॉडल के माध्यम से दिखाया जाएगा। रोरिक को एक चित्रकार, पुरातत्ववेता, नृविज्ञानी, अधिवक्ता, भूगोलवेता, कवि, इतिहासकार, दार्शनिक, वैज्ञानिक, पर्यटक, शांति के सेनानी के तौर पर भी जाना जाता है। रूस के इतिहास में उनका सम्मानजनक स्थान है।
निकोलस के बेटे स्वेतोस्लाव ने 1962 में की थी आर्ट गैलरी स्थापित
नग्गर में निकोलस रोरिक आर्ट गैलरी की स्थापना 1962 में निकोलस रोरिक के बेटे स्वेतोस्लाव रोरिक ने की थी। जिस भवन में अब गैलरी है, वह कभी निकोलस रोरिक का निवास हुआ करता था। हिमाचल प्रदेश सरकार और रूसी सरकार ने इस आर्ट गैलरी को रोरिक हेरिटेज संग्रहालय के रूप में चलाने के लिए एक ट्रस्ट बनाया है। रूस और भारत की मित्रता का यह एक बड़ा उदाहरण भी है। गणतंत्र दिवस पर इस बार स्वर्णिम भारत विरासत और विकास थीम से जुड़े मॉडल बनाए जा रहे हैं। इसके चलते ही प्रदेश सरकार ने 26 जनवरी की झांकी के लिए निकोलस रोरिक पर आधारित मॉडल बनाने का फैसला लिया है।
बीते साल बदले थे झांकियों के चयन के नियम
गणतंत्र दिवस 2024 के लिए राज्यों की झांकियां चयनित करने के लिए केंद्र सरकार ने नियम बदले थे। कर्तव्य पथ पर झांकी निकालने के लिए अब हर राज्य को मौका देने का फैसला हुआ है। 2024 से 2026 तक एक बार झांकी निकालने के लिए सभी राज्यों से प्राथमिकताएं मांगी गई थीं। इसके लिए देश के सभी राज्यों के केंद्र सरकार ने ग्रुप बनाए हैं। उत्तर भारत के सात राज्यों में हिमाचल को शामिल किया गया है। हिमाचल ने वर्ष 2025 के गणतंत्र दिवस पर झांकी निकालने की हामी भरी थी। इसी कड़ी में अब सरकार अपना मॉडल तैयार कर रही है।