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GST: हजारों कारोबारियों को टैक्स रिफंड में मिली बड़ी राहत

Thu, 23 Nov 2017 04:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मंडी
ब्यूरो/अमर उजाला, मंडी Updated Thu, 23 Nov 2017 04:39 PM IST
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Himachal Mandi Great relief for the traders in GST tax refund

डिजिटल युग में कंप्यूटर और इंटरनेट का कम ज्ञान रखने वाले कारोबारियों को वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी और एसजीएसटी) के तहत बड़ी राहत मिली है। कारोबारी अब ऑफलाइन (फार्म भरकर) टैक्स रिफंड के हकदार भी होंगे। इससे पहले डीलर को टैक्स रिफंड के लिए ऑनलाइन (ई- टैक्स) औपचारिकताएं ही भरनी पड़ती थीं।

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लेकिन, अब संबंधित सेवा के लिए फार्म भरकर भी रिफंड क्लेम किया जा सकता है। इस संबंध में निर्देश जिला आबकारी एवं कराधान विभाग के पास पहुंच चुके हैं। जीएसटी के संशोधन के बाद यह व्यवस्था त्वरित ढंग से लागू हो चुकी है। इससे मंडी जिला के करीब 10 हजार से अधिक और प्रदेश भर में करीब 80 हजार डीलर लाभान्वित होंगे।
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वर्तमान में केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर एवं स्टेट वस्तु एवं सेवा कर में कई प्रावधानों में इनपुट टैक्स क्रेडिट समेत अन्य रिफंड की सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं।
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आबकारी एवं कराधान विभाग के सह आयुक्त प्रीतपाल सिंह ने कहा कि इस संदर्भ में सूचना मिल चुकी है। अब डीलर ऑफलाइन रिफंड फाइल कर सकता है। संबंधित फार्म विभाग के कार्यालय एवं वेबसाइट से डाउनलोड किए जा सकते हैं। 

इन मामलों में मिलता है टैक्स रिफंड

Himachal Mandi Great relief for the traders in GST tax refund

तीन प्रकार से तय है जीएसटी 
जीएसटी तीन प्रकार से तय है। सीजीएसटी में केंद्र सरकार द्वारा राजस्व एकत्र किया जाता है। सीजीएसटी में राज्य में बिक्री के लिए राज्य सरकारों द्वारा राजस्व एकत्र किया जाता है। आईजीएसटी जहां अंतरराज्यीय बिक्री के लिए केंद्र सरकार की ओर से राजस्व एकत्र किया जाएगा 

इन मामलों में मिलता है टैक्स रिफंड 
टैक्स रिफंड किसी भी राशि का संदर्भ देता है जो कर विभाग से करदाता को देय या वापस किया जाता है। सात प्रकार के हालात में धन वापसी की अनुमति दी जाती है और डीलर केवल इन स्थितियों में टैक्स रिफंड का दावा कर सकते हैं।

जैसे करों का अधिक भुगतान, उत्पादन की आपूर्ति के खाते पर अप्रयुक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट निर्यात होना, आदानों पर कर की दर आउटपुट पर टैक्स की दर से अधिक (इन्वर्टेड कर्तव्य संरचना) आदि। 

जीएसटी में विवादों को सुलझाने के लिए अपीलेट अथॉरिटी भी तय कर दिए गए हैं। डिप्टी सुपरिंटेंडेंट या असिस्टेंट कमिश्नर टैक्स की ओर से तय मामलों को कारोबारी एडिशनल या ज्वाइंट कमिश्नर के पास चैलेंज कर सकते हैं।

जबकि एडिशनल या ज्वाइंट कमिश्नर द्वारा तय मामलों की आपत्तियां कमिश्नर अपीलेट अथॉरिटी के पास तय होंगी।

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