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हिमाचल: केंद्र से नहीं आया पैसा, प्रदेश में ग्राम रोजगार सेवकों का वेतन अटका

Mon, 12 May 2025 12:59 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, धर्मशाला
अमर उजाला ब्यूरो, धर्मशाला Published by: Krishan Singh Updated Mon, 12 May 2025 12:59 PM IST
सार

केंद्र से बजट नहीं आने के कारण प्रदेश की विभिन्न पंचायतों में तैनात ग्राम रोजगार सेवकों (जीआरएस) को पिछले करीब तीन-चार माह से वेतन नहीं मिल रहा है। 

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Himachal: Money did not come from the center, salary of village employment servants stuck
वेतन अटका। - फोटो : freepik

विस्तार

केंद्र सरकार की ओर से मनरेगा के बजट में की गई कटौती का असर अब धीरे-धीरे दिखना शुरू हो गया है। केंद्र से बजट नहीं आने के कारण प्रदेश की विभिन्न पंचायतों में तैनात ग्राम रोजगार सेवकों (जीआरएस) को पिछले करीब तीन-चार माह से वेतन नहीं मिल रहा है। वहीं केंद्र से पैसा नहीं आने के कारण प्रदेश सरकार ने भी अपना शेयर नहीं डाला है, जिसके चलते जीआरएस को वेतन के लिए तरसना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार, प्रदेश की विभिन्न ग्राम पंचायतों में मनरेगा कार्यों को सही ढंग से संचालित करने के लिए ग्राम रोजगार सेवकों को नियुक्त किया गया है। पंचायतों में तैनात करीब 1034 जीआरएस को वेतन के लिए राष्ट्रीय रोजगार गारंटी एक्ट के तहत अलग से बजट आता था, जो कि पिछले कुछ माह से बंद पड़ा है। इसके चलते इन्हें मासिक वेतन भुगतान करने में देरी हो रही है। इसके चलते इन ग्राम रोजगार सेवकों को करीब तीन माह से वेतन नहीं मिला है।

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बिना वेतन के उन्हें अपने परिवार के पालन-पोषण की चिंता सताने लगी है। कई रोजगार सेवक दूसरों से उधार लेकर बच्चों की पढ़ाई और परिवार का पालन पोषण का खर्च उठा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत सूबे की पंचायतों में चल रहे कार्य के सुचारु संचालन के लिए सरकार ने कुछ साल पहले ग्रामीण रोजगार सेवकों की नियुक्तियां की थीं। पूरे प्रदेश में ग्रामीण रोजगार सेवकों की संख्या 1034 के करीब है। पंचायत के विकास कार्यों में इनका अहम योगदान है। हर ग्राम रोजगार सेवक दो से तीन पंचायतों का जिम्मा संभाले हुए है। इसके बावजूद इन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा।उधर, ग्राम रोजगार सेवक जिला कांगड़ा के पूर्व अध्यक्ष साहिब सिंह ने बताया कि उन्हें करीब तीन माह से वेतन नहीं मिला। उन्होंने प्रदेश सरकार और विभाग से मांग की है कि उन्हें जल्द से जल्द वेतन मुहैया करवाया, ताकि वेतन न मिलने के कारण उन्हें पेश आ रही दिक्कतें खत्म हो सकें।

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